मैं जब छोटी थी तो बहुत शरारती थी। मेरी और मेरे भाई की उम्र में ज्यादा फर्क नहीं था। हम दोनों खूब शरारतें करते रहते थे। एक रोज मैंने अपने भाई से कहा कि वो मेरी कोई ड्रेस पहन ले, मैं उसके कपड़े पहन लूंगी। भैया पहले तो झिझका पर बाद में मान गया और मेरी नई फ्रॉक पहनकर दोस्तों के पास चला गया। इधर मैंने भी उसकी शर्ट और निक्कर पहन लिए।

मुझे तो किसी ने कुछ नहीं कहा, पर भैया को उसके दोस्तों ने खूब चिढ़ाया। वह बेचारा रोता हुआ घर आया। पूरे घर को मेरी शरारत का पता चल चुका था। फिर तो इतनी डांट पड़ी कि पूछो मत। मुझे भी भैया की हालत देख खुद पर गुस्सा आया और मैंने कान पकड़ कर सॉरी बोला। अपनी पॉकेटमनी से उसे चॉकलेट दिलाई तब वह चुप हुआ। आज भी यह घटना गुदगुदा जाती है।

 

 

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