कहीं आप की कुंडली तो नहीं दे रही हार्ट अटैक के संकेत

गृहलक्ष्मी टीम

3rd July 2017

जन्मकुंडली में हमारे जीवन के समस्त क्रियाकलापों का विवरण लिखा होता है। यहां तक की कुंडली से हम हार्ट अटैक की जानकारी भी पा सकते हैं आइए जानते हैं कौन से ग्रह व दशाएं हार्ट अटैक का कारण बनती हैं।

कहीं आप की कुंडली तो नहीं दे रही हार्ट अटैक के संकेत
 
 
जन्म के समय ही हमारे पूरे जीवन की रूपरेखा हमारी जन्मकुंडली में तैयार मिलती हैं। जन्मकुंडली से अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में ज्योतिष विद्या से जाना जा सकता है।
 
चूंकि ईश्वर से हमें भाग्य के साथ-साथ कर्म करने का भी अधिकार मिला है अत: अच्छे कर्म द्वारा हम अपने भाग्य और होनी को बदल सकते हैं। जहां तक स्वास्थ्य की बात है तो कुंडली में रोग आदि के भी स्पष्ट संकेत मिल सकते हैं। यदि हम पहले से इसकी जानकारी हासिल कर लें तो रोग से बचाव या इलाज सावधानीपूर्वक कर सकते हैं।
 
ज्योतिष शास्त्र में चन्द्रमा ग्रह को मन और हृदय के बारे में सोचने और महसूस करने का कारक माना गया है। शरीर में गति और रक्त संचार के लिए हृदय का कारक ग्रह सूर्य माना जाता है।
 
कुंडली में हृदय का स्थान चतुर्थ भाव माना गया है। मंगल ग्रह भी हृदय की गतिविधियों और रुकावटों को विशेष रूप से प्रभावित करता है। गुरु ग्रह हमारे शरीर में अतिरिक्त चर्बी को जमा करता है। यदि गुरु ग्रह कुंडली में अशुभ है तो वह अतिरिक्त चर्बी नसों में इकट्ठी करके रक्त प्रवाह को अवरुद्ध करता है।
 
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि जन्मकुंडली का चौथा भाव तथा सूर्य, चन्द्र, मंगल और गुरु ग्रह हृदय रोग के कारण ग्रह हैं। यदि कुंडली में निम्न स्थितियां हो तो हृदय रोग का संकेत है-
 
- चौथे भाव में पापयुक्त ग्रह हो, सुखेज्ञ पापग्रहों के अंतराल में हो या पापग्रहों की उस पर दृष्टि हो यानी यदि चौथे भाव में शनि, राहु, केतु बैठे हों, अथवा इन ग्रहों की दृष्टि चौथे भाव पर हों, तो हृदय रोग की प्रबल संभावना समझना यथार्थ होगा।
- यदि सुख भाव में सूर्य, चंद्रमा और उनके साथ नीच का मंगल पड़ा हो, मंगल की एक राशि लग्न में दूसरी आठवें भाव में हो अर्थात् यदि यह मेष लग्न की कुंडली हो, तो हृदय रोग हो सकता है।
- चौथे भाव में गुरु, शनि व मंगल की युति को हृदय रोग का एक लक्षण माना जाता है और इसी कुंडली में गुरु की राशि धनु में यदि नीच का राहु हो तो हृदय रोग की संभावना और भी बढ़ जाती है।
- यदि चौथे भाव में राहु हो और उस पर सूर्य या शनि की दृष्टि हो तथा लग्नेश निर्बल हो तो भी हृदय रोग का प्रकोप संभव हो सकता है।
- मंगल की राशि वृश्चिक को भी क्रूर राशि माना गया है। यदि इस राशि में सूर्य, मंगल और शनि के साथ हो तो भी हृदय रोग हो सकता है।
- यदि किसी जन्मकुंडली में उपरोक्त स्थिति दिखाई देती हो तो ऐसे जातक को युवावस्था से ही अपनी जीवनशैली और खान-पान में इस प्रकार बदलाव लाने चाहिए, ताकि हृदय रोग से बचा जा सके।
 
बचाव के उपाय-
 
1. जातक रोज सूर्य को जल चढ़ावे।
2. चन्द्रमा के मंत्रों का जाप करें।
3. हनुमान चालीसा का पाठ करें।
4. महामृत्युंजय का जाप करें।
 
इन उपायों से हृदय रोग से मुक्ति मिल जाएगी।
 
(साभार - शशिकांत दत्तात्रय पंड़ित)
 
 
 
 

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