जानिए क्यों एक दूसरे को चाचू कहकर बुलाते हैं अर्जुन और अनिल कपूर

गरिमा चंद्रा

14th July 2017

अनीज बाज़मी की आने वाली फ़िल्म "मुबारकां" का सभी को बेसब्री से इंतज़ार है, इसकी एक वजह तो ये है कि बहुत दिनों बाद मनोरंजन से भरपूर कोई कॉमडी फ़िल्म आ रही है, दूसरा ये है कि पहली बार अनिल कपूर और अर्जुन कपूर एक साथ बड़े पर्दे पर काम करते नज़र आएंगे। फ़िल्म 'मुबारकां' के प्रामोशान के दौरान एक छोटी-सी रोचक मुलाक़ात में ही इन दोनों ने एक दूसरे के बारे में बड़ी रोचक बातें शेयर की, पढ़िए- 

जानिए क्यों एक दूसरे को चाचू कहकर बुलाते हैं अर्जुन और अनिल कपूर
‘मुबारकां’- इस फिल्म की ख़ास बात क्या है ?
अर्जुन - मेरी नज़र में फिल्म की सबसे खास बात ये है कि मैंने चाचू के साथ काम किया है। इस अवसर को मैं एक अचीवमेंट के तौर पर देखता हूं।
अनिल-- फ़िल्म की एक ख़ास बात यह भी है कि मैंने इस फिल्म में सरदार का किरदार निभाया है। अपने इतने लम्बे कारियर में मैं आज तक सरदार नहीं बना । हम चाचा भतीजा पहली बार एक साथ काम कर रहे हैं और फिल्म में हमारा डबल रोल भी है। 
 
आप दोनों को एक साथ कॉमडी करने में कितना मज़ा आया ?
अनिल -- मैं पहले भी कई बार कॉमडी फ़िल्म कर चुका हूँ ,कॉमडी सीन करने में हमेशा मज़ा ही आता है।
अर्जुन -- अभी तक मैंने अपनी फिल्मों में थोड़ी बहुत कॉमेडी की है, लेकिन पूरी तरह से कॉमेडी करने का यह मेरा पहला अनुभव है। किसी को भी हंसाना आसान नहीं होता है, फिर कॉमडी में तो टाईमिंग जरूरी होता है। काफी कुछ सीखा हूं ।
 
कभी सोचा था कि एक दूसरे के साथ काम करेंगे ?
अनिल -- मैंने तो कभी ये भी नहीं सोचा था कि अर्जुन ऐक्टिंग में आएगा ,जहाँ तक मुझे पता था अर्जुन की डायरेक्शन में रुचि थी। उसने फिल्म ‘सलाम ए इश्क़’ में असिस्टेंट डायरेक्टर का काम किया था। अर्जुन को एडिटिंग बहुत अच्छी आती है, अर्जुन फ़िल्म के ट्रेलर बनाने में एक्सपर्ट है। जब ‘इशकजादे’ में उसकी ऐक्टिंग देखी, बहुत अच्छा लगा। मुबारकां के लिए मैंने ही उसे स्क्रिप्ट सुनने की सलाह दी थी।
अर्जुन -- चाचू के साथ काम करने का मेरा तो सपना था, बचपन से उन्हें एक आयडील की तरह देखता था। बचपन में जब कभी सब साथ खाना खाते, तो सोचता था कि इनके साथ एक फ़िल्म करूँगा। शुरू में चाचू के साथ काम करने के ऑफर आए, लेकिन मैं परिवार का फ़ायदा नहीं उठाना चाहता था । जब मुबारकां फ़िल्म के लिए चाचू ने ख़ुद मेरा नाम सजेस्ट किया तो लगा कि मैंने लाइफ़ में कुछ अर्न कर लिया। अपने सपने को मैंने अपनी महनेत से पूरा किया है ।
 
आप दोनों एक दूसरे को चाचू कहते है ? इसका क्या राज है ?
अनिल -- जब अर्जुन का जन्म हुआ तो मैं पहली बार चाचा बना ,सोचा ये मुझे चाचू बुलाए उसके पहले मैं ही इसे अपना चाचू बना लता हूं। बस यूँ ही मैं उसे चाचू बोलने लगा।
अर्जुन -- (हंस कर) अब मेरे तो वो चाचू ही है, तो उन्हें चाचू ही बुलाऊँगा ना ।

 

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