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ये हैं इंडिया के 5 बेमिसाल टीचर, कोई यू-ट्यूब पर तो कोई पुल के नीचे देता है क्लासेज

अर्चना चतुर्वेदी

5th September 2017

ये हैं इंडिया के 5 बेमिसाल टीचर, कोई यू-ट्यूब पर तो कोई पुल के नीचे देता है क्लासेज

 

वो लोग दुनिया से अलग ही होते हैं जिनमें कुछ कर गुजरने का हौसला होता है और इनका जीवन लोगों के लिए एक मिसाल बन जाता है। यहां हम आपको कुछ ऐसी ही शख्सियतों के बारे में बतायेंगे जिन्होंने अपने ज्ञान का इस्तेमाल जरूरमंद बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए किया। ये वो गुरू हैं जो बिना किसी स्वार्थ के एक ऐसी फौैज को तैयार कर रहे हैं जो आने वाले कल को आज से कई गुना बेहतर बना सके।

 
  
गरीबों के मसीहा आनंद कुमार
 
ये हैं बिहार के एक ऐसे गुरू जिन्होंने शिक्षा के स्तर को अपने मेहनत और लगन से और भी ऊँचा कर दिया है। पटना में 'सुपर 30' नाम से आईआईटी की कोचिंग चलाने वाला ये शख्स आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है। वहां के छात्र आनंद कुमार को भगवान मानते हैं। महंगी कोचिंग का खर्च हर स्‍टूडेंट का परिवार नहीं उठा सकता, ऐसे में इन छात्रों का जिम्मा आनंद खुद उठाते हैँ।अभी तक अपने लगभग 350 स्टूडेंट्स को वो आईआईटी का एग्जाम पास करा चुके हैं। आनंद कुमार को शिक्षा के क्षेत्र बहुत से अवार्ड्स व सम्मान मिल चुकें है।
 
 

 साईकिल गुरु आदित्य कुमार

मेहनत, काबिलियत और जज्बे की जीती जागती मिसाल हैं फर्रूखाबाद के आदित्य कुमार। इनके जीवन का लक्ष्य है कि ये गरीब बच्चों को आजीवन नि:शुल्क शिक्षा दें। देश के छोटे-छोटे गांवों में अपनी साइकिल से शिक्षा का अलख जगाने के लिए यात्राएं करने वाले आदित्य कुमार का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉड्स सहित कई रिकॉड्स में दर्ज है। इनकी साईकिल जहां रूक जाती है वहीं क्लास शुरू हो जाती है। सभी लोग इन्हें "साइकिल गुरू" के नाम से बुलाते हैं।
 
 
हौंसला हो तो राजेश कुमार शर्मा जैसा
 
दिल्ली की चकाचौंध के बीच एक जगह ऐसी भी है जहां व्यवस्थाओं के अभाव में भी भविष्य की नींव रखी जा रही है। यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन के पुल के नीचे एक ऐसा अनोखा स्कूल चलता है जिसकी कोई इमारत नहीं और न ही वहां कोई क्लासरूम है। लेकिन राजेश कुमार शर्मा नाम के शख्स ने इन सभी सुविधाओं को दरकिनार करके मेट्रो ब्रिज के नीचे ही एक ऐसे स्कूल की शुरूआत की जहां सैकड़ों गरीब बच्चे अपने बेहतर भविष्य का सपना देख सकते हैं। इस स्कूल में करीब 200 से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए दीवार पर ही काला पेंट करके उसे ब्लैक बोर्ड बना दिया गया है। बच्चों के बैठने के लिए जमीन में ही दरी बिछाई जाती है। राजेश जी के इस नेक काम में अब कई सहयोगकर्ता जुड़कर अपनी सेवा दे रहे हैं।
 
 
रियल लाइफ के रैंचो हैं अरविंद गुप्ता
 
पूणे के अरविंद गुप्ता पिछले 30 साल से जरूरतमंद बच्चों को अपने अनोखे अंदाज से कूड़ें के जुगाड़ से साइंस का पाठ पढ़ा रहे हैं। उनके 'चिल्ड्रन एंड साइंस' सेंटर में बच्चों को वेस्ट मटेरियल यानि कूड़े से खिलौने बनाना सिखाया जाता है। यहां कला और दिमाग का सही इस्तेमाल कर साइंस की हर गुत्थी को आसानी और मनोरंजक तरीके से पेश किया जाता है। अरविंद ने ऐसे कई वीडियोज बनाए हैं जिससे साइंस की कई थ्योरी आसानी से समझी जा सकती है। उनके डिफरेंट और क्रिएटिव स्टाइल को देख कर लोग उन्हें फिल्म 3 इडियट का रेंचो कहकर बुलाते हैं। 
 
 
यू-ट्यूब की फेमस टीचर जी रोशनी मुखर्जी
 
झारखंड की रोशनी मुखर्जी आज के दौर की ऐसी गुरू हैं जिन्होंने बच्चों के पढ़ाई के डर को खत्म करने का ऐसा नायाब तरीका निकाला कि आज हर जगह उनके ही चर्चे हैं। रोशनी ने साल 2011 में यू-ट्यूब पर 'एक्ज़ाम फ़ीवर' के नाम से चैनल बनाया जिसमें मैथ्स, बायो, फिजिक्स, कैमेस्ट्री की हर थ्योरी को रोचक तरीके से वीडियो के जरिए समझाया जाता है। इंग्लिश और हिंदी में नि:शुल्क उपलब्ध इस चैनल के साढें 3 लाख से भी ज्यादा सब्सक्राइबर हैं। उनका ये अनोखा प्रयास आज स्टूडेंट्स के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। रोशनी महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा दिए गए 100 महिला अचीवर्स अवॉर्ड की लिस्ट में भी शामिल हैं। 
 
 
 
गृहलक्ष्मी ऐसे टीचर्स के हौसलों और जज्बे को सलाम करती है जो अंधकार में भी शिक्षा की लौ कायम रखते हैं।
 
 
 

 

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