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बच्चों को प्यार करें पर सीमा में

कमलेश

1st June 2015

जिस तरह से हर चीज की अति बुरी होती है उसी तरह अभिभावकों का बच्चों के प्रति बेपनाह प्यार भी खतरनाक हो सकता है, इसलिए जरूरी है कि इस प्यार में थोड़ा ब्रेक लगाएं।

बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए माता-पिता का प्यार बेहद जरूरी है। बिना प्यार के जहां बच्चे का विकास रुक जाता है वहीं वह भावनात्मक रूप से टूट भी जाता है। लेकिन किसी भी अन्य वस्तु या भावना की तरह प्यार भी जरूरत से ज्यादा हो तो फायदे की जगह नुकसान ही पहुंचाता है।

इस संबंध में मनोवैज्ञानिक डॉ. डी.एस. नरबान का कहना है कि अति में प्यार भी बच्चे को जिद्दी, चिड़चिड़ा या हिंसक बना देता है। वह जाने अनजाने मां-बाप के प्यार का फायदा भी उठाता है और आपकी कमजोरी पकड़ लेता है और उसका दुरुपयोग करता है। इसलिए बच्चे को अपना प्यार दें पर सीमा में, ताकि प्यार और डांट का संतुलन उसे पूर्ण विकास दे सके और अच्छा इंसान बन सके।

क्या करें
अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आपके प्यार को मोहरा न बनाए तो इसके लिए जरूरी है कुछ बातों का ध्यान रखना, जैसे-

बच्चे को सामान की तरह न रखें
अपने बच्चे को किसी सामान की तरह हमेशा संभालकर न रखें। आपके प्यार और फिक्र की अधिकता उसे स्वत: कुछ सीखने नहीं देगी। उसे चोट लग जाएगी, गिर जाएगा या वह कोई भी मुश्किल काम कैसे करेगा यह सोचकर हमेशा बच्चे को खुद से चिपका कर न रखें। अगर आप ही उसके लिए सब कुछ कर देंगे तो वह आगे बाहर निकल कर मुश्किलों का सामना नहीं कर पाएगा। एक चिडिय़ा की तरह जब तक जरूरत है बच्चे को चोंच से खाना खिलाएं लेकिन जरूरत खत्म होने पर उसे उडऩा भी सिखाएं ताकि उसकी आप पर निर्भरता कम हो सके। उम्र के अनुसार उसे अपने काम खुद करने दें।
लड़कियों के संबंध में यह बात और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि माता-पिता डर के कारण उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना नहीं करने देते, जबकि आपकी बेटी को तो एक दिन आपकी छत्रछाया से बाहर जाना ही है। ऐसे में उसे इतना आत्मनिर्भर बनाएं कि आपकी छत्रछाया के बिना भी वह डगमगाए नहीं।

तुलना करके प्यार न करें
कभी भी दो बच्चों की आपस में तुलना करके प्यार न करें। बच्चे को मनाने या उसे कोई काम कराने के लिए आप यह न कहें कि वह छोटे या बड़े भाई-बहन या पड़ोस के किसी बच्चे से ज्यादा अच्छा है या आप उसे ज्यादा प्यार करते हैं। इससे एक तो दो बच्चों में इष्र्या उत्पन्न हो सकती है और दूसरा यह कि माता-पिता की शह पाकर बच्चा अपने भाई या बहन की उपेक्षा करने लगता है। वह उन्हें नुकसान भी पहुंचा सकता है। माता-पिता के ऐसे व्यवहार से हो सकता है कि बच्चा उस समय आपकी बात मान ले लेकिन धीरे-धीरे वह मां-बाप की उपेक्षा भी करने लगता है।

अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें
यह सही है कि अपने बच्चे को हमेशा पास रखना हर मां-बाप को अच्छा लगता है। बच्चे को लेकर मन में डर भी होता है। लेकिन यही प्यार और डर आपके बच्चे को कमजोर भी कर सकता है। जब बच्चे को मजबूती की जरूरत है तो मां-बाप भी अपने डर पर काबू कर बच्चे को प्रोत्साहित करें। यह न हो की हमेशा गोद में रखकर आप उसे खेलने से वंचित कर दें। इसी तरह बच्चे को जब बाहर पढऩे या काम करने जाना हो तो अपने आंसुओं को उसकी कमजोरी न बनाएं। उसे आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित करें।

बच्चे को आपस में बाटें नहीं
आमतौर पर यह देखा जाता है कि दो बच्चों में माता-पिता कहते हैं कि यह मेरी बेटी है यह मेरा बेटा है। इस तरह का प्यार कतई सही नहीं है। ऐसे में एक बच्चे को बहुत अधिक प्यार मिलता है लेकिन दूसरा प्यार से अछूता रह जाता है। साथ ही बच्चा यह समझने लगता है कि मुझे पैरेंट प्यार ही नहीं करते और वह उनसे कभी घुल-मिल नहीं पाता। याद रखें कि जब भी आप बच्चे को एक-दूसरे में बांटते हैं तो आप उसे आधा अनाथ कर देते हैं और उससे एक पैरेंट छीन लेते हैं। यह बच्चे के विकास में भी बाधा बनता है।

मना करने से न कतराएं
डॉ. नरबान बताते हैं कि बच्चा अगर कोई गलत काम कर रहा है तो उसे रोकने से कभी न कतराएं। हो सकता है कि बच्चे को बुरा लगे वो गुस्सा भी हो जाए लेकिन आपकी वह डांट उसके लिए कड़वी दवाई की तरह है। यह न सोचें की बच्चे को लगेगा कि आप उससे प्यार नहीं करते। जिस समय बच्चा कुछ गलत कर रहा है जैसे देर रात बाहर खेलना या दोस्तों के साथ स्मोक करना तो आप उसे उसी समय न टोकें बल्कि घर में आने के बाद उससे बात जरूर करें और समझाएं। अगर आप बच्चे के गुस्से या खुद को बुरा न बनाने के डर से उसे नहीं डांटते तो मतलब है कि आप बच्चे को प्यार नहीं करते बल्कि अपना स्वार्थ पूरा कर रहे हैं।

अतिरिक्त प्यार  से बचें
प्यार बच्चे की भलाई के लिए ज़रूरी है न कि उसके अंदर गलत आदतों को जन्म देने के लिए। अगर माता या पिता में से कोई एक बच्चे को गलत काम के लिए डांट रहा है तो दूसरा बच्चे को शह न दे। ऐसा न होने पर बच्चा अपनी गलती को नहीं समझ पाता और वह दूसरे पैरेंट को सम्मान देना भी कम कर देता है।

तुरंत मनाएं नहीं
बच्चों को गलत काम के लिए डांटने पर कई बार वे गुस्सा हो जाते हैं। गलती मानने की बजाए वे माता-पिता से ही बात करना बंद कर देते हैं या खाना छोड़ देते हैं। ऐसे में बच्चे की ब्लैक मेलिंग में ना आएं। आपको दुख तो होगा लेकिन खुद को रोकें और बच्चे को तुरंत ही न मनाएं। आपका रूख देखकर बच्चा कुछ देर बाद अपने आप ही ठीक हो जाएगा। बच्चे के गुस्से को ठंडा करने के लिए उसे हमेशा मनाने की बजाए समझाने की कोशिश करें।

मार को ही प्यार न समझें
कई बार माता-पिता बच्चों को प्यार करने का मतलब उन्हें बार-बार टोकना और डांटना ही समझ लेते हैं। उन्हें लगता है कि यह सब बच्चे की भलाई के लिए है। बच्चे को इस तरह का प्यार भी ज्यादा करने से बचें। आपका ऐसे व्यवहार से बच्चा समझने लगेगा की आप उसे प्यार ही नहीं करते और समझते ही नहीं। बच्चे को डांट के साथ-साथ प्यार की भी जरूरत होती है। 

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