कैसे बनाएं ससुराल वालों को अपना

अर्पणारितेश यादव

3rd June 2015

आज की लड़कियां भी चाहे जितनी भी आधुनिकता से भरी क्यों ना हो पर शादी और ससुराल और सास के नाम से सांस अटकती हैं। पर यदि वो ऐसे समय में आत्मविश्वास और विवेक से काम लें तो ससुराल के हर रिश्ते को ताउम्र के लिए अपना बना सकती है।

शादी के बाद एक लड़की सिर्फ पत्नी नहीं बल्कि बहू, चाची, ताई, भाभी, देवरानी, बनती है इसलिए उसे उसी के अनुरूप अपने को ढालना चाहिए ताकि हर रिश्ते में आपके प्यार की झलक नजर आए। मनोचिकित्सक प्रांजलि कहती हैं कि आज की आधुनिकता भरी जिंदगी में जब लड़के की शादी की बात आती है तो सभी माता-पिता चाहते हैं कि लड़की ऐसी आए जो पूरे घर को संभालें। आज की लड़कियां भी चाहे जितनी भी आधुनिकता से भरी क्यों ना हो पर शादी और ससुराल और सास के नाम से सांस अटकती हैं। पर यदि वो ऐसे समय में आत्मविश्वास और विवेक से काम लें तो ससुराल के हर रिश्ते को ताउम्र के लिए अपना बना सकती है। वो कैसे? आइए जानें- 

सास बने हमराज
ससुराल में सास का रिश्ता हर रिश्ते से सर्वोपरि होता है। इसलिए सासू मां का दिल जीतने के लिए उनका विश्वास जीतना बहुत जरूरी होता है। एक बहू के रूप में आपको चाहिए कि सास की भावनाओं का सम्मान करें। उनके ह्रश्वयार भरे व्यवहार में अपनेपन की झलक महसूस करें और उन्हें मां की भांति आदर दें। जब भी उनसे बोलें सोच-समझकर बोले। उनके स्वभाव को जानें, क्योंकि अगर आपको सास के स्वभाव  की अच्छी जानकारी होगी तो रिश्ते में कोई भी दिक्कत नहीं आएगी। बेहतर यही है अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सही व्यवहार से सासू मांका दिल जीतें। एक बात का खास ख्याल रखना चाहिए जिस तरह से आपकी मां आपको कुछ बुरा-भला कह देती है या फिर किसी बात पर डांट-डपट देती है लेकिन आप उनकी बात का बुरा नहीं मानती, ठीक उसी तरह अगर आपकी सासू मां भी आपको कुछ कह दे या किसी बात पर डांट दे तो आप ये ना सोचें कि आपको वह ह्रश्वयार नहीं करती। अक्सर देखने में आता है जब लड़की मां और सास का भेदभाव अपने मन में पाल लेती है तभी परेशानियां बढ़ती हैं, जो कि गलत है।

ससुर से निभाएं
ससुराल का मुखिया ससुर होता है इसलिए बहू का कर्तव्य बनता है कि वह ससुर का पूरा ध्यान रखें। उनसे नपे-तुले शब्दों में अपनी बात को कहें। उन्हें पिता की तरह उचित मानसम्मान दें। उनकी दिनचर्या संबंधी आदतों तथा पसंद नापसंद का ध्यान रखें। उनकी इच्छा के विरूद्ध कोई कार्य ना करें। एक पिता की तरह उनकी हर बात को ध्यान से सुनें। 


देवरानी-जेठानी बने बहनें
देवरानी-जेठानी के रिश्ते में प्रतिस्पर्धा व द्वेष की भावना ना रहे इसके लिए आपस में प्रेम बनाए रखें। जेठानी और देवरानी दोनों एक-दूसरे को छोटी बहन के समान समझें। यदि एक-दूसरे को किसी की बात का बुरा लग जाता है तो अपनी बेइज्जती समझकर एक-दूसरे से लड़ाई करने की बजाए ह्रश्वयार से बात करें व माफी मांग लें। छोटी-छोटी बातों में बहस ना करें। घरेलू कार्यों को लेकर झगड़े ना करें। बल्कि एक-दूसरे को पूर्ण सहयोग दें। एक-दूसरे की इच्छाओं और आवश्यकताओं का ध्यान रखें।


ननद को बनाएं सहेली
ननद विवाहित हो या अविवाहित हर दृष्टि से उसका परिवार में महत्वपूर्ण स्थान होता है। उसके प्रति जरा सी अनदेखी पूरे घर को हिला के रख देती है, क्योंकि ननद, बहू और सास के बीच की कड़ी होती है। इसलिए ननद को ननद नहीं, बल्कि बहन की तरह सम्मान देने के साथ-साथ उसे अपना मित्र बनाएं। उसके साथ समय बिताएं। खाली समय में उसके साथ बैठकर बात करें ताकि आप उसकी पसंद नापसंद, आदतों व इच्छाओं से भली-भांति परिचित हो सकें और उसके अनुसार अपने व्यवहार को संतुलित रख सकें। 


देवर हो छोटा भाई
भाभी और देवर का रिश्ता बहुत ही स्नेहिल रिश्ता होता है, जिसमें छेड़छाड़, मज़ाक होना एक आम बात है। यह रिश्ता यंू ही कायम रहे इसके लिए देवर को छोटे भाई के समान मानें। उससे हंसी मज़ाक करें, लेकिन सीमित दायरे में रहकर। देवर-भाभी के रिश्ते की गरिमा को बनाए रखें। एक-दूसरे का सम्मान करें और हंसी मज़ाक ऐसा करें, जो देखने और सुनने में परिवारवालों को खराब ना लगे।

जेठ बने बड़े भाई
ससुराल में जेठ की अपनी अलग भूमिका होती है। घर में बड़े होने के कारण बहू का फर्ज बनता है उनका सम्मान करें। उनसे किसी भी बात पर बहस ना करें। अगर वो शादीशुदा है तो कोशिश करें कि ऐसा कुछ ना करें, जिससे आपकी व उनकी पत्नी के बीच लड़ाई हो। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि जेठ पति का
बड़ा भाई होता है। घर में उनका ओहदा सर्वोच्च है और हमेशा रहेगा इसलिए उनके बड़ह्रश्वपन को ध्यान में रखते हुए कभी भी मन में द्वेष की भावना उत्पन्न ना होने दें क्योंकि आपके द्वारा असभ्य व्यवहार से दो भाईयों के बीच झगड़ा
भी पनप सकता है। ऐसी स्थिति आने की नौबत  ना आने दें। उनके द्वारा लिए गए घर के फैसलों को नकारें नहीं, बल्कि उनके फैसलों का सम्मान करें। 

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