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किचन गार्डन, से गुलजार डाइनिंग टेबल

प्रगति कौशिक

22nd June 2015

अगर आपकी कलात्मक अभिरुचि आपको संतुष्टि और खुशी प्रदान करती है तो बागवानी भी उन्हीं में से एक है।किचन गार्डन आपको खुशी के साथ-साथ स्वास्थ्य का भी तोहफा देता है।

किचन गार्डन, से गुलजार डाइनिंग टेबल

 

 सर्दियों का मौसम आ गया। ठंडी हवाओं और गुनगुनी धूप का जमकर लुत्फ उठाने का समय भी आ गया है। डाइनिंग टेबल पर जायकेदार खाना सजा हो तो खाने का मजा भी दोगुना हो जाता है। सर्दियों में सब्जियों की ऐसी बहार लगती है कि हमारे खाने का रंग भी हरा-भरा हो उठता है। हालांकि पिछले कुछ समय से सब्जियों का मजा कुछ किरकिरा होता जा रहा है। रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग ने हमारे खाने का मजा बिगाड़ कर रख दिया है। पर घबराइये नहीं। खाने को स्वादिष्ट बनाने का बहुत ही सरल और रोचक उपाय है 'किचन गार्डन'। 'किचन गार्डन' के जरिये आप अपने खाने के स्वाद को ही नहीं, पौष्टिकता को भी बढ़ा सकती हैं। अगर आपकी कलात्मक अभिरुचि आपको संतुष्टि और खुशी प्रदान करती है तो बागवानी भी उन्हीं में से एक है। 'किचन गार्डन' आपको खुशी के साथ-साथ स्वास्थ्य का भी तोहफा देता है। 

'किचन गार्डन' की शुरुआत

'किचन गार्डन' की शुरुआत किस तरह की जाए, इस बारे में दिल्ली में अपनी नर्सरी चला रहे राजेंद्र कुमार ने बताया कि किचन गार्डन के लिए सबसे पहले घर में या आसपास थोड़ी सी खाली और खुली जगह होनी चाहिए। यदि आपके घर के आसपास खाली जगह है तो सबसे पहले मिट्टी की उर्वरकता बढ़ाने के लिए उसमें बजरी या रेत मिला दें। यदि आपके पास जगह की कमी है तो लकड़ी के बॉक्स, पॉट, गमलों आदि का चयन जगह की उपलब्धता के आधार पर कर लें लेकिन प्लास्टिक के कन्टेनर इसके लिए इस्तेमाल न करें। अगर आपके घर के आगे या पीछे खाली जगह नहीं हो तो भी चिंता की बात नहीं है। आप अपना 'किचन गार्डन' अपनी बालकनी या खिड़की पर भी बना सकती हैं। इसके लिए आपको बहुत ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं है।

करें प्लानिंग
एक 'किचन गार्डन' के लिए आपको जरूरत है खाद, बीज, पानी, खाली जगह और गमलों की। आपको सिर्फ प्लानिंग करनी है कि आप अपने 'किचन गार्डन' में क्या उगाना चाहती हैं। विश्वास मानें, आपने थोड़ी जतन से 'किचन गार्डन' विकसित कर लिया तो आपके खाने की टेबल खिल उठेगी। वैसे भी, सर्दियों में हरी सब्जियों की बहार आ जाती है। इसके अलावा नींबू, टमाटर, मटर, गाजर, बीन्स, सलाद पत्ते, करी पत्ता, बैंगन, मूली, चुकंदर, गोभी, पत्ता गोभी या खीरा आप अपने 'किचन गार्डन' में आसानी से उगा सकती हैं।

सूरज की रोशनी है जरूरी
पानी, खाद और मिट्टी की देखभाल के साथ ही जरूरी है कि हमारा किचन गार्डन ऐसी जगह पर हो जहां सूरज की रोशनी करीब छह से आठ घंटे मिलती हो। सब्जियों का चयन भी आपके पास उपलब्ध जगह के हिसाब से किया जाना चाहिए। यदि आपके पास जगह कम है तो गमलों में टमाटर, बैंगन, करी पत्ता, हरी मिर्च, पुदीना आसानी से उगाए जा सकते हैं।

कीड़े मकोड़ों से बचाव
पौधों को कीड़े-मकौड़ों से बचाने के लिए एक किलो नीम की पत्तियों को दो लीटर पानी में उबाल लें। जब पानी आधा रह जाए तो उसे छानकर ठंडा होने के बाद पौधों पर छिड़क दें। इसके अलावा खीरा और धनिया जैसे पौधों के साथ लहसुन को उगाने से भी कीड़े दूर रहते हैं।

बनाएं ऑर्गेनिक खाद

'किचन गार्डन' के आपके पौधों को पानी के अलावा ऑर्गेनिक खाद, पशुओं से मिलने वाली खाद और हमारे किचन में बची सब्जियों के छिलकों की जरूरत पड़ती है। चाय की पत्ती भी एक बेहतरीन खाद का काम करती है। मिट्टी की उर्वरकता बढ़ाने के लिए अपने किचन गार्डन की मिट्टी में केंचुए मिला देना भी चमत्कारी उपाय है। कीड़े मिट्टी में डाले गए फल या सब्जियों के छिलकों और चाय पत्ती आदि को खाद में बदल देते हैं। प्राकृतिक खाद का प्रभाव पौधों पर बहुत अच्छा पड़ता है। इन सबका उपयोग कर आप अपनी सब्जियों को हानिकारक उर्वरकों से बचा सकती हैं। इससे सब्जियों के विटामिन व पोषक तत्व प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रहते हैं।

 

बोने का समय
मटर, गाजर, मूली, शलजम, फूल गोभी, पत्ता गोभी पालक, हरी प्याज जैसी सर्दियों की सब्जियों को बोने की प्रक्रिया सितम्बर-अक्टूबर महीने से ही शुरू कर दी जाती है लेकिन नवंबर दिसंबर में इनकी पौध बोने से भी काम चल सकता है।

 

'किचन गार्डन' के हथियार
आप अपने 'किचन' गार्डन की स्वयं मल्लिका हैं। जो आपको अच्छा लगे और जो आपको खुशियां दे, वे काम आप अपने 'किचन गार्डन' में कर सकती हैं। आपकी सल्तनत में आपके हथियार होंगे पॉली ग्लव्स, खुरपी और बागवानी में उपयोग की जाने वाली कैंची। आप कुछ ही दिनों में पाएंगी कि 'किचन गार्डन' से आपके घर का माहौल भी बदल गया है। वह इसलिए कि इसकी शुरुआत आप भले ही अकेले करें, लेकिन धीरे-धीरे आपका पूरा परिवार इससे जुड़ता चला जाएगा। बताने की जरूरत नहीं है कि आपकी थोड़ी सी मेहनत और प्यार से आपका किचन गार्डन खिल उठेगा और उसका जायका आपके और आपके पूरे परिवार को भी खिला देगा। किचन गार्डन सिर्फ आपका स्वास्थ्य ही ठीक नहीं रखता है, बल्कि आपको तनाव और चिंताओं से भी मुक्ति दिलाता है। फिर, हम शहरों में रहने वालों को अगर घर में उगाई सब्जियों की मिठास का स्वाद मिल जाए तो थोड़ी सी मेहनत में बुराई ही क्या है।

 

ध्यान रखें

यदि आप अपना किचन गार्डन लकड़ी के बॉक्स या गमलों में बना रही हैं तो पानी की निकासी के लिए ऐसे कन्टेनर को इस्तेमाल करें जिसमें नीचे छेद हो। थोड़े छोटे-छोटे पत्थर उसके बेस में डाल दें। ये पत्थर पानी सोखने का काम करते हैं। गमलों के नीचे ट्रे भी रखी जा सकती है। हफ्ते में एक दिन पौधों के आसपास सफाई करें और कटाई-छंटाई करें। कुछ सब्जियां जो गमलों में आसानी से उगाई जा सकती हैं आप उनको इस तरह लगा सकती हैं-

 

मिर्च 

दो-तीन पकी हुई हरी मिर्च लें। उनको बीच से चीरा लगाकर उनके बीज गमले में छिड़क दें और उसके ऊपर थोड़ी मिट्टी डालकर पानी दें। ध्यान रहे कि बीज मिट्टी में बहुत गहरे न डाले जाएं। इन्हें अंकुरित होने में तकरीबन एक हफ्ते का समय लगेगा।

टमाटर

टमाटर की जड़ें थोड़ी गहरी जाती हैं इसलिए आपको बड़े पॉट की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए आप बस एक टमाटर को चार टुकड़ों में काटकर मिट्टी में आधा इंच नीचे दबा दें। तीन-चार हफ्ते में ये अंकुरित होने लगेगा। बड़ा होने के बाद टमाटर के पौधे को सहारे की जरूरत पड़ती है इसलिए पतली लकड़ी की डंडियों का इंतजाम कर लें।

 

धनिया

इसको सबसे आसानी से उगाया जा सकता है। किसी भी कन्टेनर या गमले को मिट्टी से भरकर धनिये के बीजों को रगड़कर मिट्टी पर छिड़क दें। इसके बाद मिट्टी की एक परत बिछा दें, पानी दें और भूल जाएं। एक महीने के अंदर धनिया की पत्तियां आपके किचन गार्डन को गुलजार कर रही होंगी।

पुदीना

 धनिये की तरह ही पुदीना को भी छोटे कन्टेनर की जरूरत होती है। इसकी डंडियों के जरिये आप इसे बड़ी आसानी से उगा सकती हैं।

 

बीन्स

 इसके बीजों को मिट्टी में आपस में कुछ इंच की दूरी पर बोएं। इसका पौधा बेल के रूप में बढ़ता है। इसको आप अपनी बालकनी की ग्रिल या खंभों के सहारे बांध सकती हैं। ध्यान रहे कि इन सभी पौधों में 25-30 ग्राम ऑर्गेनिक खाद हर महीने डालती रहें। 



 

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