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गर्मी का अहसास विंटर स्पेशल मसालों से पाएं

गीता सिंह

23rd June 2015

मसाले केवल हमारे खाने का स्वाद बढ़ाने के काम नहीं आते हैं बल्कि ये हमारे स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए काफी लाभकारी सिद्ध होते हैं।खासकर सर्दियों के मौसम में।

गर्मी का अहसास विंटर स्पेशल मसालों से पाएं

गर्मी का अहसास विंटर स्पेशल मसालों से पाएं

सर्दियों के आते ही पारा काफी नीचे आ जाता है और हम भारी-भरकम स्वेटर लादने, कंबलों में दुबकने और आग सेंकने को बाध्य हो जाते हैं। हाड़ हिला देने वाली ठंड से हमें त्वचा में रूखापन, पैरों में ठंडक, गले में सुरसुरी आदि का सामना करना पड़ता है। तब हमें शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए गर्मी देने वाले मसालों की आवश्यकता होती है। भारतीय व्यंजनों में मसालों के अनेक उपयोग हैं। वे न केवल हमारे भोजन को स्वादिष्ट और रुचिकर बनाते हैं, बल्कि शरीर में गर्मी भी उत्पन्न करते हैं। मसाले हमारे रक्त संचार को तेज कर हमारे शरीर की अंदरूनी ऊष्मा बढ़ाते हैं और हमें गर्माहट का अहसास प्रदान करते हैं। श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ सुश्री प्रिया शर्मा हमें विस्तार से बता रही हैं कि आखिर कौन-कौन से मसालों का सर्दियों में इस्तेमाल करने से हमारी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और हमारे शरीर को गर्माहट भी मिलती है।

 

अदरक
सूजन-रोधी गुणों से भरपूर अदरक फ्लू (सर्दी बुखार),माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) तथा अन्य व्याधियों को दूर करने में सहायक है। अदरक हमारे प्रतिरोधी तंत्र को मजबूत करने, एलर्जी से लडऩे, कॉलेस्ट्रल कम करने, पाचन-शक्ति बढ़ाने, मतली और सुबह की सुस्ती दूर करने तथा शरीर को ऊष्मा प्रदान करने का काम करता है। इसके सेवन से जाड़े में पसीना निकलने की क्षमता बढ़ती है, जिससे शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। पसीना निकलने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, क्योंकि स्वेद-ग्रंथियों से डर्मीसाइडिन नामक जीवाणुनाशक रसायन निकलता है, जो सूक्ष्म जीवाणुओं तथा बैक्टिरिया से हमारे शरीर की रक्षा करता है। चाय या सूप में अदरक मिलाकर या विभिन्न पकवानों में इसका प्रयोग करके आप सर्दियों के अपने व्यंजनों को परिपूर्ण बना सकते हैं। पानी में अदरक का सत डालकर स्नान करना भी फायदेमंद है।

 

 

हल्दी

यह सौम्य मसाला अदरक परिवार के उष्णकटिबंधीय पौधे की जड़ से प्राप्त होता है। सुनहरे रंग के इस मसाले में विशिष्ट गुण पाये जाते हैं, जो पाचन तंत्र तथा आंतों में सूजन रोकने में सहायक हैं। सर्दी के मौसम में तापमान में परिवर्तन होने से हमारे जोड़ों में सूजन के कारण अक्सर पीड़ा होने लगती है। हल्दी से जोड़ों में सूजन पैदा करने वाले मूल तत्वों का प्रभाव समाप्त हो जाता है। इसके अतिरिक्त, एक चुटकी हल्दी के रोजाना सेवन से शरीर में ऊष्मा बनी रहती है और प्रतिरोधी तंत्र मजबूत होता है। फलस्वरूप रक्त संचार में सुधार होता है। इस सौम्य तथा कसैले मसाले को अपने सालन में मिलाएं या मांसाहारी आहार को पकाने के लिए आजमाएं। शरीर में ऊष्मा तथा रोगरोधी क्षमता के लिए इसे रात में दूध के साथ भी लिया जा सकता है।

 

 

लौंग
धरती से उपजने वाली उपलब्ध समस्त वनस्पतियों और मसालों में लौंग में सबसे ज्यादा ऑक्सीकरण-रोधी क्षमता होती है। आयु बढऩे और प्रदूषणों से संपर्क के कारण हमारे शरीर में मुक्त मूलक अणुओं (फ्री रैडिकल्स) का अनुपात बढ़ता जाता है, जिससे कोशिकाओं का क्षरण होता है। ये ऑक्सीकरण-रोधी तत्व कोशिकाओं की इस तरह की क्षति से रक्षा करते हैं। लौंग को अपने पर्याप्त स्वास्थ्यकर तत्वों और शानदार तीखेपन की बदौलत मीठे और चटपटे दोनों तरह के पकवानों में शामिल किया जा सकता है। कच्ची लौंग चबाने से गले की खराश मिटती है और भुनी लौंग चबाने से खांसी से राहत मिलती है। इससे शरीर के भीतर गर्मी भी पैदा होती है। इसलिए अत्यधिक ठंड वाले देशों में इसका प्रयोग खूब होता है। इसे चाय के साथ उबाल कर भी पिया जा सकता है।

 

 

 


 कालीमिर्च

कालीमिर्च को किंग ऑफ स्पाइस माना जाता है। इसमें कोई एक गुण नहीं बल्कि अनेक गुण मौजूद हैं। इसमें कैल्शियम, आयरन कास्फोरस, कैरोटिन, थायमीन रिबोफलोवीन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं। कालीमिर्च का सेवन सर्दी और कफ से राहत प्रदान करता है और शरीर को अंदर से गर्म रखने में भी सहायक होता है। इसे केवल सब्जियां पकाने में ही नहीं बल्कि सलाद-चाट व चाय इत्यादि में भी डालकर खाया जा सकता है।

इलायची
इलायची को हम मसालों की रानी कह सकते हैं। इसमें भी अदरक के समान ही ऊष्मा और स्फूर्तिदायक गुण होते हैं। हरी इलायची परंपरागत रूप से जाड़े में उपयोगी रहती है क्योंकि यह बंद श्वास नली को खोलती है और छाती में भारी ठंड लगने से जमा कफ साफ करती है। इलायची से जुड़े दादी-नानी के अनेक नुस्खे हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत प्रभावकारी नुस्खा है रात में सोने के पहले एक कप पानी और एक बड़ा चम्मच शहद के साथ दो-तीन इलायची उबाल कर पीना। इससे बंद नाक और छाती की जकडऩ खोलने में मदद मिलती है।

 

जायफल
जायफल में वायरल-रोधी गुण पाये जाते हैं। सर्दियों के मौसम में एक चुटकी जायफल के सेवन से छाती की जकडऩ दूर होती है। जाड़े की ठिठुरन दूर करने के लिए जायफल मिश्रित कॉफी या फुलकों का सेवन काफी फायदेमंद होता है।

 


लहसुन
लहसुन के बारे में अभी तक हम यही जानते रहे हैं कि यह कॉलेस्ट्राल का स्तर कम करता है। लेकिन कुछ लोगों को यह भी पता होगा कि लहसुन विशेषकर जाड़े के मौसम में शरीर को गर्म रखने में भी सहायक है। यह हमारे प्रतिरोधी तंत्र के लिए एक अतुलनीय बैक्टीरया तथा वायरल रोधी बूटी है। जाड़े में वैसे भी खांसी तथा गला संबंधी व्याधियां बढ़ जाती हैं। अपने बैक्टीरिया रोधी गुणों की बदौलत लहसुन इन व्याधियों को दूर करने में सहायक है। लहसुन धमनियों को मुलायम बनाता है, जिससे रक्त संचार में सुधार होता है और धमनियों में थक्के नहीं बनते। 2-3 लहसुन रोजाना यूं ही चबाकर खाएं या सूप अथवा पके भोजन में मिलाकर खाएं और स्वस्थ रहें।

 

 

दालचीनी
दालचीनी वृक्ष की छाल होती है। इसमें सिनामल्डीहाइड नामक रसायन पाया जाता है, जो रक्त प्रवाह को नियमित कर शरीर में सूजन कम करता है। इस तरह यह ठंड से बचाव का एक उत्तम खाद्य पदार्थ है। इससे शरीर गर्म रहता है और तापमान में अत्यधिक गिरावट होने पर भी उचित रक्तचाप बना रहता है। दालचीनी में शरीर के लिए आवश्यक सूक्ष्मजीवरोधी तेल पाया जाता है जिससे बैक्टीरिया की वृद्धि में कमी आती है और हमारे रोग प्रतिरोधी तंत्र को प्रभावकारी ढंग से संक्रमण का मुकाबला करने में आसानी होती है। मीठी सुगंध और स्वाद के कारण चुटकी भर दालचीनी से भी पेय पदार्थों और मिष्टान्न का स्वाद काफी बढ़ जाता है। खासकर सर्दियों में, दालचीनी और इलायची मिश्रित चाय के सेवन से काफी फायदा होता है।