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क्यों मनाया जाता है गणेश चतुर्थी का पर्व

संविदा मिश्रा

31st August 2019

हर साल बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला ये पर्व फिर से दस्तक देने वाला है। इस बार गणेश चतुर्थी 2 सितंबर को मनाई जा रही है। गणेश चतुर्थी की महाराष्ट्र में अलग ही धूम होती है। इस त्यौहार में हिन्दुओं के सर्वप्रिय देवता सही गणेश का पूजन किया जाता है। इस दिन को उनके जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि गणेश जी शंकर और पार्वती के बेटे हैं। जिन्हें 108 नामों से जाना जाता है। सभी देवताओं में सबसे पहले गणेश की ही पूजा की जाती है। ऐसे में ये जानना भी ज़रूरी है कि आखिर क्यों मनाया जाता है गणेश चतुर्थी का त्यौहार -

क्यों मनाया जाता है गणेश चतुर्थी का पर्व

हर साल बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला ये पर्व फिर से दस्तक देने वाला है।  इस बार गणेश चतुर्थी 2  सितंबर को मनाई जा रही है।  गणेश चतुर्थी की महाराष्ट्र में अलग ही धूम होती है।  इस त्यौहार में हिन्दुओं के सर्वप्रिय देवता सही गणेश का पूजन किया जाता है।  इस दिन को उनके जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है।  ऐसी मान्यता है कि गणेश जी शंकर और पार्वती के बेटे हैं। जिन्हें 108 नामों से जाना जाता है। सभी देवताओं में सबसे पहले गणेश की ही पूजा की जाती है। ऐसे में ये जानना भी ज़रूरी है कि आखिर क्यों मनाया जाता है गणेश चतुर्थी का त्यौहार -

गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था।  हिंदू कैलेंडर के अनुसार, भगवान गणेश को समर्पित यह त्यौहार भाद्रपद माह में अमावस्या (शुक्ल पक्ष चतुर्थी) के आगमन के बाद चौथे दिन शुरू होता है। आमतौर पर यह तिथि अगस्त या सितंबर में पड़ती  है। यह अनंत चतुर्दशी तिथि को समाप्त होता है। मान्यता के अनुसार श्री गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था। इसीलिए हर साल इस दिन गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनाई जाती है। यह भी कहा जाता है किभगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल के दौरान हुआ था इसीलिए मध्याह्न के समय को गणेश पूजा के लिये ज्यादा उपयुक्त माना जाता है।   भगवान गणेश के जन्म दिन के उत्सव को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन, भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है।हालांकि यह त्यौहार देश भर में आयोजित किया जाता है, लेकिन इसकी सबसे ज्यादा खुशियां पश्चिमी भारतीय राज्यों महाराष्ट्र और गोवा में मनाई जाती हैं। 

हिंदू धर्म की मान्यताएं 

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार  कहते हैं कि देवी पार्वती ने अपने शरीर से उतारी गई मैल से श्री गणेश को बनाया था। जब वो नहाने गई तो गणेश को अपनी रक्षा के लिए बाहर बिठा दिया। शिव भगवान जो पार्वती के पति हैं जब घर लौटे तो अपने पिता से अंजान श्री गणेश ने उन्हें रोकने की कोशिश की जिससे शिव जी  को क्रोध आ गया और उन्होने गणेश का सिर काट दिया।

जब देवी पार्वती को इसके  बारे में पता चला तो वो शिव जी से रूष्ट हो गईं  जिस पर शिव जी ने उनसे गणेश का जीवन वापस लाने का वादा किया और गणेश जी के सर की जगह हाथी का सर लगा  दिया। इस तरह फिर से गणेश का जीवनदान मिला। लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि देवताओं के अनुरोध करने पर शिव और पार्वती ने गणेश को बनाया था जिससे वो राक्षसों का वध कर सकें और यही कारण है कि उन्हें विघ्नहर्ता  भी कहा जाता है।

त्यौहार मानाने का चलन 

ऐसा  माना जाता है कि यह त्यौहार उस समय से पहले का है जब चालुक्य, सातवाहन और राष्ट्रकूट राजवंशों ने 271 ईसा पूर्व और 1190 ईस्वी के बीच शासन किया था। हालांकि, इसका पहला ऐतिहासिक रिकॉर्ड पुणे में 1600 के दशक से उपलब्ध है, जब मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज ने गणेश चतुर्थी मनाई थी क्योंकि भगवान गणेश को उनके कुलदेवता (परिवार देवता) माना जाता था। संस्कृत में, कुला का अर्थ है कबीले और देवता का अर्थ देवता है। समय के साथ, त्यौहार ने अपना महत्त्व  खो दिया लेकिन 19 वीं शताब्दी में भारतीय स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक द्वारा इसे एक भव्य सार्वजनिक कार्यक्रम में एक निजी उत्सव से पुनर्जीवित किया गया और लोगों को जीवन के सभी क्षेत्रों से एकजुट किया।

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