GREHLAKSHMI

FREE - On Google Play
OPEN

देखकर नहीं चल सकते

प्रतिभा अग्निहोत्री, उज्जैन (म.प्र.)

17th September 2015

हाय मैं शर्म से लाल हुई

 
एक दिन मैं बाजार से अंडे लेकर अपनी ही मस्ती में चली जा रही थी। तभी मेरे पास से निकलते हुए एक लड़के का मुझे धक्का लगा और मेरे हाथ से अंडे की थैली छूटकर नीचे गिर गई और सारे अंडे टूट गए। मैं उस लड़के पर जोर से चिल्लाई, 'भगवान ने दो-दो आंखें दी है, फिर भी देखकर नहीं चल सकते। तुम्हारे कारण मेरे सारे अंडे टूट गए।' तभी मैंने देखा मेरे आसपास खड़े लोग मेरी ओर देखकर हंस रहे हैं। जब मुझे अपनी कही बात समझ में आई तो मैंने वहां से चले जाने में ही अपनी भलाई समझी। 

पोल

सबसे अछि दाल कौन सी है

गृहलक्ष्मी गपशप

जानिए बॉलीवु...

जानिए बॉलीवुड की...

चलिए जानते हैं कुछ एक्ट्रेसेस के बारे में जिन्होंने...

चाणक्य के अन...

चाणक्य के अनुसार...

सदियों से ये सोच चली आ रही है महिलाएं शारीरिक और मानसिक...

संपादक की पसंद

रामायण: घर-घ...

रामायण: घर-घर में...

रामानंद सागर की 'रामायण' लॉकडाउन में जब दोबारा प्रसारित...

खाद्य पदार्थ...

खाद्य पदार्थ जो...

आजकल आप थके-थके रहते हैं। रोमांस करने की आपकी इच्छा...

सदस्यता लें

Magazine-Subscription