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शिशु की बनाएं सही दिनचर्या

ममता अग्रवाल

19th September 2015

नन्हे शिशु की सही देखभाल के साथ खुद अपने स्वास्थ्य और घर की जिम्मेदारियां भी उसे निभानी होती हैं।

शिशु की बनाएं सही दिनचर्या

माँ बने तब क्या करे

जानें बच्चे की जरूरतें
शुरुआती महीनों में नन्हे शिशु के सोने, जागने या भूख का कोई नियमित समय नहीं होता। हर मिनट आपकी जरूरत महसूस करने वाला आपका नन्हा शिशु दिन भर में लगभग 16 घंटे या उससे भी ज्यादा सोता है। लेकिन फिर भी आपको वह पूरा दिन उंगलियों पर नचाए रखता है। आपके बच्चे के लिए दिन और रात यानी उसके सोने-जागने का समय आपसे विपरीत हो सकता है। वह रात के समय ज्यादा देर जगा हुआ और सक्रिय हो सकता है और दिन के समय उसे नींद आ सकती है। हर थोड़ी देर में या कभी भी उसे भूख लग सकती है,आपको नींद की झपकी आते ही वह उठ कर बैठ सकता है या बिस्तर गीला कर सकता है। ऐसे में आपकी जिंदगी बेहद अव्यवस्थित हो जाती है। थोड़ा वक्त मिला तो नींद की छोटी सी झपकी ले ली, जब वक्त मिला कुछ खा लिया और जब वक्त मिला नहा लिए। लेकिन जब आप अपने बच्चे की जरूरतों को समझ और जान जाती है, आपकी जिंदगी बेहद आसान हो जाती है। बच्चे के साथ अपनी दिनचर्या बना पाना आपको काफी सूकून और आराम देगा और इसे समझ कर आप अपने कमजोर शरीर को भी आराम दे पाएंगी। रात के लिए अपने शिशु का रुटीन सेट करने की कोशिश करें। इसके लिए रात के समय आवाज और रोशनी को बिल्कुल कम रखें। कुछ ही समय और प्रयास के बाद आप उसके और अपने रूटीन में सहज तालमेल कायम करने में कामयाब हो जाएंगी।

भावनात्मक जुड़ाव
नवजात शिशुओं की शुरुआती देखभाल में माँ से उसकी नजदीकी और शारीरिक जुड़ाव बेहद अहम है। बच्चे स्पर्श, गंध और आवाज से आपसे जुड़ाव महसूस करते हैं। इसलिए डॉक्टर भी बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसे मां की छाती से
चिपकाने की सलाह देते हैं। नन्हे शिशु को मधुर आवाजें भी बेहद भाती हैं। भले ही आपको लगे कि अभी वह आपकी बातें समझने लायक नहीं है, लेकिन उसे आपकी मीठी बातचीत, गुनगुनाना, लोरी सुनना बेहद भाता है। इससे वह आपसे भावनात्मक तौर पर भी जुड़ता है। जब भी बच्चा रोने या झुंझलाने लगे, उसे बेबी रैटल टॉयज, अन्य संगीतमय खिलौने सुनाकर, नर्सरी राइम या लोरी गाकर उसे झुलाएं । इन मधुर धुनों और आपके प्यार भरे स्पर्श के जादू से वह थोड़ी ही देर में चुप हो जाएगा। लेकिन कुछ शिशु रोशनी, आवाज और स्पर्श के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं और जल्दी ही रोने लगते हैं या कोई उनसे बातचीत करे तो मुंह फेर लेते हैं। अगर आपके शिशु के साथ भी ऐसा है, तो आवाज और रोशनी का स्तर बेहद कम रखें।

समझें इशारे
बच्चे अपनी जरूरतों के मुताबिक आपको कई इशारे देते हैं। एक माँ यानी अपने शिशु की सबसे करीबी होने के नाते अपने बच्चे के इशारों को आपसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता। आपको धीरे-धीरे इन्हें जानना और समझना होगा ताकि आप बच्चे की भूख, नींद या किसी अन्य जरूरत को समझ पाएं और परेशान होकर बेकाबू होने से पहले ही उसे संभाल लें। बच्चे के रोने का कारण हर बार केवल भूख ही हो, यह जरूरी नहीं। इसलिए रोते ही उसे फीड कराने की जगह पहले उसका कारण समझने की कोशिश करें। शिशु रोग  विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार बताते हैं कि सामान्य स्थितियों में शिशु इन कारणों से रोता है- यदि वह भूखा है, प्यासा है, नींद के कारण या डायपर चेंज  की जरूरतों के कारण। इन कारणों के अलावा उसका रोना किसी अन्य समस्या का कारण हो सकता है, जैसे पेट या कान में दर्द, सर्दी-जुकाम के कारण नाक बंद होने पर सांस लेने में परेशानी आदि।