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कंप्यूटर नैविगेशन से कराएं घुटना प्रत्यारोपण

ऋचा कुलश्रेष्ठ

21st September 2015

ज्वाइंट को सही तरीके से सेट करने के लिए कंप्यूटर नैविगेशन का इस्तेमाल करते हुए कृत्रिम जोड़ का बेहतर एलाइनमेंट किया जाता है जिसमें मानव त्रुटि की आशंका कम हो जाती है।

 दशक पहले तक घुटना प्रत्यारोपण को एक जटिल प्रक्रिया माना जाता था जिसकी रिकवरी में खासा वक्त लगता था और रिकवरी का परिणाम भी अपर्याप्त मिलता था। हालांकि हाल के वर्षों में बेहतर तकनीक और एडवांस्ड पद्धतियों से नतीजों में आश्चर्यजनक सुधार आया है, प्रत्यारोपण की प्रक्रिया मरीज के ज्यादा अनुकूल और ज्यादा टिकाऊ हो पाई है और इसमें सामान्य से ज्यादा अच्छे परिणाम मिलने लगे हैं।


भारत में हर वर्षा हजारों मरीज घुटने या कूल्हे का प्रत्यारोपण कराते हैं और नई जिंदगी पाते हैं, जिनमें सिर्फ 70 की आयु वाले बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि 50 की आयु के ऐसे मरीज भी हैं जो अपनी जिंदगी को लंबे समय तक सक्रिय बनाए रखना चाहते हैं। कुछ मामलों में कम उम्र के मरीजों को भी चोट, कम उम्र में ही अर्थराइटिस या पैदाइशी हड्डी विकार के कारण घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी की जरूरत पड़ जाती है।


कृत्रिम प्रत्यारोपण की गुणवत्ता में सुधार आने, विभिन्न शारीरिक संरचनाओं, मसलन पुरुषों, महिलाओं की जरूरतें पूरी करने के लिए अलग-अलग तरह के इंप्लांट आ गए हैं। साथ ही टोटल नी रिप्लेसमेंट के नतीजे और मजबूती में सुधार लाने के लिए बेहतर सॢजकल पद्धतियां भी मददगार हैं।


ज्वाइंट रिप्लेसमेंट के क्षेत्र में यह ऐसी तकनीक है जिसमें कंप्यूटराइज्ड इमेज की मदद से सर्जरी की जाती है। ज्वाइंट को सही तरीके से सेट करने के लिए कंप्यूटर नैविगेशन का इस्तेमाल करते हुए कृत्रिम जोड़ का बेहतर एलाइनमेंट किया जाता है जिसमें मानव त्रुटि की आशंका कम हो जाती है। इसमें ऑपरेशन के दौरान कंप्यूटर नैविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है ताकि आपका घुटना उपयुक्त तरीके से एलाइन हो सके। इससे सर्जन को सर्जरी के प्रत्येक चरण की निगरानी करने में मदद मिलती है और त्रुटियों की पहचान कर उन्हें दुरुस्त किया जा सकता है। नए ज्वाइंट को घुटनों के साथ सही तालमेल बिठाते हुए प्रत्यारोपित करना जरूरी है। अच्छी तरह एलाइन किए गए नी रिप्लसेमंट लंबे समय तक चलते हैं।


कंप्यूटर नैविगेशन की मदद से 100 प्रतिशत परिशुद्धता के साथ बोन कटिंग परिणाम मिलता है। इसके अलावा अतिरिक्त रक्तस्राव नहीं होने के साथ ही जल्दी रिकवरी, अस्पताल से जल्दी छुट्टी मिलने और घुटने की बेहतर कार्यप्रणाली जैसे फायदे मिलते हैं। हालांकि यह टेक्नोलॉजी अभी भारत में सामान्य प्रक्रिया नहीं बन पाई है लेकिन इसमें व्यापक प्रतिबद्धता देखने को मिल रही है।

नी रिप्लेसमेंट की जरूरत
घुटना टांग की ऊपरी हड्डी और निचली हड्डियों के बीच एक जोड़ की तरह काम करता है। हड्डियां, जोड़ और उनके किनारे कार्टिलेज से ढके होते हैं जिससे इसकी गतिविधि सुचारु बनी रहती है और किनारियों के बीच घर्षण से बचाव होता है। वर्षों के घिसाव से इन हड्डियों के जोड़ वाली सतह भी घिस सकती है। इसकी वजह उम्र संबंधी घिसाव, घुटने में ऑस्टियोअर्थराइटिस की गंभीर समस्या, इनफ्लेमेटरी अर्थराइटिस, रूमेटोइड अर्थराइटिस और अन्य सामान्य अर्थराइटिस समस्याएं हो सकती हैं। इसमें तीव्र दर्द होता है और सामान्य जिंदगी जीने में बड़ी बाधा बन सकती है। ऐसी स्थिति में सीढिय़ां चढऩा और लंबी दूरी तक चलना मुश्किल हो जाता है। यहां तक कि पैर दो ज्वाइंट को सही तरीके से सेट करने के लिए कंप्यूटर नैविगेशन का इस्तेमाल करते हुए कृत्रिम जोड़ का बेहतर एलाइनमेंट किया जाता है जिसमें मानव त्रुटि की आशंका कम हो जाती है। मोडऩा भी असंभव हो जाता है।

ऐसे मामलों में घुटना प्रत्यारोपण का लक्ष्य जीवन को आसान बनाना, दर्द से निजात दिलाना, जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना और मरीज को आसानी से रोजमर्रा के काम करने की सुविधा देना है। अमेरिका के सर्जन हर साल दस लाख से अधिक कूल्हा एवं घुटना प्रत्यारोपण करते हैं। अध्ययन बताते हैं कि ज्वाइंट रिप्लेसमेंट दर्द से आश्चर्यजनक निजात दिलाता है और इससे व्यक्ति की सक्रियता 90 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

 

कंप्यूटर-सहायक टेक्नोलॉजी
जिन लोगों ने अपने टोटल नी रिप्लेसमेंट (टीकेए) के लिए कंप्यूटर की सहायता से सर्जरी कराई है, उन्हें इसके कई फायदे मिले हैं जिनमें रिप्लेसमेंट के जीवनकाल में वृद्धि, दोबारा सर्जरी कराने की आशंका में कमी, अधिकतम स्थायित्व और गतिशीलता में वृद्धि तथा ज्वाइंट रिप्लेसमेंट की संपूर्ण कार्यक्षमता में सुधार भी शामिल हैं। हालिया अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि जिन लोगों ने कंप्यूटर नैविगेशन की मदद से टीकेए कराया है, उन्हें दोबारा सर्जरी कराने की जरूरत में आश्चर्यजनक कमी आई है। शोधकर्ताओं का मानना है कि सर्जरी के दौरान प्रत्यारोपण ढीले तरीके से होने के कारण टीकेए दोबारा कराना आम प्रक्रिया होती है। कंप्यूटर की सहायता से सर्जरी के लिए बहुत कम चीर-फाड़ वाली सर्जिकल तकनीक अपनाई जाती है जिसका मतलब है कम रक्तस्राव होना तथा कई अन्य संभावित फायदे मिलना।

कंप्यूटर नैविगेशन टेक्नोलॉजी के फायदे-
-इससे आपके सर्जन को आपके घुटने की संरचना के बारे में समग्र डाटा मिलता है जो आपके ज्वाइंट रिप्लेसमेंट को सही जगह पर निर्धारित करने में मदद करता है।
-आपके घुटने के कंप्यूटर संचालित मॉडल से सर्जरी करने की योजना बनाने में मदद मिलती है।
-सर्जन को फीडबैक मिलता है और वे सर्जरी के दौरान गलत एलाइनमेंट को दुरुस्त करने में सक्षम हो पाते हैं।
- ज्वाइंट की संरचना को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है जो न्यूनतम चीर-फाड़ वाली तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए महत्वपूर्ण होता है।
- सर्जरी के दौरान रक्तस्राव कम होता है जिससे खून चढ़ाने की जरूरत कम हो जाती है और तीव्र रिकवरी सुनिश्चित होती है। अस्पताल में रहने की अवधि कम हो जाती है। आपको 4-5 हफ्तों के अंदर छड़ी से छुटकारा मिल सकता है। कम जोखिमपूर्ण और ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य लाभ में कम समय लगता है। कंप्यूटर नैविगेशन जोड़ों का जीवनकाल बढ़ाता है और दोबारा सर्जरी की संभावना कम करता है।

कब कराएं नी रिप्लेसमेंट?


दर्द और जकडऩ की स्थिति : जब घुटने में भयंकर दर्द हो और आपके रोजमर्रा की गतिविधियां सीमित हो जाएं। जब दर्द के कारण चलना-फिरना, सीढिय़ां चढऩा, कुर्सी से उठना या अन्य सामान्य गतिविधियां जारी रखना मुहाल हो जाए। दिन या रात को आराम करते वक्त घुटने में दर्द हो, इसे मोडऩे में तकलीफ हो और सीधा करने में भी दिक्कत हो।


गंभीर जलन और सूजन : घुटने में गंभीर जलन और सूजन हो जाए जो दवाइयों और आराम करने से भी ठीक न हो सके।

खराब दिनचर्या की स्थिति : सिर्फ दर्द की स्थिति में ही नहीं बल्कि इस दर्द से जब आपका रोजमर्रा का जीवन भी प्रभावित होने लगे तो रिप्लेसमेंट करा लें। क्या आपके जोड़ों की समस्या इच्छानुसार काम करने से आपको रोकती है? क्या यह समस्या आपका मूड बिगाड़ देती है?

हड्डी क्षतिग्रस्त हो जाए : एक्स-रे और अन्य इमेजिंग की मदद से ऑस्टियोअर्थराइटिस या अन्य बीमारियों के कारण जोड़ों को होने वाली गंभीर क्षति का पता लगाया जा सकता है।

जब नॉन-सर्जिकल उपचार विफल हो जाएं : दवाइयां, इंजेक्शन, वॉकर जैसे डिवाइस और अन्य उपचार से जब पर्याप्त लाभ न मिले तो रिप्लेसमेंट करा लेना चाहिए।

पैर टेढ़े हों : जब आपका घुटना बुरी तरह सूज जाए या आपके पैर टेढ़े हों, तब भी आपको रिप्लेसमेंट कराने की जरूरत है। टोटल नी रिप्लेसमेट अन्य उपचार अपनाए जाने के बाद ही कराया जाता है। इसमें ऑस्टियोअर्थराइटिस के कारण क्षतिग्रस्त होने वाले जोड़ों को पूरी तरह निकाल दिया जाता है और इसकी जगह नया जोड़ लगाया जाता है। यह ऑपरेशन सामान्य या स्पाइनल ऑपरेशन के तहत किया जाता है।एनेस्थेसिस्ट आपके ऑपरेशन से पहले आप पर आजमाए जाने वाले विकल्पों पर विचार करते हैं। 


(इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर के ज्वाइंट रिप्लेसमेंट एंड आथ्र्रोस्कोपी सर्जन डॉ. विवेक महाजन से बातचीत पर आधारित)