GREHLAKSHMI

FREE - On Google Play
OPEN

सुंदर के साथ स्वच्छ भी हो ड्राइंगरूम

शिखा जैन

7th October 2015

ड्राइंगरूम को आप बेहद चाव से सजाती हैं। आपका करीने से सजा ड्राइंगरूम साफ-सुथरा रहे इसके लिए जरूरी है कि सजावट के साथ इसकी सफाई पर भी पूरा ध्यान दिया जाए।

 ड्राइंगरूम की खूबसूरती उसके फर्नीचर, सजी हुई आकर्षक वस्तुओं व शोपीसेज से होती है। कुछ घरों के ड्राइंगरूम में फर्नीचर तो बहुत अच्छा होता है लेकिन उस पर चढ़ी धूल की परत उसे बेकार कर देती है। आपका इतना महंगा फर्नीचर बेकार तो हो ही जाता है आने वाला मेहमान भी आपके ड्राइंगरूम के सामान पर कम और वहां की गंदगी पर ज्यादा ध्यान देता है। साथ ही अगर स्वच्छता का अभाव हो तो वहां मौजूद कीटाणु आपको बीमार भी कर सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय कंज्यूमर हाइजीन सर्वे, 2008 के अनुसार घर में किचन और बाथरूम के अलावा बेडरूम और ड्राइंगरूम में भी काफी संख्या में कीटाणु होते हैं। घर में पाए जाने वाले जीवाणुओं में सालमोनेला, कैम्पाइलोबैक्टर, ईकोली, स्टेफाइलोकोकस शामिल हैं। कवक के अंतर्गत कैंडिडा, एस्परजिलस एवं वाइरस के अंतर्गत नोरोवाइरस, रोटावाइरस, कोल्ड, फ्लू एवं मीजल्स आदि होते हैं।

इसके अतिरिक्त घर पर पाए जाने वाले बैक्टीरिया में सालमोनेला और ईकोली बैक्टीरिया आंत संबंधी रोग फैलाता है। स्टैफीलोकोकस स्किन में संक्रमण फैलाते हैं और एथलीट फुट के लिए भी यही जिम्मेदार होते हैं। रिनोवायरस साधारण जुकाम और छोटे बच्चों में डायरिया के लिए जिम्मेदार होते हैं, इसलिए अगर आप चाहते हैं कि आपका घर-परिवार जीवाणुओं और कीटाणुओं से बचा रहे और आप स्वस्थ रहें, साथ ही आपका घर भी चमके, तो नियमित रूप से अपने घर और ड्राइंगरूम की साफ-सफाई करते रहें। आइए जाने कैसे करें अपने ड्राइंगरूम की साफ-सफाई।

स्क्रैच और ब्रोकेज सही कराएं-
-फर्नीचर में पडऩे वाली लाइनों और दरारों को अनदेखा ना करें। उन्हें सही कराते रहें ताकि आपका फर्नीचर जल्दी ही पुराना ना लगने लगे।
-यदि फर्नीचर में कहीं भी स्क्रैच आ गया हो तो उसे जल्द से जल्द ठीक करा लें, नहीं तो वह दरार बढ़ती जाएगी और उसमें धूलमिट्टी भी भर जाएगी।
- सबसे पहले यह देखें कि स्क्रैच कितना बड़ा है, अगर वह सिर्फ ऊपरी सतह पर है तो उसे भरने के लिए हल्के रंग के वैक्स, वार्निश और लैकर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
-कई लोग स्क्रैच को भरने के लिए पेंट का इस्तेमाल करते हैं, ऐसा करना ठीक नहीं है, क्योंकि इससे कुछ समय के लिए स्क्रैच भर जाता है लेकिन बाद में वह और भी भद्दा हो जाता है।
- टूटे हुए फर्नीचर के टूटे हुए भाग में कोल्ड स्काटच ग्लू भर दें और 24 घंटे के लिए छोड़ दें। स्पॉट को ढकने के लिए बीजवेक्स पॉलिश कर दें।

फर्श की सफाई
-घर के फर्श पर प्राय: जूते-चप्पलों, पालतू जानवरों के पैरों आदि से सूक्ष्म जीव प्रवेश कर जाते हैं। वायु द्वारा भी प्रदूषण का खतरा रहता है। धूल कण परदों व अन्य सामान पर जमा होते हैं इसलिए डिसइन्फेक्टेंट के साथ फर्श की सफाई नियमित रूप से की जानी चाहिए।
- फर्श की सफाई करते समय यह जानकारी भी रखें कि आपके ड्राइंगरूम के फर्श पर कौन सी फ्लोरिंग की गई है। जैसे- लैमिनेट, सेरामिक टाइल, लकड़ी, रबड़ अथवा मार्बल, इसके बाद फर्श की सफाई फ्लोरिंग के अनुसार ही
करें।
-वुडन फ्लोर को कभी भी पानी से ना धोएं क्योंकि पानी से लकड़ी खराब हो जाती है।

- स्पोर्टस शूज के लेग्स और ऊंची एड़ी वाले जूते-चप्पल के साथ वुडन फ्लोर पर चलने से बचें।
-मार्बल फ्लोर को कभी भी विनेगर से साफ नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसमें एसिड होता है, जो फर्श को खराब कर देता है।
-फर्श की सफाई के लिए किसी अच्छी कंपनी के सरफेस क्लीनर का ही प्रयोग करें। मार्केट में डिसइन्फेक्टेंट सरफेस क्लीनर्स में कई प्रकार के क्लीनिंग एजेंट मौजूद होते हैं, जो कीटाणुओं का पूरी तरह से खात्मा कर देते हैं।
-इस तरह के किसी भी क्लीनर को इस्तेमाल करने के लिए एक बाल्टी पानी में
एक ढक्कन क्लीनर मिलाने से कीटाणु खत्म हो जाते हैं।

दीवारों की सफाई
- दीवारों की सफाई करते समय रबड़ के दस्ताने जरूर पहन लें।
- सफाई करते समय घर के सभी खिड़की दरवाजों को खोल दें।
-1 कप अमोनिया, आधा कप बेकिंग सोडा, 1 गैलन गरम पानी, 2 कप सिरका लेकर घोल बना लें। इसके बाद यह घोल स्पंज की सहायता से दाग वाली जगह लगाएं और साफ कर दें।

-सफाई करते समय हमेशा हल्के गुनगुने पानी का प्रयोग करें।

-अगर दीवार खुरदरी है तो उस पर स्पंज निशान छोड़ सकता है, इसलिए ऐसी दीवार की सफाई करते हुए मोजे का इस्तेमाल करें।

-दीवारो को अगर वॉलपेपर से सजाना हो तो यह देख लें कि वह वॉलपेपर हाइजीनिक है भी या नहीं।

-वॉलपेपर अकसर प्लास्टिक कोटिंग वाला आता है, जिसमें केमिकल होने का खतरा भी होता है, इसलिए ध्यान रखें कि वॉलपेपर किसी अच्छी कंपनी का ही हो।
-कोई भी साधारण वॉलपेपर लेने के बजाय ईको फ्रेंडली वॉलपेपर लेना चाहिए, ताकि इसमें बैक्टीरिया से लडऩे की क्षमता हो और वह दीवारों को कीटाणु रहित बनाए रखे।