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बच्चों की दीवाली कैसी हो

अर्पणारितेश यादव

9th October 2015

त्योहारों के मौसम में बच्चों के प्रति की गई अनदेखी त्योहार की रौनक ना छीन ले, इसके लिए जरूरी है कि इस दौरान अभिभावक उनका खास ख्याल रखें।


बच्चे हों या बड़े सभी त्योहारों के मौसम के हर रंग, हर स्वाद का भरपूर लुत्फ उठाना चाहते हैं। पर त्योहारों की भागादौड़ी में अकसर अभिभावक  बच्चों को नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार तो यह लापरवाही बेहद खतरनाक साबित हो जाती है, जिसका खामियाजा उन्हें पूरी जिंदगी भुगतना पड़ता है। ऐसे में बेहद जरूरी है कि त्योहार के समय बच्चों के प्रति ज्यादा सचेत हो जाएं वो कैसे? आइए जानें- 

समस्या नंबर 1

त्योहार के समय घर में तरह-तरह के व्यंजन बनाते हैं और बाजार से ढेरों मिठाइयां लाई जाती हैं। खासकर बच्चों को तो इस दौरान खूब सारी मिठाई और चॉकलेट खाने का मौका मिल जाता है। आजकल बाजार में मिलने वाली ज्यादातर मिठाइयों में मिलावटी खोया होता है। इस मिलावटी खोये की मिठाई खाने से बच्चों की आंतों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि बच्चों का इम्यून सिस्टम मजबूत नहीं होता, जिससे उन्हें डाइरिया, पेट दर्द, आंत में खिचाव आदि परेशानियां उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है।

उपाय
पर इस बारे में बीएल कपूर हॉस्पिटल के निदेशक, गैस्ट्रोइन्ट्रॉलजी व बरिएट्रिक सर्जरी, के डॉ. दीप गोयल कहते हैं कि त्योहारों के व्यंजन में तेल, कैलोरी, सेचुरेटिड फैट और कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा काफी अधिक होती है इसलिए बच्चों को इन व्यंजनों की बस थोड़ी सी ही मात्रा खाने के लिए देनी चाहिए। कोशिश करें कि उन्हें मिठाई की जगह चॉकलेट और ड्राईफ्रूट दें।

समस्या नंबर 2

दशहरा मेले का सभी बच्चों को बहुत क्रेज होता है। अकसर ऐसे स्थानों पर भीड़-भाड़ काफी त्योहारों के मौसम में बच्चों के प्रति की गई अनदेखी त्योहार की रौनक ना छीन ले, इसके लिए जरूरी है कि इस दौरान अभिभावक उनका खास ख्याल रखें।अधिक होती है और भीड़ के कारण बच्चे के गुम हो जाने का खतरा बना रहता है।

उपाय
ऐसे में हो सके तो इन स्थानों पर जाने से बचें लेकिन यदि फिर भी जाना हो तो बच्चे की जेब में एक कागज पर घर का पता या मोबाइल नंबर लिख कर रख दें।

समस्या नंबर 3
दीवाली आने से पहले सभी लोग अपने घरों में रंग-रोगन व पेस्टिसाइड का छिड़काव करवाते हैं। इन पेंट और रंगों में बेहद खतरनाक केमिकल होता है, जो बच्चों के लिए नुकसानदायक होता है।

उपाय
जब भी आप घर में व्हाइटवॉश करवाएं तो बच्चे को घर से बाहर ही रखें। यदि ऐसा संभव न हो तो कम से कम आप बच्चे को उस कमरे में न जाने दें, जिसमें रोगन या स्प्रे हो रहा हो। खासकर नवजात शिशु व 2 से 3 साल के बच्चे को इन रंगों के संपर्क में बिल्कुल न आने दें।

 


समस्या नंबर 4
 

दीवाली में घर की साज-सजावट का काम और अन्य वस्तुओं की खरीदारी आदि का काम जोरों से शुरू हो जाता है। लोग विभिन्न तरह से अपने घरों को सजाते हैं।

उपाय
सजावट करते वक्त इस बात का खास ख्याल रखें कि ऐसी कोई भी सजावट की चीज बच्चों की पहुंच में न रखें, जो नुकीली हो क्योंकि नुकीली चीज से बच्चों को चोट लग सकती है। इसके अलावा ऐसी कोई वस्तु न लगाएं, जिसमें जरा भी धार हो।

समस्या नंबर 5
दीवाली पर सभी लोग अपने घरों में लाइट और दीये जलाते हैं, जिसको बच्चे देखते ही छूने की कोशिश करते हैं क्योंकि छोटे बच्चों में किसी भी चमकने वाली चीज को पकडऩे की आदत होती है, जिससे दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है।

उपाय
बिजली के तार को बच्चे की पहुंच से दूर रखें। हो सके तो बच्चे को रोशनी के पास अकेले बिल्कुल न जाने दें। खासकर दीवाली के दीये जलाते वक्त छोटे बच्चों को दूरी पर ही बिठाएं।

समस्या नंबर 6
पटाखों के बगैर दीवाली अधूरी होती है और बच्चों को तो दीवाली में पटाखों का बेहद शौक होता है। अभिभावक के लाख मना करने के बावजूद भी वो इनसे दूर नहीं होते हैं।

उपाय
बच्चों को पटाखे और आतिशबाजी बिल्कुल नहीं लेने दें क्योंकि इन पटाखों से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। अगर जिद करके वे कुछ पटाखे खरीद भी लेते हैं तो जब भी वे पटाखों को जलाएं तो आप उनके आस-पास ही रहें। पटाखे जलाते वक्त बच्चों को ढीले ढाले और नायलॉन या सिंथेटिक कपड़े न पहनाएं क्योंकि ये कपड़े एक चिंगारी से भी आग पकड़ लेते हैं। एक बाल्टी में पानी भरकर नजदीक ही रख लें। 

 



अन्य उपाय
- 2 से 4 साल के बच्चे को फुलझड़ी से न खेलने दें, उन्हें फुलझड़ी की चिंगारियों से दूर ही रखें।
- यदि घर में कोई पालतू जानवर हो तो पटाखे जलाते वक्त उसे बांधकर ही रखें, क्योंकि पटाखों की आवाज व चिंगारी से पालतू कुत्ता या अन्य जानवर भड़क सकता है और बच्चों को नुक्सान पहुंचा सकता है।
- जब भी बच्चे पटाखे जलाएं तो सभी इमरजेंसी नंबरों को सेव करके या कागज पर लिखकर अपने पास ही रखें। पटाखे जलाते वक्त छोटे बच्चों के कान में रूई रख दें, क्योंकि ज्यादा तेज बम धमाकों की आवाज से बच्चों के कान का परदा फटने का डर रहता है।
-डॉ. निधि का कहना है कि छोटे बच्चों की कान की झिल्ली काफी नाजुक होती है, पटाखों की आवाज से उनकी सुनने की क्षमता पर आघात पहुंच सकता है इसलिए दीवाली की रात बच्चों के कान में रूई जरूर रखें।
-फोर्टिस हास्पिटल के डॉ. संजय धवन बताते हैं कि दीवाली के पटाखों से बच्चों की आंखों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। हर साल हमारे पास इस तरह के कई केस आते हैं।पटाखे जलाने से सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है और चिंगारी व वायु प्रदूषण के कारण आंखों में इन्फैक्शन हो जाता है। कई बार तो चिंगारी जाने की वजह से आंखों की रोशनी भी चली जाती है इसलिए पटाखे जलाते वक्त बच्चों को एंटी ग्लेयर चश्मा पहनाएं। इस प्रकार संभावित खतरे से बचा जा सकता है।