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ईको-फ्रेंडली मनाएं दीवाली

गीता सिंह

12th October 2015

प्रकाश की अंधकार पर विजय के पर्व दीवाली पर इस बार 'गो ग्रीन की राह को अपनाएं और ईको-फ्रेंडली तरीके से दीवाली सेलिब्रेट कर पर्यावरण प्रदूषण की जगह प्रेम भाईचारा फैलाएं।


दीवाली का त्योहार पास आते ही बाजारों से लेकर घर तक में हलचल शुरू हो जाती है। हर किसी के चेहरे पर दीवाली की उमंग और उत्साह देखते ही बनता है। अंधकार पर प्रकाश की विजय के इस पर्व का सभी के जीवन में सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से काफी महत्व है, तभी तो हर्षोल्लास और उमंग के संग मनाए जाने वाले इस त्योहार का हमें सालभर इंतजार रहता है। दीवाली आने से महीने भर पहले ही इस त्योहार के लिये तैयारियां शुरू हो जाती हैं। घर में पेंट करवाने, नये पर्दे लगाने, घर की साफ-सफाई और सजावट का काम जोरों-शोरों से किया जाने लगता है। यही नहीं दीवाली पर मिठाइयां, नए कपड़ों की खरीददारी, दोस्तों-रिश्तेदारों को देने के लियेगिफ्ट्स खरीदने के साथ-साथ आतिशबाजी करने के लिये जमकर पटाखों की खरीददारी की जाती हैं। दीवाली के इस त्योहार को धूम-धाम से मनाने व धन और धान्य की देवी लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के नाम पर हजारों रुपये फूंक दिए जाते हैं। 

जरा सोचिये क्या बेइंतिहा प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों को जलाना, एक दिन की सजावट के लिये बेकार की चीजों को खरीदना, बाजार की मिलावटी मिठाइयों को खरीद कर खाना व बेकार की चीजों की खरीददारी करना ही दीवाली सेलिब्रेट करना है। क्या इन सबके बिना दीपोत्सव व भाईचारे का यह त्योहार नहीं मनाया जा सकता है? बिलकुल मनाया जा सकता है। बस इसकेलिये जरूरत है कुछ समझदारी दिखाने की। तो इस बार हमारे द्वारा बताए गए बातों को अपनाएं और अपनों के संग मिलकर मनाएं ईको-फ्रेंडली दीवाली। वो कैसे आईये जाने -

मिट्टी के दीये

जलाएं दीवाली के पर्व को दीपोत्सव भी कहते हैं।'तमसो मा ज्योतिर्गमय अर्थात अंधेरे से ज्योति अथवा प्रकाश की ओर जाइए। लेकिन रोशनी के इस पर्व को मनाने के लिये यह कहीं नहीं लिखा है कि आप बिजली के बल्बों की लडिय़ां और तरह-तरह की रंगीन लाइट्स लगाकर बिजली की बर्बादी करें। इस बार दीवाली पर घर-बाहर रोशनी करने के लिये पारंपरिक तरीके अपनाते हुए मिट्टी के दीये जलाएं। ऐसा करने से दो फायदे होंगे एक तो बिजली बर्बाद नहीं होगी और दूसरा दीयों की रोशनी में आपका घर बेहद खूबसूरत भी लगेगा।

 बहुत ही कम तेल में जलने वाले यह दीये चार से पांच घंटों तक बिना बुझे आपके घर को रोशनी से जगमगाए रखेंगे। मिट्टी के दीये जलाकर आप अपनी परंपरा को ही जिंदा नहीं रखेंगे बल्कि लक्ष्मी को खुश करने के नाम पर बिजली का अति उपयोग ना करके आप इस दीवाली को ग्रीन दीवाली बनाने की तरफ अपने कदम भी बढ़ाएंगे। 

 

 

ऑर्गेनिक गिफ्ट्स दें

 दीवाली आपसी भाईचारे का पर्व है इसलिये इस दिन सभी लोग अपनी-अपनी पॉकेट के अनुसार अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को गिफ्ट्स देते हैं। तो क्यों ना इस दीवाली हम ऑर्गेनिक गिफ्ट्स खरीद कर अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को दें। आर्गेनिक गिफ्ट्स में उदाहरण के तौर पर आप एक्ज़ोटिक आर्गेनिक सोह्रश्वस, क्रीम, विशेष चाय-कॉफी, मसाले, प्लांट्स या फूलों के बीज इत्यादि खरीद कर दे सकती हैं। यकीन मानिए आपके दोस्तों-रिश्तेदारों को ऐसे गिफ्ट्स की उम्मीद नहीं होगी लेकिन जब वे मिठाइयां व अन्य गिफ्ट्स की जगह ऑर्गेनिक गिफ्ट्स देखेंगे तो बहुत खुश होंगे। साथ ही आप ऐसे गिफ्ट्स देकर गो ग्रीन का संदेश भी प्रसारित कर सकेंगे। एक बात जरूर ध्यान रखनी है कि गिफ्ट्स को किसी भी पैकिंग पेपर से रैप करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि ह्रश्वलास्टिक के ये गिफ्ट्स रैपर रिसाइकल नहीं हो पाते हैं। गिफ्ट्स रखने के लिये जूट बैग या कपड़ा सबसे बेहतर रहता है।

ईको-फ्रेंडली पटाखे खरीदें और छुड़ाएं

दीवाली के नजदीक आते ही इसके खत्म होने तक पटाखों की गगनभेदी गूंज, वातावरण में जहरीली गैसों के काले बादल, त्वचा में सूखी खुजलाहट, सांस लेने में तकलीफ और कानों में सनसनाहट जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। इस त्योहार के दौरान आपके कानों को सभी दिशाओं से सिर्फ पटाखों की धूम-धड़ाम ही सुनाई देती है लेकिन हम त्योहार के उत्साह और उमंग में इस कदर डूब जाते हैं कि पटाखों से पर्यावरण को होने वाले नुकसान और मनुष्य की सेहत पर पडऩे वाले नकारात्मक प्रभाव की अनदेखी कर देते हैं। लेकिन इस बार सेहत और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले पटाखे खरीदने की बजाए ईको-फ्रेंडली पटाखे खरीदकर दीवाली का जश्न मनाएं। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए आजकल बाजार में कई जगहों पर ईको-फ्रेंडली पटाखे बेचे जाने लगे हैं। इन ईको-फ्रेंडली पटाखों की खासियत होती है कि यह रिसाईकिल्ड पेपर से बने होते है और फूटने पर आवाज उतनी होती है जितनी कि पॉल्युशन बोर्ड ने आवाज की डेसीबल लिमिट तय की हुई हैं। इसके अलावा इन पटाखों के फटने पर बहुत सारे रंगीन कागज और रंगीन लाइट्सनिकलती हैं। यह पटाखे हर लिहाज से सेहत और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होते हैं।

ईको-फ्रेंडली सजावट करें
दीवाली पर बाजार व मॉल में घर सजाने के सामान पर लगी सेल को देखकर हम खुद को खरीददारी करने से रोक नहीं पाते हैं। उस समय हम यह भी नहीं सोचते हैं कि घर की साज-सज्जा के लिए जिस मटिरीअल का सामान हम खरीद रहे हैं वो इस्तेमाल होगा भी और यह सामान रिसाईकल होगा भी या नहीं। इन सभी बातों पर हमारा ध्यान बिलकुल नहीं होता है, हम तो बस सुंदर-सुंदर चीजें देखकर खरीदने के लिये मचल उठते हैं। यदि इस दीवाली 'गो ग्रीन का वादा निभाना है तो सजावट की चीजें खरीदते हुए इस बात का ध्यान जरूर रखें कि कोई भी चीज ऐसी ना हो जो रिसाईकल ना हो सके। क्योंकि दीवाली खत्म हो जाने के बाद ह्रश्वलास्टिक की कंदील व झालर इत्यादि फेंक दी जाती है 

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