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पटाखे आपके स्वास्थ्य के लिए खतरा तो नहीं

गृहलक्ष्मी टीम

12th October 2015

ज्यादातर पटाखों से 80 डेसीबल से अधिक स्तर की आवाज निकलती है जिस कारण बहरापन, उच्च रक्तचाप और अनिद्रा जैसी स्थिति आ जाती है। इसलिए आपको बहुत तेज आवाज वाले पटाखें चलाने से बचना चाहिए.

कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल, गुडग़ांव में इंटरनल मेडिसिन के डॉ. सतीशकौल कहते हैं, 'पटाखों से बहुत ज्यादा ध्वनि प्रदूषण फैलता है और इनसे डेसिबल स्तर उच्च हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप बेचैनी, उत्तेजित व्यवहार, गुस्सा, व्याकुलता और किसी भी स्थिति में अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होने जैसे लक्षण उभरते हैं।

पटाखों की आवाज

ज्यादातर पटाखों से 80 डेसिबल से अधिक स्तर की आवाज निकलती है जिस कारण बहरापन, उच्च रक्तचाप और अनिद्रा जैसी स्थिति आ जाती है। बच्चे, गर्भवती महिलाएं और सांस की समस्याओं से पीडि़त ज्यादातर लोगों की दिक्कतें अत्यधिक ध्वनि के कारण बढ़ जाती हैं।

स्वास्थ्य पर खतरा

स्वास्थ्य पर खतरा बढऩे के अलावा पटाखों से परोक्ष रूप से गंभीर दुष्परिणाम भी देखे गए हैं। पटाखे सावधानी से नहीं चलाने पर त्वचा झुलस सकती है और इस पर लंबे समय तक जले का निशान बना रहता है। गलत तरीके से आतिशबाजी करने के कारण बहुत लोग बुरी तरह जलकर जख्मी हो चुके हैं और कई लोगों की जानें भी जा चुकी हैं।

अन्य नुकसान

पटाखों के जलने से त्वचा, बाल और आंखों की पुतलियों को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है। पटाखों में मौजूद नुकसानदेह रसायन त्वचा में शुष्कता और एलर्जी पैदा करते हैं। वातावरण में नुकसानदेह रसायनों के फैलने से बालों के रोमकूप कमजोर पड़ जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप बाल टूटने लगते हैं और बालों की प्राकृतिक संरचना भी बिगड़ती है। पटाखों के कारण आंखों में जरा सी चोट भी एलर्जी और नेत्रहीनता की स्थिति पैदा करती है।

 

 पटाखों को ना कहें

लिहाजा हमें सच्ची भावना के साथ यह पर्व मनाना चाहिए और इसे त्योहार को रोशनी और शांति का त्योहार ही बने रहने देना चाहिए। इस त्योहार का जश्न मित्रों और परिवार के बीच ही मनाना चाहिए। इस दीवाली में हमें प्रतिज्ञा लेनी चाहिए कि नुकसानदायक पटाखों को ना कहें और सुरक्षित एवं प्रदूषण मुक्त पर्यावरण बनाने को हां कहें।


  

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