प्यार करें नफरत भरे ससुराल के रिश्तों से

अर्पणारितेश यादव

23rd October 2015

विवाह के बाद हर लड़की के लिए नए घर में समांजस्य बिठा पाना बहुत मुश्किल होता है। लेकिन थोड़ी सी समझदारी और संयम से काम ले तो लड़की नफरत भरे रिश्तों में प्यार की मिठास घोल सकती है।

 रिश्ते-नाते

वैसे तो हर रिश्ते का जीवन में बहुत महत्व होता है, पर जब बात ससुराल की आती है तो वहां से जुड़ा हर एक रिश्ता बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि विवाह करते ही पति के अतिरिक्त अनेक नए संबंध लड़की की जिंदगी से जुड़ जाते हैं। जो पति के समान ही बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इन सबकी कसौटी
पर खरा उतरना कभी-कभी मुश्किल भी हो जाता है। उसके लिए ससुराल के रिश्ते को संभालना वैसा ही होता है जैसे एक छोटे बच्चे की देखभाल करना, क्योंकि ससुराल से जुड़ा हर एक रिश्ता इतना नाज़ुक होता है कि कब कौन सा रिश्ता उलझ जाए इस बात का अंदाजा लगा पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा होता है। खासकर तब जब आप उस घर में एक नये सदस्य के रूप में हों।ससुराल में आप सभी का दिल जीत सकें इसके लिए ससुराल से जुड़े हर सदस्य के बारे में जानना-समझना बहुत जरूरी है ताकि आप हर रिश्ते के साथ सामंजस्य बिठाकर एक नये जीवन की शुरुआत कर सकें।

कैसे बनाएं ससुरालवालों को अपना
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शादी के बाद एक लड़की सिर्फ पत्नी नहीं बल्कि बहू, चाची, ताई, भाभी,देवरानी, बनती है इसलिए उसे उसी के अनुरूप अपने को ढालना चाहिए ताकि हर रिश्ते में आपके प्यार की झलक नजर आए। मनोचिकित्सक प्रांजलि कहती हैं कि आज की आधुनिकता भरी जिंदगी में जब लड़के की शादी की बात आती है तो सभी माता-पिता चाहते हैं कि लड़की ऐसी आए जो पूरे घर को संभालें। आज की लड़कियां भी चाहे जितनी भी आधुनिकता से भरी क्यों ना हो पर शादी और ससुराल और सास के नाम से सांस अटकती हैं। पर यदि वो ऐसे समय में आत्मविश्वास और विवेक से काम लें तो ससुराल के हर रिश्ते को ताउम्र के लिए अपना बना सकती है। वो कैसे? आइए जानें-

ससुर से निभाएं

ससुराल का मुखिया ससुर होता है इसलिए बहू का कर्तव्य बनता है कि वह ससुर का पूरा ध्यान रखें। उनसे नपे-तुले शब्दों में अपनी बात को कहें। उन्हें पिता की तरह उचित मान-सम्मान दें। उनकी दिनचर्या संबंधी आदतों तथा पसंद-नापसंद का ध्यान रखें। उनकी इच्छा के विरूद्ध कोई कार्य ना करें। एक पिता की तरह उनकी हर बात को ध्यान से सुनें।

देवरानी-जेठानी बने बहनें

देवरानी-जेठानी के रिश्ते में प्रतिस्पर्धा व द्वेष की भावना ना रहे इसके लिए आपस में प्रेम बनाए रखें। जेठानी और देवरानी दोनों एक-दूसरे को छोटी बहन के समान समझें। यदि एक-दूसरे को किसी की बात का बुरा लग जाता है तो अपनी बेइज्जती समझकर एक-दूसरे से लड़ाई करने की बजाए प्यार से बात करें व माफी मांग लें। छोटी-छोटी बातों में बहस ना करें। घरेलू कार्यों को लेकर झगड़े ना करें। बल्कि एक-दूसरे को पूर्ण सहयोग दें। एक-दूसरे की इच्छाओं और आवश्यकताओं का ध्यान रखें।

 

 

 

ननद को बनाएं सहेली

ननद विवाहित हो या अविवाहित हर दृष्टि से उसका परिवार में महत्वपूर्ण स्थान होता है। उसके प्रति जरा सी अनदेखी पूरे घर को हिला के रख देती है, क्योंकि ननद, बहू और सास के बीच की कड़ी होती है। इसलिए ननद को ननद नहीं, बल्कि बहन की तरह सम्मान देने के साथ-साथ उसे अपना मित्र बनाएं। उसके साथ समय बिताएं। खाली समय में उसके साथ बैठकर बात करें ताकि आप उसकी पसंद नापसंद, आदतों व इच्छाओं से भली-भांति परिचित हो सकें और उसके अनुसार अपने व्यवहार को संतुलित रख सकें।

देवर हो छोटा भाई

भाभी और देवर का रिश्ता बहुत ही स्नेहिल रिश्ता होता है, जिसमें छेड़छाड़, मज़ाक होना एक आम बात है। यह रिश्ता यूं ही कायम रहे इसके लिए देवर को छोटे भाई के समान मानें। उससे हंसी मज़ाक करें, लेकिन सीमित दायरे में रहकर। देवर-भाभी के रिश्ते की गरिमा को बनाए रखें। एक-दूसरे का सम्मान करें और हंसी मज़ाक ऐसा करें, जो देखने और सुनने में परिवारवालों को खराब ना लगे।


जेठ बने बड़े भाई

ससुराल में जेठ की अपनी अलग भूमिका होती है। घर में बड़े होने के कारण बहू का फर्ज बनता है उनका सम्मान करें। उनसे किसी भी बात पर बहस ना करें। अगर वो शादीशुदा है तो कोशिश करें कि ऐसा कुछ ना करें, जिससे आपकी व उनकी पत्नी के बीच लड़ाई हो। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि जेठ पति का बड़ा भाई होता है। घर में उनका ओहदा सर्वोच्च है और हमेशा रहेगा इसलिए उनके बड़प्पन को ध्यान में रखते हुए कभी भी मन में द्वेष की भावना उत्पन्न ना होने दें क्योंकि आपके द्वारा असभ्य व्यवहार से दो भाईयों के बीच झगड़ा भी पनप सकता है। ऐसी स्थिति आने की नौबत ना आने दें। उनके द्वारा लिए गए घर के फैसलों को नकारें नहीं, बल्कि उनके फैसलों का सम्मान करें। 

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