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जानें सही तरीका छोटे शिशु के स्नान का

ममता अग्रवाल

28th October 2015

नहलाने का सही तरीका बच्चे के सूंघने, स्पर्श, देखने और सुनने की क्षमताओं को विकसित करते हुए, उसके संपूर्ण विकास में मदद करता है।

जानें सही तरीका छोटे शिशु के स्नान का
 

बच्चे को नहलाने के समय को केवल उसकी साफ-सफाई के तौर पर देखा जाता है। लेकिन विज्ञान इस बात को साबित करता है कि नहाने का रुटीन शिशु के सामाजिक, मानसिक, भावनात्मक और ज्ञानात्मक यानी कुल मिलाकर संपूर्ण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह समय शिशु की सभी इंद्रियों पर सकारात्मक असर डालता है। नहलाने का सही तरीका बच्चे के सूंघने, स्पर्श, देखने और सुनने की क्षमताओं को विकसित करते हुए, उसके संपूर्ण विकास में मदद करता है। परिणामस्वरूप वह एक स्वस्थ और खुशनुमा बच्चे के रूप में बढ़ता है। बच्चों के लिए खास बने उत्पाद सुरक्षित और कोमल तो होते ही हैं, आपके ममता भरे स्पर्श के साथ ये बच्चों की उन सभी चेतनाओं को जगाते हैं जिनसे उनका विकास होता है।
7-18 महीने और 18-36 महीने के नवजात शिशु और उनकी माताओं पर उनकी उम्र के अनुसार तीन हफ्तों का एक अध्ययन किया गया। इनमें परिवारों को दो तरह के समूहों में बांटा गया। पहले समूह में ऐसी माएं शामिल थीं जिन्हें बच्चों के लिए मालिश, स्नान आदि के विशेष तरीके अपनाने के निर्देश दिए गए, जबकि दूसरे समूह को अपनी सामान्य दिनचर्या पर चलने को कहा गया। पहले समूह के बच्चों, जिन्हें एक विधिवत तरीके से नहलाया गया, सोने के व्यवहार संबंधी समस्याएं काफी कम पाई गई। जिसके फलस्वरूप बच्चों और माता-पिता दोनों के लिए ही वातावरण काफी कम तनावपूर्ण रहा। स्टडी में यह भी पाया गया कि नवजात शिशुओं को स्पॉन्ज स्नान की तुलना में टब में नहलाने पर वे कम रोए और अधिक शांत रहे। मांओं को भी बच्चे को टब में नहलाने में अधिक आनंद मिला और आत्मविश्वास की अनुभूति हुई। सही विधिवत तरीके से नहलाने से बच्चे को बेहद सुकून मिलता है। देखा गया कि जिन बच्चों को खुशबूदार साबुन से नहलाया गया, वे नहाने के दौरान कम रोए, उन्होंने माता-पिता की आंखों से ज्यादा देर संपर्क किया और नहाने के बाद वे अच्छी सुकूनभरी नींद भी सोए। केवल बच्चा ही नहीं, उसे खुशबूदार स्नान देते समय माता-पिता भी ज्यादा प्रसन्न और तनावरहित दिखे। बच्चे और माता-पिता दोनों में तनाव पैदा करने वाले हॉर्मोन कोर्टिसोल का स्तर भी काफी कम हो गया। यानी बच्चे का स्नान माता-पिता और बच्चे दोनों के लिए एक तनावरहित माहौल पैदा करने में मददगार बना। जानते हैं शिशु को नहलाने की सही विधि किस प्रकार बच्चे के बेहतर विकास में मददगार होती है।

हाथों और आंखों का समन्वय
बच्चे के सही विकास क्रम में उसके हाथों और आंखों में सही समन्वय होना बेहद जरूरी है। इसके लिए अपने नन्हे शिशु को नहलाते समय पानी में बुलबुले बनाकर उनसे खेलें। उसके हाथों से ही उसके शरीर पर बने बुलबुलों को हटवाएं जिसके नीचे उसे अपने शरीर के छिपे अंग दिखाई देंगे। आपकी इस गतिविधि से उसमें यह समझ विकसित होगी कि दिखाई न देने वाली चीजें भी मौजूद होती हैं और उसके हाथों और आंखों में बेहतर समन्वय भी स्थापित होगा।

बेहतर स्मरण शक्ति
संगीत बच्चे के दिमाग के उन हिस्सों के विकास में मददगार होता है जो उसकी स्मरण शक्ति और देखने, सोचने की क्षमता के लिए जिम्मेदार हैं। नहलाने के क्रम में खेल-खेल में ही शिशु के दिमाग के विकास और सक्रियता को विकसित करने की कोशिश करें। नहलाते समय मधुर स्वर में गुनगुनाना बच्चे की स्मरण शक्ति को बेहतर बनाने में भी मदद करता है। इसलिए उसे नहलाते समय कोई नर्सरी राइम जरूर सुनाइए या कोई मीठी धुन गुनगुनाइए।

भाषा का विकास
नहलाने के समय को आप शिशु की भाषा संबंधी कुशलता को बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल कर सकती हैं क्योंकि कई शोधों में साबित हुआ है कि जिन शिशुओं के साथ ज्यादा बातचीत की जाती है, वे शिशु दो साल के होने तक काफी शब्द सीख चुके होते हैं। इसलिए नहलाने के समय का भरपूर उपयोग शिशु को ज्यादा से ज्यादा शब्द सिखाने के लिए कीजिए। इस दौरान उसे खेल-खेल में उसके शरीर के ही अंगों- हाथ, पैर, नाक, कान, कंधा, सिर, जैसे शब्दों, गिनती आदि आप आसानी से सिखा सकती हैं।

कारण और परिणाम की सीख
नहलाते समय अगर माएं अपने शिशु के साथ पानी से तरह-तरह के खेल खेलती हैं, तो शिशु खेल-खेल में ही इन गतिविधियों के जरिए कई चीजें सीख जाता है। पानी में छपाके मारिए या किसी मग में पानी भरिए। आसपास मौजूद चीजों की सहायता से कई प्रकार की गतिविधियां कीजिए और उससे बातचीत कीजिए। इन गतिविधियों के माध्यम से शिशु सहज ही अलग-अलग कारणों और उनके परिणामों के बारे में जान जाएगा।

संलग्नता के संकेत
शिशु को अगर खुशबूदार साबुन से नहलाया जाए तो नहाने के बाद वह अपने माता-पिता के साथ संलग्न होने के 30 प्रतिशत अधिक संकेत देता है। मगर इस बात का ध्यान जरूर रखें कि खुशबू बहुत तेज ना हो। आमतौर पर बड़ों के लिए बने साबुन, पाउडर और तेल बच्चों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बच्चों के लिए खास बने उत्पाद का ही प्रयोग करें। आपका शिशु अपने मनपसंद खिलौने से खेलने या अन्य तरह से आपसे बातचीत के लिए अधिक उत्साह के संकेत देता है। उसके इस प्रयास की भरपूर तारीफ कीजिए और उसका उत्साह बढ़ाइए।

पारस्परिक क्रिया-कलाप
जब आप अपने शिशु को नहलाती हैं तो उस दौरान आप कई तरह के क्रिया-कलाप करती हैं, जिससे उसकी सभी इंद्रियों का विकास होता है। जैसे कि आप उसके शरीर पर बच्चों के लिए खास बना साबुन लगाती हैं तो उसे सुगंध का अहसास होता है। वह साबुन और पानी से बने बुलबुलों से खेलता है, आप उसे ह्रश्वयार से दुलारती हैं, सहलाती हैं। इन सब गतिविधियों से बच्चे की समझ, चुस्ती-फुर्ती और प्रतिक्रिया करने की कुशलता बढ़ती है।

मां और शिशु में लगाव
नहलाने के दौरान मां का पूरा ध्यान अपने शिशु पर होता है। मां और शिशु एक-दूसरे के साथ खेलते हैं, एक-दूसरे की ओर देख कर मुस्कुराते हैं। मां की त्वचा का शिशु की त्वचा से संपर्क होता है। इन सब बातों से मां और बच्चे के बीच संबंध और अधिक प्रगाढ़ होता है।

 

बढ़ता है ज्ञान
नहलाने की संपूर्ण क्रिया से बच्चे का ज्ञान बढ़ता है। नहलाने के महत्वपूर्ण समय के दौरान तेल से मालिश, गुनगुने पानी से शिशु का स्नान, थोड़ा खेल और बच्चे के साथ आप ढेर सारी मस्ती कर सकती हैं। इन सबसे बच्चे को सीखने, समझने,प्यार करने और विकसित होने का पूरा अवसर मिलता है। 

बेहतर नींद
शिशु के लिए मालिश कई तरह से फायदेमंद है। क्या आपका शिशु भी मालिश के समय बेहद खुश प्रतीत होता है? शोध साबित करते हैं कि नियमित मालिश से शिशु का बेहतर मानसिक विकास होता है और उसकी चुस्ती-फुर्ती बढ़ती है। मालिश बच्चे का रक्तसंचार भी बढ़ाती है और उसके उपरांत स्नान के बाद शिशु को नींद भी अच्छी आती है।