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जब नर्मदा को प्रेम में मिला धोखा और चल पड़ी उल्टी दिशा में...

यशोधरा वीरोदय

20th September 2019

जब नर्मदा को प्रेम में मिला धोखा और चल पड़ी उल्टी दिशा में...
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 69वें जन्मदिन के मौके पर नर्मदा नदी की विधिवत पूजा अर्चना की थी। जिसके बाद नर्मदा नदी एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। वैसे ये हमारी भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता ही है कि इसमें नदियों को भी देवी के समान पूजा जाता है और उनके साथ मानवीय संवेदनाएं जुड़ी होती हैं। यहां हर नदी को लेकर अपनी पौराणिक मान्यता और कथा प्रचलित है... नर्मदा नदी को लेकर भी एक ऐसी रोचक कथा प्रचलित है। आज हम आपको नर्मदा नदी से जुड़ी इसी रोचक कथा के बारे में बताने जा रहे हैं। 

शिव के पसीने से जन्मी नर्मदा

दरअसल, नर्मदा की जन्म की कहानी भी बहुत ही रोचक है, मान्यता है कि नर्मदा का जन्म भगवान शिव के पसीने की बूंद से 12 साल की एक कन्या के रूप में हुआ था। उस कन्या के रूप को देख देवताओं ने उसका नाम नर्मदा रखा। बाद में नर्मदा के विवाह हेतु एक स्वयंवर रचा गया, जिसमें शर्त रखी गई कि जो भी व्यक्ति नर्मदा के लिए गुलबकावली के फूल ले आएगा, उसी से उनका विवाह रचाया जाएगा।

प्रेम प्रसंग में मिला धोखा

इस शर्त को पूरा किया राजकुमार सोनभद्र ने, जिनसे राजकुमारी नर्मदा का विवाह तय हुआ। पर तब तक दोनो ने एक दूसरे को देखा नहीं था, ऐसे में एक दिन नर्मदा ने अपनी दासी जुहिला के हांथो सोनभद्र तक प्रेम संदेश भिजवाने की सोची। इस पर जुहिला को भी ठिठोली सुझी, उसने राजकुमारी नर्मदा से उनके वस्त्राभूषण मांगे और उसे पहन वो राजकुमार से मिलनेचल पड़ी। ऐसे में जब जुहिला सोनभद्र के पास पहुंची तो सोनभद्र ने उसे ही नर्मदा समझने की भूल कर दी और ऐसा देख जुहिला के मन में भी खोट आ गया और वो राजकुमार के प्रणय-निवेदन को ठुकरा ना सकी। 

क्रोध में चल पड़ी उल्टी दिशा में

इधर जब काफी देर तक जुहिला नहीं लौटी तो नर्मदा स्वयं जुहिला को ढूंढ़ते हुए सोनभद्र के पास पहुंची। जहां जुहिला के साथ सोनभद्र को देखकर वह अपमान की भीषण आग में जल उठीं। ऐसे में गुस्से की आग में उल्टी दिशा में चल पड़ी फिर कभी ना लौटने के लिए। ऐसे में मान्या है कि तभी से नर्मदा अरब सागर में जाकर मिल गई। जबकि बाकी नदियां बंगाल की खाड़ी में मिलती है।हालांकि सभी नदियों में नर्मदा सबसे पवित्र और पूज्यनीय मानी जाती है, मान्यका है कि जो पुण्य गंगा में स्नान करने से मिलता है, वो नर्मदा नदी के दर्शन मात्र से मिल जाता है।

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