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नवरात्रि में क्यों नहीं किए जाते विवाह आयोजन

यशोधरा वीरोदय

30th September 2019

एक तरफ जहां नवरात्रि में सभी शुभ कार्य किए जाते हैं, वहीं शादी-विवाह का आयोजन नहीं होता।

नवरात्रि में क्यों नहीं किए जाते विवाह आयोजन
शारदीय नवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है, जब देवी पूजन कर लोग शक्ति की आराधना करते हैं। नवरात्रि के दिनों में वातावरण में भी बेहद पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है । ऐसे में नवरात्रि का समय किसी शुभ कार्य को आरम्भ करने के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। गृहप्रवेश से लेकर, किसी नई खरीदारी, नए कार्य या बिजनेस की शुरूआत करनी हो, नवरात्रि का समय बेहद शुभ माना जाता है। हालांकि वहीं नवरात्रि के दौरान एक शादी-विवाह जैसा आयोजन निषेध माना गया है। 
जी हां, नवरात्रि के दौरान विवाह कार्यक्रम नहीं रखे जाते हैं। ऐसे में ये सवाल उठता है, कि आखिर ऐसा क्योंकि एक तरफ जहां नवरात्रि में सभी शुभ कार्य किए जाते हैं, वहीं शादी-विवाह का आयोजन नहीं होता। असल में, इसके पीछे कुछ पौराणिक मान्यताएं हैं और आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं।
दरअसल, नवरात्र सनातन धर्म का सबसे मुख्य त्यौहार है, जिसमें नौ दिनों तक पूर्ण पवित्रता के साथ देवी के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। ऐसे में इस दौरान शारीरिक और मानसिक रूप से विशेष शुद्धता रखनी होती है। जैसे कि इन दिनों में शेविंग करने, बाल कटाने से लेकर शारीरिक सम्बंधों की मनाही होती है। जबकि शादी-विवाह जैसे आयोजन का उद्देश्य ही स्त्री-पुरुष के बीच प्रणय सम्बंधों के जरिए संतान उत्पत्ति होती है। यही वजह है कि नवरात्रि के दिनों में विवाह आयोजन नहीं किए जाते हैं। 
हालांकि नवरात्रि में सगाई, गोदभराई जैसे शुभ काम किए जा सकते हैं। ये एक नए रिश्ते की शुरूआत के लिए बेहतर समय हो सकता है।

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