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रोल मॉडल की तलाश

Sheetal Gaur

29th October 2015

बच्चों के लिए उनके रोल मॉडल उनके माता-पिता और परिवार होता है। प्रेरणादायी कहानियां उन्हें प्रेरणा तो देती हैं लेकिन जीवन सफल बनाने में अभिभावक की भूमिका अहम् होती है।

विविध


बच्चों की पीढिय़ां उन मिथकीय नायकों की कहानियां सुन कर बड़ी हुई, जिन्होंने अपने बचपन में ही अपने प्रखर व्यक्तित्व का परिचय दे दिया। जॉर्ज वाशिंगटन की कहानी हम सब सुन चुके हैं और किस तरह से उन्होंने चेरी वृक्ष को काट गिराया और जब उनके पिताजी ने उनसे इसके बारे में पूछा तो उन्होंने निस्संकोच इसे स्वीकार किया। कई प्रेरणादायी कहानियां मां-बाप और दादा-दादी द्वारा रटाई जाती हैं, ताकि आदर्श व्यक्तियों का उदाहरण देकर बच्चों का चरित्र निर्माण किया जा सके। फिर भी, समय बदल गया है और यद्यपि कहानियां कहने की प्रवृत्ति में भारी कमी आई है, लेकिन आदर्श व्यक्तियों का महत्व यथावत बना हुआ है। 

आदर्श व्यक्तियों का महत्व
बच्चे के मनोवैज्ञानिक विकास में आदर्श व्यक्तियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। वे अपने कौशल या उपलब्धियों, मूल्यों के आधार पर व्यक्तित्व की पहचान करने में बच्चे की मदद करते हैं। आदर्श व्यक्तित्व न केवल बच्चों को अपना उद्देश्य और दुनिया में अपना स्थान निर्धारित करने में मदद करते हैं, बल्कि दृश्य लक्ष्यों के जरिए, बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है, ताकि वे स्वयं में अपेक्षित मूल्य का विकास कर सकें। विकास काल में, आदर्श व्यक्तित्व किशोरों को जीवन कौशल और स्वस्थ दृष्टिकोण से समृद्ध बना सकते हैं। सर्वोत्तम यह है कि बच्चों का आदर्श व्यक्तित्व उनके अपने समय का कोई वास्तविक व्यक्तित्व हो, जिसके साथ वो खुद को जोड़ कर देख सकें।

उदाहरण के लिए इस साल के ओलंपिक पदक विजेता-बहुप्रशंसित मैरी कॉम को ही लें, जो लड़के और लड़कियों दोनों के लिए ही समान रूप से आदर्श व्यक्तित्व बन चुकी हैं। सामान्य जीवन के लिए अनुपयुक्त परिस्थितियों में पली-बढ़ीं, कांस्य पदक विजेता कॉम ने भारत की बॉक्सिंग में पुरूषों के एकाधिकार को चुनौती दी है। एक दशक से महिलाओं की बॉक्सिंग में अपनी पहचान बनाई है और अपने इसी जज्बे के कारण वह बच्चों के लिए एक बहुत बड़ी रोल मॉडल हैं। 

सबसे प्रभावशाली आदर्श व्यक्तित्व
जबकि महात्मा गांधी, सचिन तेंदुलकर और मैरी कॉम जैसी शख्सियतें उन बच्चों के लिए बहुत बड़े आदर्श व्यक्तित्व हैं, जिन्हें उनकी उपलब्धियों के बारे में काफी जानकारी है, अधिकांश बच्चों पर उन रोल मॉडल्स का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है, जिनसे वे नियमित रूप से रूबरू हो सकते हैं। बच्चों के विकास में आम तौर पर परिवार और मित्र-संबंधों वाले लोगों का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। जब बच्चे सामाजिक कार्य, चिकित्सा, खेलकूद या कारोबार में शामिल असली जिंदगी के परिचित लोगों के साथ अपने विचार, मूल्य और सोच साझा कर पाते हैं, तो इससे उन्हें बेहतर तरीके से विकास में मदद मिलती है।
इसी तरह, बच्चों के विकास का एक बड़ा हिस्सा उन्हें अपने मां-बाप से अलग अपनी पहचान बनाने में लग जाता है। इसलिए, स्पष्टतया मां-बाप अपने बच्चों के लिए सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण रोल मॉडल्स में से एक होते हैं। बच्चे अपने मां-बाप को रोजाना बोलते हुए और काम करते हुए देखते हैं, इसलिए अभिभावकों के लिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि जिन बातों का वे उपदेश दें, उन्हें वो अपने व्यवहार में भी शामिल करें। सहयोगी, सहनशील और उत्साहवद्र्धक अभिभावक होने का स्पष्ट रूप से बच्चों के लिए कई फायदे हैं। इसके अलावा, जो मां-बाप अपनी गलतियां स्वीकार करते हैं, वे अपनी बुद्धिमानी और अनुभव भी अपने बच्चों के साथ साझा कर पाते हैं और इन आदतों से बच्चों को मना भी कर सकते हैं। आज देश में यह आवश्यक है कि शिक्षकों के रूप में आदर्श व्यक्तित्व विकसित हों। मां-बाप के अलावा, शिक्षक और देखभाल करने वाले अन्य व्यक्ति बच्चों के लिए अच्छे रोल-मॉडल्स हो सकते हैं, चूंकि बच्चे दिन का अपना काफी समय कक्षाओं में बिताते हैं। शिक्षकों के लिए यह आवश्यक है कि वे बच्चों की अनोखी क्षमता की तलाश कर सकें और इसे उनके अभिभावकों को बताएं।

आदर्श व्यक्ति की यह तलाश तभी शुरू हो पाएगी, जब लोग सही सोच अपनाएं, ताकि सर्वांगिण विकास को बढ़ावा मिल सके। खुली सोच और लगातार सीखने की कोशिश बच्चों को प्रेरित करती है ताकि वे विभिन्न चीजों पर अपना हाथ आजमा सकें। इस मुहीम को बढ़ावा देना होगा ताकि बच्चों को अपनी सर्वोत्तम क्षमताओं को तलाशने में सक्षम बनाया जा सके।

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