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बच्चों को बनाएं स्मार्ट

डॉ. समीर पारिख

29th October 2015

माता-पिता को कुछ खास बातों की जानकारी रखना जरूरी है ताकि हम अपने बच्चों को सुरक्षित भविष्य दे सकें। इससे उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाए रखने में बहुत मदद मिलेगी।

आज दुनिया जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, उसमें अक्सर मां-बाप को ये चिंता लगी रहती है कि अपने बच्चों को इस बदलाव का सामना करने के लिए कैसे तैयार करें। पर अकसर उनकी जिंदगी के उन खास पहलुओं पर हमारा ध्यान नहीं जाता जो बच्चे की सेहत और भलाई पर बुरा असर डाल सकते हैं। माता-पिता को कुछ खास बातों की जानकारी रखना जरूरी है ताकि बच्चों को सुरक्षित भविष्य दे सकें। इससे उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाए रखने में बहुत मदद मिलेगी।

साथियों के दबाव का सामना
बढ़ते बच्चों के माता-पिता की आम चिंता यह रहती है कि बच्चों पर उनके साथियों का प्रभाव कितना है। बेशक एक ऐसा दौर आता है जब बच्चा या किशोर अपने माता-पिता या उस पर अधिकार रखने वाले दूसरे ऐसे लोगों की तुलना में अपने साथियों को ज्यादा तरजीह देने लगता है। किंतु बड़ों के लिए जरूरी है कि वे अधिकारों के किसी संघर्ष का हिस्सा न बनें। बच्चों को मजबूर न करें कि वे उनके लिए अपने साथियों को कमतर मानें। असल में माता-पिता को इस टकराव से बचना चाहिए और सिर्फ उन बातों पर बहस करनी चाहिए जो बच्चों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। बच्चों को सिखाना होगा कि वे साथियों के दबाव का सामना कैसे करें। उन्हें इसकी सामथ्र्य देना जरूरी है। हमें बच्चों को ऐसा माहौल देना होगा जो उन्हें सहारा दे और खुलकर अपने मन की बातें करने के लिए प्रेरित करे।

मीडिया साक्षर बनाना
बच्चे अपने आसपास जो कुछ होता देखते हैं उससे बहुत कुछ सीखते हैं। आज बच्चों के विकसित होते मन-मस्तिष्क पर मीडिया का जबर्दस्त असर हो सकता है। मीडिया साक्षर होने का मतलब ये है कि हम मीडिया से दिए जा रहे संदेशों को सही ढंग से समझें और सही फैसले लेने के लिए उनका असरदार ढंग से उपयोग कर सकें। इससे बच्चों को यह समझने में मदद मिलती है कि मीडिया कैसे सच्चाई को गढ़ता है, उससे किसे फायदा होता है और वो कैसे हमें सम्मोहित करता है और उसमें प्रचारित मान्यता को कैसे तोडऩा है। माता-पिता के नाते हमें ये कौशल सीखने होंगे ताकि हम अपने बच्चों से बात कर सकें और मीडिया के हानिकारक असर को कम कर सकें। बच्चे इंटरनेट का कितना और कैसा उपयोग कर रहे हैं इसकी निगरानी करने या पाबंदी लगाने के बजाय बेहतर होगा कि माता-पिता बच्चों को स्वयं मीडिया साक्षर बनाएं।

साइबर सुरक्षा
मीडिया और खासकर सोशल मीडिया तब भी हानिकारक हो सकता है जब हम सच और छलावे में फर्क नहीं कर पाते। बच्चे अकसर ऑनलाइन या टेलीविजन पर जो कुछ देखते हैं, उस पर आंख मूंद कर भरोसा कर लेते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इन्टरनेट कभी झूठ नहीं बोलता। ऐसे माहौल में साइबर सुरक्षा बहुत अहम है क्योंकि आए दिन अनेक मासूम बच्चे ऐसी घटनाओं के शिकार हो रहे हैं। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि बेशक दुनिया उनकी अंगुलियों के इशारे पर है पर वे उसके साथ क्या करना चाहते हैं ये उन्हें तय करना है। उन्हें सिखाना होगा कि इन्टरनेट के इस्तेमाल से जुड़े खतरों को जानें और अपने बारे में कोई भी जानकारी देने से पहले दो बार सोचें।

लगाव और रिश्तों को संभालना
किशोरावस्था में कदम रखते ही विपरीत सेक्स के प्रति आकर्षण स्वाभाविक है। यह दौर बच्चों और माता-पिता दोनों के लिए तनाव देने वाला हो सकता है। जरूरी है कि हम ऐसे आचरण पर पाबंदी न लगाएं क्योंकि अगर हम ऐसा करेंगे तो बच्चों में दुराव-छिपाव की भावना पैदा होगी। इसके बजाय माता-पिता को घर में मेलजोल और अपनेपन का माहौल बनाना चाहिए जिसमें बच्चा अपने मन की किसी भी उलझन या जटिलता के बारे में बात करने या सलाह लेने से हिचके नहीं।

आत्म-जागरूकता को प्रोत्साहन
बच्चे को आधुनिक दुनिया की चुनौतियों का सामना करने में समर्थ बनाने के लिए जरूरी है कि हम उन्हें अपने बारे में जागरूक होने को बढ़ावा दें। याद रखना चाहिए कि खुद पर ध्यान देना है और अपनी व्यस्त जिंदगी में से अपनी देखभाल के लिए समय निकालना है। रहन-सहन का स्वस्थ तरीका अपनाना अपने तन-मन को स्वस्थ और खुश रखने के लिए जरूरी है।

सहारा देने वाले संबंध बनाना
उम्र चाहे जो भी हो, समाज में ऐसे मजबूत और पर्याप्त संबंध बनाना जरूरी है जो वक्त पडऩे पर सहारा दे सकें। आपका परिवार, मित्र, साथी और प्रियजन कोई भी इस सहारा देने वाली व्यवस्था के अंग हो सकते हैं। आज की दुनिया में तकनीक पर बहुत अधिक निर्भरता से सामाजिक अलगाव और अकेलेपन की आशंका अधिक रहती है।

जीवन कौशल सीखने पर जोर
बच्चों और किशोरों को जिंदगी जीने के बुनियादी कौशल सिखाना बेहद जरूरी है तभी वे आज की दुनिया का सामना करने लायक हो सकेंगे। उन्हें जैंडर संवेदना, साथियों की जोर-जबर्दस्ती का सामना करने और गुस्से पर काबू रखने जैसी बातों का कौशल सीखने के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए।