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जानें कैसे पड़ा प्रियंका चोपड़ा की आने वाली फिल्म 'द स्काई इज पिंक' का नाम

प्रीती कुशवाहा

7th October 2019

बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा एक संयुक्त परिवार की बेटी हैं। परिवार और मां—बाप का सपोर्ट के साथ की वजह से प्रियंका ने 'मिस वर्ल्ड' का ख़िताब जीता। यही नहीं प्रियंका ने इंडस्ट्री में बिना किसी गॉडफादर के टॉप की हीरोइन बनने का सपना साकार किया बल्कि बॉलीवुड ही नहीं हॉलीवुड में भी अपनी प्रतिभा का दम दिखाया।

जानें कैसे पड़ा प्रियंका चोपड़ा की आने वाली फिल्म 'द स्काई इज पिंक' का नाम
कामयाबी के इस मुकाम पर प्रियंका 'जय गंगाजल' जैसी फिल्म के ढाई साल बाद जानी—मानी निर्देशिका शोनाली बोस की फिल्म 'द स्काई इज पिंक' से दोबारा बॉलीवुड लौटी हैं आखिर क्या था इस स्क्रिप्ट में, या फिर शोनाली बोस के निर्देशन में, जो तमाम फिल्मों को छोड़कर प्रियंका ने इस विषय पर अपनी हामी भरी। पेश है प्रियंका से हमारे मुंबई ब्यूरो चीफ प्रवीन चंद्रा की बातचीत के कुछ अंश….

हॉलीवुड में जाने के बावजूद बॉलीवुड के ढेरों ऑफर आपको हर रोज मिलते रहे हैं! आखिर इस फिल्म में ऐसी क्या बात थी कि आप एक किशोरी बेटी की मां का रोल प्ले करने के लिए तैयार हो गई...?

जहां तक स्क्रिप्ट की बात है तो शोनाली बोस ने जब पहली बार इस फिल्म की स्क्रिप्ट मुझे सुनाई तो मैं पागलों की तरह रोई थी...! फिर मैं अदिति से मिली जो सायरा का किरदार निभाने वाली रियल आयशा चौधरी की मां है, जब वह मुझसे मिली और कहां की मैं जानती थी आयशा को कभी भी खो सकती हूं, मुझे यह भी पता था कि आयशा की जिंदगी ज्यादा नहीं है पर मैं उसे लंबी जिंदगी न दें पाने का अफसोस ना करते हुए एक भरपूर जिंदगी देना चाहती थी और वह मैंने किया भी...!

बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक आपके कॅरियर का ग्राफ देखें तो पर रहकर भी आपने बहुत ही चुनौतीपूर्ण किरदार निभाए हैं जैसे ऐतराज़ मैं वैंप का इत्यादि क्या आपको ऐसी फिल्मों को चुनने में दर नहीं लगता?

पहली बात तो यह स्पष्ट कर दूं कि मेरा बैकग्राउंड फिल्मी नहीं था इसीलिए शुरुआती तौर पर, यह समझ ही नहीं थी कि किस तरह की फिल्में सिलेक्ट करनी हैं और दूसरी बात, नाही कोई गॉडफादर था जो लगातार फ्लॉप होने पर भी फिल्में देता अतः जो फिल्में राह में आई, उन्हें स्वीकृति देना पसंद ना पसंद नहीं मजबूरी थी एक तरह से..! हां जो भी फिल्म की पूरी ईमानदारी से की, पूरी मेहनत से की, अपना सौ प्रतिशत दिया।

आपने हाल ही में कहा है की हर फिल्म आपको कुछ ना कुछ नया सीखने को दी जाती है इस फिल्म ने आपको क्या सिखाया कुछ नया..?

यह फिल्म बहुत आम सी फिल्म है, बहुत ही आम लोगों की आम सी बायोपिक है। ऐसी खास फिल्म का हिस्सा बनना भला मैं ही क्या, कोई भी अच्छी अदाकारा का सपना हो सकता है..! जीत का जश्न बनाना हर फिल्म सिखाती है, पर हार कर भी हारते हुए भी, जीत का जश्न मनाना, यह फिल्म बहुत खूबसूरती से सिखा जाती है

राष्ट्रीय पुरस्कार लगातार आपकी द्वारा निर्मित की हुई भारतीय फिल्मों को मिल रहा है कौन-कौन सी हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों में आप आगे काम कर रही हैं..?

मैं नेटफ्लिक्स की दो फिल्में कर रही हूं जिसे लेकर काफी उत्साहित भी हूं, इसके अलावा इटालियन फिल्म मेकर की वाइट टाइगर बहुत खास हैं। यही नहीं मैं अपनी शादी पर आधारित एक कर रही हूं जिसकी स्क्रिप्ट अभी तैयार हो रही है, जहां तक ओशो से जुड़ी 'मां शीला' की बात है, तो मैं खुद ही पहले इसमें स्क्रिप्ट के लेवल पर संतुष्ट होना चाहती हूं क्योंकि यह किरदार भारतीय परिवेश और वैल्यू से जुड़ा हुआ है। जहां तक बॉलीवुड का सवाल है, यहां आते ही ढेरों कहानियां मिली, प्रोडक्शन हाउस स्वयं तैयार है मेरे साथ कोलैबोरेशन के लिए, पर अभी तक कुछ भी फाइनल नहीं हुआ है, अतः अपनी तरफ से बोलकर मैं किसी कॉन्ट्रोवर्सी में नहीं पड़ना चाहती (उनका इशारा सलमान खान की बहुचर्चित फिल्म भारत की तरफ था शायद)

इस फिल्म में आप न सिर्फ शादीशुदा महिला का चरित्र निभा रही हैं बल्कि मां का भी, तो निजी जिंदगी में विवाहित होना कितना फायदेमंद, और मां न होना कितना परेशानी भरा था, इस संवेदनशील रोल को लेकर..?

मैंने आज तक कोई भी फिल्म को अपनी निजी जिंदगी से कनेक्ट नहीं किया, वरना वह फिल्म मेरी अपनी होती उस किरदार कि नहीं, हां यह जरूर है किस फिल्म का विषय काफी मिलता-जुलता है एक आम भारतीय परिवार से, उनके आपसी जुड़ाव से, सरोकार से और आपसी मनमुटाव एवं प्यार से.., जिससे मेरा परिवार भी अछूता नहीं रहा है.., हम दोनों भाई बहनों को मां बाप ने इक्वली प्यार दिया है जैसा फिल्म में दिखाया गया है और फिर जहां तक मैरिड होने ना होने का सवाल उतना इंपॉर्टेंट नहीं था जितना मां होने का.., आयशा जैसी युवा हो रही बेटी और बेटे की मां का किरदार आसान नहीं था मेरे लिए.., पर एक बार जैसे ही फिल्म से जुड़ी, शोनाली बोस और अदिति से बच्चों के रिलेशनशिप पर बातें की साथ ही ऑनस्क्रीन बच्चों से मिली तो सारी बातें, अपने आप आसान होती गई..!

‘द स्काई इज पिंक' टाइटल का अर्थ क्या है..? साथ ही इस फिल्म से क्या कनेक्शन है..?

इस फिल्म में मैं अपनी 1 बरस की बेटी को लेकर अमेरिका रहती हूं इलाज के लिए पूरे डेढ़ साल के लिए..! इस दौरान दिल्ली में मेरे पति (फरहान अख्तर) के साथ रह रहा 4 बरस का बेटा फोन पर रोते हुए कहता है कि उसकी टीचर ने उसे इसलिए सजा दी क्योंकि उसने आसमान गुलाबी बनाया था जबकि टीचर का मानना था की स्काई का रंग नीला होता है..! इस पर मेरा किरदार अपने बेटे को कहता है तुम अपने निर्णयों में दूसरों को कभी हावी होने मत देना तुमने अगर गुलाबी रंग का आसमान रंगा है तो उसे सही गलत साबित करने वाला कोई दूसरा मायने नहीं रखता वह तुम्हारा नजरिया है और उसे बदलने वाला दूसरा कोई नहीं होता..! यह बात सोनाली को इतनी छू गई कि उसने फिल्म का नाम ही स्काई ईद पिंक रख दिया।

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