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जानिए शरद पूर्णिमा का महत्व और पूजन विधि

यशोधरा वीरोदय

12th October 2019

जानिए शरद पूर्णिमा का महत्व और पूजन विधि
अगर आप हिंदू धर्म के आवलंबी हैं तो आप शरद पूर्णिमा से भली-भांति परिचित होंगे, क्योंकि सनातन धर्म में इसका विशेष महत्व माना जाता है। दरअसल, धर्म शास्त्रों के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन ही देवी लक्ष्मी का जन्म हुआ था। ऐसे में मान्यता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से उनकी कृपा स्वरूप धन-धान्य की प्राप्ति होती है। हर वर्ष ये दिन आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है और इस बार ये13 अक्टूबर यानि कि रविवार को पड़ रहा है। अगर आप भी जीवन में सुख-समृद्धी और धन-धान्य की कामना करते हैं तो आप भी इस दिन लाभ उठा सकते हैं। तो चलिए जानते हैं शरद पूर्णिमा का महत्व, पूजा की विधि और मुहूर्त।

पौराणिक मान्यता,पूजन विधि और महत्व

पौराणिक मान्यता के अनुसार चूंकि इसी दिन देवी लक्ष्मी का अवतरण हुआ था, ऐसे में मान्यता है कि लक्ष्मी जी हर वर्ष इस दिन धरती पर भ्रमण करती हैं। ऐसे में इस दिन अगर उनकी विधिवत पूजा अर्चना की जाए तो उनकी विशेष अनुकम्पा प्राप्त की जा सकती है।इस दिन सुबह स्नान ध्यान करके मां लक्ष्मी और अपने इष्टदेव का स्मरण करें। आप चाहें तो इस दिन व्रत भी रख सकते हैं और अगर व्रत नहीं रख पा रहे हैं तो भी शाम के वक्त दोबारा से स्नान करके देवी लक्ष्मी की पूजन प्रारम्भ करें। मां लक्ष्मी को पुष्प आदि  समर्पित कर अखण्ड ज्योति जलाएं और देवी लक्ष्मी के महामंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम: ' का जप करें। इसके साथ देवी लक्ष्मी को मिष्ठान और फलों का भोग चढ़ाएं। इस तरह से पूजन करने और शरद पूर्णिमा की रात्रि में जागरण करने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और भक्तों को धन-धान्य से पूर्ण करती हैं।

चंद्रमा की उपासना

वहीं शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा की भी उपासना की जाती है। क्योंकि इस रात्रि में चंद्रमा अधिक बलवत होता है। ऐसे में सोलह कलाओं वाले इस चंद्रमा की उपासना से भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही इस रात में खीर बनाकर चांद की रोशनी में रखी जाती है, जोकि सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। ऐसे में आप भी शरद पूर्णिमा की रात में खीर बनाकर उसे छत या आंगन में रख सकते हैं और उसे आधी रात्रि के बाद या सुबह प्रसाद के रूप घर के सदस्य ग्रहण करें।

शरद पूर्णिमा का मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 13 अक्‍टूबर 2019 की रात 12 बजकर 36 मिनट से
पूर्णिमा तिथि समाप्‍त: 14 अक्‍टूबर की रात 02 बजकर 38 मिनट तक
चंद्रोदय का समय: 13 अक्‍टूबर 2019 की शाम 05 बजकर 26 मिनट

 

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