बच्चे को फ्रेंडली बनाने के 11 आसान टिप्स

डॉ. समीर पारिख

14th December 2015

यदि बच्चा दूसरों के साथ आसानी से घुलता-मिलता नहीं है, तो माता-पिता की चिंता स्वाभाविक है। कुछ बच्चे लोगों के साथ घुल मिल जाते हैं, वहीं कुछ बच्चे शर्माते हैं। बच्चों के सामाजिक विकास के लिए पेश हैं कुछ सुझाव -



अधिकांश बच्चे नए लोगों से बात करने में झिझकते हैं। यह दूसरों के प्रति खुद के व्यवहार के बारे में उनके डर के कारण हो सकता है। इस झिझक  को दूर करने से पहले यह जरूरी है कि बच्चे को सुरक्षित महसूस हो।

 

1-कम्युनिकेशन स्किल्स
बच्चों को प्रभावशाली कम्युनिकेशन स्किल्स सिखानी चाहिए ताकि बच्चे को उचित सामाजिक  व्यवहार, इशारों और बात करने की पद्धति के बारे में शिक्षित किया जा सके। प्रेरक बनें अपरिचितों की मौजूदगी में बच्चे घबरा जाते करते हैं। माता पिता को इसके प्रति सख्ती नहीं दिखानी चाहिए बल्कि, सहयोगात्मक रूप से प्रेरणा देनी चाहिए, ताकि वो घबराहट से बाहर आ सकें। शर्मीला न कहें यदि आपका बच्चा शर्मीला है, तो उसे बात-बात पर शर्मीला न कहें बल्कि अपने बच्चे को सहारा दें। बच्चे के डर को समझें और झिझक छोडऩे में उनकी मदद करें।


2-अभिव्यक्ति के लिए प्रोत्साहित
स्वयं की अभिव्यक्ति के लिए बच्चों को सही शब्दों का प्रयोग करना सिखाएं। जब बच्चे अपनी व्यक्तिगत इच्छाएं बताते हैं, तभी वे दूसरों के साथ आसानी से घुल मिल सक ते हैं।

3-खुली चर्चा करें -माता-पिता को बच्चे से चर्चा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए, ताकि वो जब चाहे अपनी परेशानियों पर उनसे चर्चा कर सकें । बच्चे के लिए हमेशा उपलब्ध रहें, ताकि उसे अकेलापन महसूस न हो।

4-बीती बातों की चर्चा करें
कभी-कभी बच्चों के साथ बैठकर उन्हें बीती बातों के बारे में समझाएं। बातों का ध्यान इस पर न रखें कि बच्चा क्या नहीं कर पाया, बल्कि उन बातों पर रखें कि बच्चा क्या कर पाया। चर्चा करते हुए उन्हें बताएं कि वो इसे और अच्छे तरीके से कैसे कर सकते थे। 

5-दृढ़ रहने का प्रशिक्षण
बच्चे को आक्रामकता और अपनी बात पर अडिग रहने में अंतर करना सिखाना चाहिए। साथ ही बच्चे में आत्मविश्वास विकसित करने में मदद करनी चाहिए, ताकि वो अपनी बात सही ढंग से कह सके।

 

6-भावनाओं को वश में करना- बच्चे को भावनाओं को प्रभावशाली तरीके से नियंत्रित करना सिखाएं। यह ऐसी योग्यता है, जो न केवल सामाजिक व्यवहार के लिए जरूरी है, बल्कि शारीरिक और मनोवैज्ञानिक विकास भी करती है। इससे बच्चों को ऊर्जा का सकारात्मक
प्रयोग करने में मदद मिलती है।

7-भावनाशीलता विकसित करें
अन्य लोगों के प्रति सकारात्मक भावनाएं रखने और उनके दृष्टिकोण से सोचने की सामथ्र्य  विकसित करने से बच्चे का सही सामाजिक  विकास होता है। बच्चों को यह कहानियों, उदाहरणों से प्रोत्साहित करके सिखाएं।

8-सामाजिक कहानियों का प्रयोग
बच्चों को खूब सामाजिक कहानियां सुनाएं। कहानियों के माध्यम से बच्चा न केवल विभिन्न सामाजिक कलाओं के बारे में सीखता है, बल्कि घुलने मिलने में आ रही परेशानियों की चर्चा भी करता है।

9-रोल मॉडल- बच्चों के मन नाजुक होते हैं, वो लोगों के व्यवहार को देखकर परोक्ष रूप से सीखते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप बच्चों के लिए रोल मॉडल की भांति व्यवहार करें, जिनसे वो अपने सामान्य व्यवहार में आपका अनुसरण कर सके।

10-अभ्यास के अवसर दें
यदि बच्चा शर्मीला है और ऐसी स्थितियों से बचता है, जिनमें उसे बात करनी ही पड़े तो बच्चों को इसके अभ्यास के लिए प्रेरित करें। बच्चों को ऐसे पर्याप्त अवसर दें, ताकि वो न केवल अपनी उम्र के लोगों के बीच, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी इन्हें आजमा सके।

11-बच्चे पर दबाव न बनाएं- बच्चे पर किसी सांचे में ढ़लने या अन्य मिलनसार बच्चों की भांति व्यवहार करने का दबाव न बनाएं, बल्कि उन्हें इन कलाओं का विकास करने की प्रेरणा दें, ताकि वह जीवन के अनुरूप ढ़लना सीख सकें । 

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