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मस्ती और स्वादिष्ट परंपरा है मकर संक्रांति और लोहड़ी

शेफ हरपाल

12th January 2016

मकर संक्रांति हिंदुओं का एक ऐसा त्योहार है जो भारत और नेपाल के लगभग सभी हिस्सों में मनाया जाता है। यह फसल से जुड़ा हुआ त्योहार है। हिंदुओ के अलग-अलग त्योहार अलग अलग तिथियों के आधार पर मनाए जाते हैं जबकि मकर संक्रांति हर वर्ष 14 जनवरी को मनाई जाती है।

मस्ती और स्वादिष्ट परंपरा है मकर संक्रांति और लोहड़ी

शेफ कॉर्नर

 

मकर संक्रांति का पर्व मनाने के पीछे मान्यता है कि सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इसे बसंत के आगमन के तौर पर भी देखा जाता है जो पूरे भारत में अलग-अलग नाम से जाना जाता है और जिसे लोग हर्षोल्लास से मनाते हैं। जैसे पंजाब में संक्रांत की शाम और ‘लोहड़ी' के नाम पर मनाते हैं। अगले दिन संक्रांत को माघी के तौर पर। असम में यह त्योहार भोगाली बिहू के नाम पर मनाते हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में इसे खिचड़ी संक्रांति का नाम मिला है। कर्नाटक में पोंगल और गुजरात में उत्तरायन के नाम से त्योहार धूम-धाम से मनाया जाता है।

अलग-अलग नाम के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में पारंपरिक अंदाज में इस त्योहार को मनाया जाता है। विभिन्न क्षेत्रों में इसे मनाने के पारंपरिक तौर-तरीके बेहद खास होते हैं। जैसे पंजाब में संक्रांत की शाम लकड़ियों के विशाल अलाव जलाए जाते हैं जिसे लोहड़ी का नाम दिया जाता है। मिठाईयां, गन्ना और चावल अलाव में फेंके जाते हैं और आग के चारो ओर दोस्त और रिश्तेदार मिलकर इस त्योहार को मनाते हैं। 

अगले दिन संक्रांत को माघी के रूप में मनाते हैं। इस दिन भांगड़ा डांस होता है जो कि पंजाबियों का प्रसिद्ध डांस है और बेहतरीन पकवान का जायका लेते हैं जिसमें सरसों का साग और मक्के की रोटी को अव्वल दर्जा दिया जाता है। मुझे बचपन के दिन याद हैं जब मैं और मेरे दोस्त इस त्योहार के आने का बेसब्री से इंतजार करते थे ताकि हमें मां के हाथों का मजेदार और लजीज खाना मिलेगा। साथ ही डांस-मस्ती के साथ लोहड़ी को इंजॉय करते थे। सचमुच उन दिनों की बहुत याद आती है।  
 
उत्तर प्रदेश में इस दिन नदी में पवित्र स्नान किया जाता है। वास्तव में इस दिन स्नान करना जरूरी होता है और प्रदेश के स्थानीय नागरिक ऐसा मानते हैं कि मकर संक्रांति के दिन जो स्नान नहीं करता वह अगले जन्म में गधा  के रूप में जन्म लेता है। इस दिन लोग खिचड़ी का जायका लेते हैं और खिचड़ी का दान भी करते हैं। कुछ लोग इस त्योहार को खिचड़ी संक्रांति के नाम से भी पुकारते हैं। इसके अलावा गरीब और जरूरतमंद लोगों को चावल और मसूर की दाल का दान करते हैं। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में गंगा,यमुना और सरस्वती के संगम किनारे  विशाल स्तर पर मेला आयोजित होता है जहां भारी मात्रा में लोग जुटते हैं। चूंकि यह माघ महीना होता है इसलिए इस मेले को माघ का मेला भी कहा जाता है।   

महाराष्ट्र में इस दिन स्पेशल डिश तिलगुड़ और लड्डू बनाए जाते हैं जो कि गुड़ और तिलों के बने होते हैं। यह इस सीजन का सबसे प्रसिद्ध और मुख्य फसल है। लोग इस मिठाई को को एक दूसरे को देते हैं और बोलते हैं ‘तिल गुड़ घया, गोड गोड बोला' इसका अर्थ है कि आपके तिल गुड़ को हम स्वीकार करते हैं । इस दिन महाराष्ट्रियन महिलाएं विशेष तौर पर काले रंग की साड़ियां पहनती हैं जिन्हें चंद्रकला साड़ी कहा जाता है जिसमें चंद्रमा की उभरती हुई डिजाइन होती है  और शादीशुदा महिलाएं एकजुट होकर तिलगुड़ को एक दूसरे को देती हैं जिसे हल्दी कुनकू कहा जाता है।  

गुजरात में इस दिन लोग बड़े तादाद में सूर्य की तरफ रंग-बिरंगी पतंग उड़ाकर इस त्योहार को मनाते हैं। उनकी मान्यता है कि यह ईश्वर को प्रसन्न रखने का एक बेहतरीन तरीका है। मकर संक्रांति के पर्व पर कई तरह के मेलों का आयोजन होता है। इनमें कुंभ मेला सबसे बड़े स्तर पर आयोजित होता है जो कि हर 12वें वर्ष पर चार पवित्र स्थानों पर आयोजित किया जाता है। 

प्रयाग: उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में प्रयाग पर जहां तीन पवित्र नदियों गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है। 

हरिद्वार: उत्तर प्रदेश के हरिद्वार में जहां गंगा नदी हिमालय से होती हुई हरिद्वार में प्रवेश करती है 

उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे 

नासिक: महाराष्ट्र के नासिक में गोदावरी नदी के किनारे

कुंभ का मेला इन चार पवित्र स्थानों पर हर 12वें वर्ष पर आयोजित होता है। हर 12वें वर्ष पर प्रयाग में महाकुंभ मेले का आयोजन होता है जहां देश-विदेशों से लाखों की तादाद में श्रद्धालु जुटते हैं। माघ मेला या छोटा कुंभ मेला हर वर्ष प्रयाग होता है। गंगासागर मेला गंगा के किनारे, तुसू मेला झारखंड और पश्चिम बंगाल में, मकर मेला उड़ीसा में आयोजित होते हैं। 

तो आप भी इन त्योहारों को अपने परिवार, मित्र और रिश्तेदारों के साथ मनाकर आनंद लें।