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महिलाओं के लिए इनवेस्टमेंट गाइड

ऋचा कुलश्रेष्ठ

22nd January 2016

बचत महिलाओं ही नहीं, सभी के लिए जरूरी है। अनेक परिस्थितियों में आपको पैसे की जरूरत हो सकती है, जैसे घर की खरीदारी, बच्चों की पढ़ाई, शादी इत्यादि। अपनी आय का एक छोटा सा हिस्सा बचाते रहने से आपको फायनेंशियल सुरक्षा भी मिलती है। मनी स्मार्ट पुस्तक की लेखिकाओं और आर्थिक विषयों की विशेषज्ञ दिव्या विज और रीनिता मलहोत्रा होरा से हमने जाने बचत और निवेश से जुड़े कई राज।

 

ज्यादातर घरेलू महिलाओं का रुझान बचत की ओर न होकर खर्च करने पर होता है। उन्हें लगता है कि उन्हें अपने पति से पैसा हमेशा इसी तरह मिलता ही रहेगा। जो महिलाएं खुद नहीं कमाती, वे अपने वित्तीय और कानूनी निर्णयों के लिए अपने पिता या पति पर ही निर्भर रहती हैं जो ठीक नहीं होता। महिलाएं वित्तीय मामलों से खुद को अलग रखना चाहती हैं। ऐसे में अगर उन पर कोई विपत्ति आ जाती है, जैसे तलाक या पति की मौत तो तब उन्हें वित्तीय समस्याओं से जूझना पड़ता है। ऐसी स्थिति किसी के भी साथ आ सकती है, इसलिए बेहतर है कि अभी से बचत की जाए ताकि जरूरत के समय आपको किसी के सामने हाथ न फैलाने पड़ें। खासतौर पर ऐसी महिलाओं के लिए जिनके पास आय का कोई नियमित साधन नहीं है, फायनेंशियल बैकअप होना बेहद जरूरी है।

 किसके लिए जरूरी है बचत

बचत करना सभी के लिए जरूरी है। कामकाजी महिलाएं जानती हैं कि पैसा जिंदगी भर नहीं आता। जब आप काम नहीं कर पाएंगे, आपके पास जरूरत का पैसा होना चाहिए। इसके लिए सिर्फ महिला को ही नहीं, बल्कि पति-पत्नी को मिल जुलकर बचत करनी चाहिए। कामकाजी महिला के पास नियमित आय होती है जबकि गृहिणी के साथ ऐसा नहीं है। इन दोनों ही परिस्थितियों में भविष्य के लिए बचत करना बेहद जरूरी है।

किस बैंक में खोलें बचत खाता
सभी बैंकों के पास सेविंग्स एकाउंट होते हैं। बचत के लिए स्टेट बैंक हो या प्राइवेट बैंक, सभी एक जैसे हैं। उनके बोनस और सुविधाएं अलग हो सकते हैं, इंटरेस्ट रेट अलग हो सकते हैं लेकिन सिद्धांत एक ही है। बैंक एकाउंट के लिए सुविधाओं की तुलना जरूर करें। कुछ बातों का ध्यान रखते हुए आप निर्णय ले सकते हैं। जैसे-

  • अपने घर से बैंक की नजदीकी क्योंकि आपको कभी भी बैंक जाना पड़ सकता है।
  • बैंक के एटीएम कहां और कितने हैं। आप दूसरे बैंक के एटीएम से भी पैसा निकाल सकते हैं लेकिन उसकी सीमा होती है।
  • अपनी जरूरत जैसे लॉकर, कैश डिलीवरी इत्यादि सुविधाओं के बारे में भी जांच लें।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इनवेस्टमेंट प्लान
जिंदगी के अलग-अलग समय में हर महिला की निवेश जरूरतें अलग-अलग होती हैं। जब आप सिंगल होते हैं तब आपको न वर्तमान की चिंता होती है न भविष्य की। अपने हल्के-फुल्के खर्च को मैनेज करना होता है। बचत की चिंता नहीं होती। ऐसे में आप इनवेस्टमेंट में रिस्क ले सकते हैं।
शादी के बाद स्थितियां बदल जाती हैं। घर की जिम्मेदारियां, बजट, लोन, मेडिकल इंश्योरेंस और बच्चों के पैदा होने के बाद स्कूल और दूसरे खर्चे धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं। इस वक्त आपको लांग टर्म और ज्यादा सुरक्षित इनवेस्टमेंट प्लान की जरूरत होती है जैसे गोल्ड, प्रॉपर्टी और बॉन्ड्स।
फिर जब आपके बच्चे बड़े और किशोर होते हैं, तब उनकी उच्च शिक्षा के लिए आपको पैसे की जरूरत होती है। ऐसे में जरूरत होती है कि एक तय राशि आती रहे ताकि आप चाहें तो नौकरी छोड़ सकें। आप नहीं चाहते कि आपकी मानसिक शांति आपके पास हर महीने आने वाले सेलरी चेक सुनिश्चित करें।

निवेश
आपका निवेश बैलेंस होना जरूरी है। इसमें इक्विटी, फिक्स इनकम, कुछ कैश और कुछ गोल्ड हो। समय के साथ इनमें कुछ ऑल्टरनेटिव एसेट्स और जोड़ते जाना चाहिए जैसे प्रॉपर्टी, आर्ट और ऑनलाइन इनवेस्टमेंट। मिक्स पोर्टफोलियो हमेशा बेहतर रहता है क्योंकि इसमें कम रिस्क होता है। यानी ट्रेडीशनल इनवेस्टमेंट जैसे फिक्स डिपॉजिट, पीपीएफ और कुछ दूसरा जैसे म्यूचुअल फंड, इक्विटी और प्रॉपर्टी इत्यादि।

प्रॉपर्टी में निवेश
प्रॉपर्टी में इनवेस्टमेंट का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि लोग बिना मूल बातें जाने प्रॉपर्टी खरीद लेते हैं कि इसकी लोकेशन कैसी है, बिल्डर कौन है इत्यादि। आपको प्रॉपर्टी बाजार पर भी नजर रखनी होगी ताकि बाजार के गिरने से पहले ही आप अपनी प्रॉपर्टी बेच सकें और आपको अच्छा रिटर्न भी मिल सके।

जमीन में निवेश
जमीन खरीदना एक बेहतरीन निवेश है लेकिन तब, जब यह एक अच्छी लोकेशन पर हो। जमीन का रिटर्न इस पर भी निर्भर करता है कि आप कितने समय तक इसे अपने पास रोककर रखना चाहते हैं या तुरंत बेच देना चाहते हैं।

फ्लैट में निवेश
फ्लैट खरीदते वक्त आपको सुनिश्चित करना जरूरी है कि वह एरिया सुरक्षित है या नहीं और वहां कितनी सुविधाएं हैं जैसे स्कूल, पब्लिक ट्रांसपोर्ट इत्यादि। फ्लैट खरीदने से पहले आपको तय करना होगा कि आप इसे कितने समय तक अपने पास रखना चाहते हैं और खुद रहना है या किराये पर देना है। आमतौर पर फ्लैट से जो किराया मिलता है वह उसकी मूल वैल्यू से बहुत कम होता है इसलिए बेचने से जितना फायदा मिलता है, उतना किराये से नहीं मिलता है।

दुकान में निवेश
दुकान या अन्य कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदते वक्त आपको सुनिश्चित करना होता है कि वहां लोग आएंगे या नहीं। यही बातें प्रॉपर्टी की कीमत को बढ़ाती या घटाती हैं। बिल्डर का नाम सुनिश्चित करता है कि आप जिस प्रॉपर्टी में इनवेस्ट कर रहे हैं, वह आपको समय पर मिलेगी या देर से या मिलेगी भी कि नहीं। कहीं ऐसा न हो कि आपका पूरा पैसा ही डूब जाए। जैसे पहले से चल रहे बाजार या मॉल हो तो ऐसी जगह दुकान खरीदना फायदे का सौदा हो सकता है। लेकिन किसी नई मॉल में दुकान खरीदना खतरनाक हो सकता है।

 

इक्विटी में निवेश
इक्विटी में निवेश गृहणियों के लिए लांग टर्म में पैसा कमाने का एक बेहतरीन साधन हो सकता है लेकिन तभी जब आप रिस्क लेने को तैयार हों और लंबे समय तक अपने इनवेस्टमेंट को बनाए रखें। साथ में मार्केट में रोज के उठान और गिरावट पर गहरी निगाह होनी जरूरी है। आमतौर पर इक्विटी में ठीक-ठाक रिटर्न आपको कम से कम पांच साल बाद मिलता है। इक्विटी में निवेश कर आप सिर्फ पैसे बढ़ाते या घटाते ही नहीं हैं, बल्कि एक कंपनी का हिस्सा खरीदते हैं। बेहतर होगा कि आप इक्विटी की गहन जानकारी करने के बाद ही इसमें निवेश करें।

 

स्वर्ण में निवेश
सोने में निवेश कभी-कभी फायदे का सौदा होता है तो कभी नुकसान दे देता है। खासतौर पर भारत की महिलाओं के लिए यह किसी बड़ी संपत्ति से कम नहीं होता। दुनिया में भारत की महिलाएं सोने की सबसे बड़ी खरीदारों में गिनी जाती हैं। मुश्किल यह है कि सोना आपको कोई डिविडेंड या इंटरेस्ट नहीं देता। यह तभी आपको फायदा देता है जब आप इसे बेचते हैं लेकिन तब भी बनवाई के रूप में कुछ नुकसान होता है। सोने में सीधे निवेश से बेहतर इसके फंड खरीदना है। जैसे ईटीएफ। यह सोने के भाव के ही अनुसार उठता और गिरता है।

 

म्यूचुअल फंड में निवेश
बाजार में अलग-अलग तरह के म्यूचुअल ह्रश्वलान उपलब्ध हैं। कुछ इक्विटी पर आधारित होते हैं तो कुछ डेट सिक्योरिटी पर। किसमें निवेश करना बेहतर होगा, यह आपकी जरूरत और प्राथमिकता पर निर्भर करता है। यह तय करने के लिए आपको अपने इनवेस्टमेंट एडवाइजर से बात   करनी चाहिए। यह देखना भी जरूरी होता है कि किस फंड का रिकॉर्ड कैसा रहा है।

यूं निवेश की जरूरत आपको शुरू से ही होती है, बाद में लगता है कि काश, पहले से बचत की होती तो आज आप ज्यादा सुरक्षित होते। यह सब आपकी अपनी प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। प्राथमिकता जरूरत की, प्राथमिकता रिस्क लेने की, और प्राथमिकता रिटन्र्स पाने की।

 

 

 

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