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समस्या का समाधान आरंभ से करो

डॉ. किरण बेदी

10th May 2016

समस्या का समाधान आरंभ से करो

 

 

महिला पुलिसकर्मियों को पुलिस स्टेशनों में अलग टॉयलेट और रेस्ट रूम की आवश्यकता है तथा पुलिस कॉलोनियों में क्रेच की सुविधाएं भी होनी चाहिए। उन्होंने मिलकर यह बात बता दी है कि पोस्टिंग नियमों में उनके साथ नाइंसाफी हो रही है।

कुछ वर्ष पहले सभी रैंक की महिला पुलिसकर्मियों ने दिल्ली में एक राष्ट्रीय सभा का आयोजन कर एक इतिहास रचा। स्वतंत्र भारत को ऐसे आयोजन के लिए 54 वर्षों का समय लगा। यह आयोजन ब्रिटिश काउंसिल ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (गृह मंत्रालय), पंजाब, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश के डी.जी.पी. के दो वर्ष के परिश्रम का परिणाम था। रीना मित्रा, अनिता पुंज, चारू, मालिनी, तेजदीप, श्रीदेवी और ऐसी ही अनेक आईपीएस अधिकारियों ने महिला पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण में एक विलक्षण भूमिका निभाई।

मेरे इस कथन के एक से अधिक अर्थ होते हैं, कि महिला पुलिसकर्मी इतिहास बनाती हैं। सर्वप्रथम सभी रैंक की लगभग 350 महिला पुलिसकर्मियों  का बिना किसी रीतिगत सोच के एक स्थान पर होना एक बड़ी उपलब्धि है। इनमें से 94 प्रतिशत महिलाकर्मी नॉन गजेटिड रैंक की थीं। तीन दिन का ऐसा आयोजन, जहां सब रैंक के प्रतिनिधियों की परस्पर बातचीत हो और सबकी बात बराबरी से सुनी जाए, देश की पुलिस सर्विस संस्कृति में अप्रत्याशित और ऐतिहासिक घटना थी।

 

 

 

ऐसा शायद इसलिए था क्योंकि पुरुष रीतिगत रूप से आक्रामक होते है। पुरुष पुलिसकॢमयों को लचीले ढंग की नहीं बल्कि नियंत्रण की आदत होती है। इसलिए वरिष्ठ पुरुष सहभागी अपने निम्नकर्मियों  की प्राय: नहीं सुनते।


इसके ऐतिहासिक होने का दूसरा कारण इसका आयोजन स्थल दिल्ली का विज्ञान भवन होना था जहां पिछली दो डी.जी.पी. और आई.जी.पी. की वाॢषक सभाओं का आयोजन इंटेलिजेंस ब्यूरो और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन द्वारा किया गया था। यह पहला अवसर था, जब जूनियर रैंक की पुलिसकर्मी उन्हीं कुर्सियों, उसी हाल और उसी मंच पर बैठी थीं, जहां देश के तत्कालीन गृहमंत्री माननीय एल.के. आडवाणी उनकी बात सुन रहे थे। यहां वह गर्माहट जोश और अपनापन था, जो डी.जी.पी.ओ. वाली सभा में देखने को नहीं मिलता।

ऐतिहासिक होने का तीसरा कारण है महिला पुलिसकर्मियों ने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन वह एकसाथ बैठकर अपने लिए बोल सकती हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा में अपनी भूमिका का विषय उठा सकती हैं।


चौथा कारण, इसके ऐतिहासिक होने का यह है कि यहां आने से पहले सभी ने क्षेत्रीय समागमों और भारतीय पुलिस सेवाओं की महिला अफसरों के तीन माह के व्यक्तिगत विकास कार्यक्रम में भाग लिया था जिसका आयोजन ब्रिटिश काउंसिल ने एक अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्ध प्रशिक्षण ग्रुप स्प्रिंगबोर्ड इनकॉर्पोरेशन के सहयोग से किया था।


पांचवी विशेष बात यह कि महिला पुलिसकर्मियों ने अब उन चीजों के लिए एकसाथ आवाज उठानी आरंभ कर दी है, जिनकी उन्हें आवश्यकता है। यह कहने में उन्हें इतना समय लगा कि उन्हें पुलिस स्टेशनों में अलग टॉयलट, रेस्ट रूम और पुलिस कॉलोनियों में क्रेच की सुविधाएं चाहिए। उन्होंने एकसाथ मिलकर यह बात बता दी कि पोस्टिंग नियमों में उनके साथ नाइंसाफी हो रही है और उन्हें हाशिए पर रखा जा रहा है।

छठा कारण यह है कि महिला पुलिसकर्मियों ने अपनी आवाज उठाने और सबको बांधकर रखने के लिए एक अंतरिम फोरम की घोषणा व स्थापना की। उस समय तत्कालीन गृहमंत्री श्री आडवाणी ने उन ऐतिहासिक क्षणों में भाग लेने के लिए स्वयं को गौरवान्वित महसूस किया। 'अभिसरण' की इस शक्ति को पहचानते हुए उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों को उनका उचित स्थान दिया कि डी.जी.पी. आयोजनों की तरह इसका आयोजन भी प्रत्येक वर्ष होना चाहिए।

आयोजन की एक बड़ी उपलब्धि ब्रिटिश पुलिस के चीफ सुपरिंटेंडेंट सुज़ेट डेवनपोर्ट की उपस्थिति थी। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे इंग्लैंड में महिला पुलिसकर्मियों ने एक लंबा रास्ता तय कर लिया है और अब वे अपने पुरुष साथियों के साथ बराबर की भागीदार हैं। उन्होंने एक ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ वूमैन पुलिस की स्थापना की है जिसमें उन्होंने कुछ संवेदनशील पुरुषों को भी शामिल किया है। डेवनपोर्ट का कहना था कि ऐसी विज़न एक महिला कांस्टेबल टीना मार्टिन की थी जिन्होंने दशकों पहले इस लहर को आरंभ किया।

सुज़ैट का कहना था, 'स्मरण रहे, मित्रों! आपकी स्थिति वही है जो हमारी 60 के दशक में थी। हम जानते थे कि एक बड़ी समस्या हमारे सामने है और उसका मुकाबला कर हमें आगे निकलना है। स्प्रिंगबोर्ड प्रशिक्षक जैनी डैज़ली ने कहा, 'स्मरण रहे कि आपको इन समस्याओं को एक-एक कर समाप्त करना है। मैंने सुझाव देते हुए कहा, 'इस समस्या का समाधान आरंभ से करो। मेरी बात पर जैनी ने कहा, 'ध्यान रखें कि कहीं यह बड़ी समस्या आपको चोट न पहुंचाए। 

इसकी प्रक्रिया के रूप में सभी ने एक स्वर में चिल्लाकर कहा, 'अब और नहीं, हमने हाथी रूपी समस्या को साधने का प्रशिक्षण ले लिया है। और इस तरह से महिला दिवस पर दिखाई देने वाले इतिहास की रचना हो गई।

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