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जाएं 'पचमढ़ी' एक रोमांचक छुट्टी के लिए...

ऋचा कुलश्रेष्ठ

13th May 2016

सतपुड़ा का घना जंगल, हरे-भरे पर्वत, अद्भुत जल प्रपात और खुशनुमा मौसम.... यह सब कुछ आपका इंतज़ार कर रहा है सतपुड़ा की रानी कहलाने वाली पचमढ़ी में।

जाएं 'पचमढ़ी' एक रोमांचक छुट्टी के लिए...

 


भारत के हृदय प्रदेश की सबसे हरी-भरी मणि मंजूषा पचमढ़ी को प्रकृति ने अपनी सुन्दर छटा असंख्य मोहक रूपों में प्रदान की है। सतपुड़ा पर्वत श्रंखलाओं की इस नयनाभिराम पहाड़ी सैरगाह में हर सुबह नई सी होती है। चारों ओर से कल-कल बहते झरनों की मंद-मंद ध्वनि मन को प्रफुल्लित कर देती है। जंगली बांस, जामुन एवं आम के उपवन, साल वृक्षों के सघन वन, महुआ, आंवले, गूलर के वृक्षों की कतारें मिलकर पचमढ़ी को बहुरंगी और निराली शोभा प्रदान करते हैं। पचमढ़ी की घाटी, गिरिकंदराओं की भूल भुलैयों का निर्माण प्रकृति ने युगों पूर्व किया है। सूरज की धूप में प्रपातों का जल रजत के समान दिखाई देता है। गहरे नीलवर्णी पोखर, यहां की हरी-भरी नदियां इनमें बसने वाले वन्य जीव, लंगूर, सांभर, गौर, रीछ, चीते एवं विभिन्न प्रकार के पक्षी सैलानियों और पर्यटकों को अपने पास आने का मौन निमंत्रण देते हैं। पचमढ़ी पुरातात्विक वस्तुओं का खजाना है। महादेव पहाड़ियों के शैलाश्रयों में शैल चित्रकारी की बहुलता है। इनमें ज्यादातर चित्रों का काल 500 से 800 ईसवी के बीच का माना गया है परन्तु प्रारंभिक चित्रकारी दस हजार वर्ष पुरानी होने का अनुमान है।

दर्शनीय स्थल  

  • प्रियदर्शिनी - 1857 ईसवी में बंगाल की अश्वरोही सेना के एक दस्ते के मुखिया के रूप में कैप्टन फोर साइथ यहां आये। उन्होंने तश्तरी के आकार जैसे इस स्थान पर अप्रतिम सौंदर्य देखा था। मूल रूप में यह स्थल उन्हीं के नाम से जाना जाता है।
  • हांडी खोह - 300 फुट ऊंची यह प्रभावोंत्पादक घाटी खड़ी चट्टान के रूप में है। यहां एकांत में बैठकर दूर से बहते जल का स्वर मन को आनंदित कर देता है।
  • अप्सरा विहार - यह छोटा स्थल सरोवर है। इसे परी सरोवर के नाम से भी जाना जाता है।
  • रजत प्रताप - जिन्हें साहसिक कारनामों में रूचि है वे चट्टानों एवं पथरीले मार्गों से चलकर इस प्रपात तक पहुंच सकते हैं। 350 फुट से नीचे गिरते हुए इस झरने को देखना सचमुच में आल्हादकारी हैै।
  • राजगिरि - यह स्थान 300 फुट ऊंचा है। जहां से पचमढ़ी का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
  • जलावातरण - (डचेस फॉल), वैली व्यू से 3 कि.मी. दूर इस जलप्रपात में तीन जलधाराएं हैं, पचमढ़ी के जल प्रपातों में सबसे सुरम्य स्थल है।
   जटाशंकर मंदिर, पचमढ़ी
 
  • जटाशंकर - जम्बूदीप प्रवाह का उद्गम स्थल, कहा जाता है कि भगवान महादेव राक्षस राजा भस्मासुर से बचने के लिये इस स्थान पर तिलक सिंदूर से एक सुरंग में से होकर पहुंच थे। शिव जटाओं के समान दिखने वाली यहां की चट्टानों के कारण इसका नाम जटाशंकर पड़ा। 

 

  • छोटा महादेव - यह पवित्र स्थल है जहां एक जल प्रवाह और छोटे झरने के ऊपर चट्टानें लटकी सी प्रतीत होती है।
  • बड़ा महादेव - पहाड़ी की पूर्व दिशा की ओर एक श्रेष्ठ शैलाश्रय है जिसमें भगवान शिव की सुन्दर मुर्ति एवं शिवलिंग स्थापित है।
  • चौरागढ़ - सतपुड़ा पर्वत माला का प्रमुख स्थान जो महादेव से चार कि.मी. है। इस पवित्र शिखर पर शिव पूजा के प्रतीक त्रिशूल चढ़ाये जाते हैं।
  • धूपगढ़ - सूर्य का अस्ताचल बिन्दु है, यहां से डूबते सूर्य एवं समीपवर्ती पर्वत श्रृंखलाओं का दृश्य बड़ा मनोहारी है।
  • पांण्डव गुफाएं - यह वही गुफाएं हैं जिनके कारण इस स्थान का नाम पचमढ़ी हुआ। जनश्रुति के अनुसार पांडवो ने अपने निर्वासन काल का कुछ समय यहां बिताया था।
  • अन्य दर्शनीय स्थल - लांजी गिरि, आइरीन सरोवर, गुफा समूह, धुआंधार, भ्रांतनीर (डोरोथी डीप) अस्ताचल, बीना वादक की गुफा (हार्पर केव) एवं सरदार गुफा।

 

कैसे पहुंचें

वायु सेवा - निकटतम हवाई अड्डा, भोपाल (210) कि.मी.

रेल सेवाए - मुम्बई- हावड़ा मुख्य मार्ग पर पिपरिया (50) कि.मी.

सड़क मार्ग - भोपाल, होशंगाबाद, नागपुर, पिपरिया, छिंदवाड़ा से नियमित बसें एवं टैक्सियां उपलब्ध हैं।

कहां ठहरें अमलतास, ग्लेन व्यू, हिलटॉप बंगलो, रॉक एण्ड मैनार, होटल हाईलैण्ड, पंचवटी, सतपुड़ा रिट्रीट, चंपक बंगलो, वुडलैण्ड बंगलो (सभी मध्यप्रदेश पर्यटन की इकाईयां) 

 

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