GREHLAKSHMI

FREE - On Google Play
OPEN

बॉलीवुड में रवीना टंडन का 25 साल का सफर

रवीना टंडन गेस्ट एडिटर

17th August 2019

एक ओर जहां फिल्म जगत की प्रसिद्ध अभिनेत्री रवीना टंडन ने बॉलीवुड में अपने सफर के 25 साल पूरे कर लिए हैं, वहीं महिलाओं की पत्रिका गृहलक्ष्मी भी इस महीने अपने 25 साल पूरे कर रही है। इस खुशी के मौके पर रवीना टंडन ने गृहलक्ष्मी की गेस्ट एडिटर का पद स्वीकार किया है। यहां अर्पणारितेश यादव बॉलीवुड की सफल अभिनेत्री रवीना के व्यक्तित्व के अनेक खूबसूरत पहलुओं से आपको रूबरू करवा रही हैं-

बॉलीवुड में रवीना टंडन का 25 साल का सफर

बॉलीवुड में मशहूर रवीना टंडन को शहर की लड़की, मस्त-मस्त गर्ल जैसे उपनामों से ऐसी अभिनेत्री के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने अपने बिंदास अभिनय से दर्शकों को दीवाना बनाया। 43 साल की उम्र में भी खूबसूरत और चुस्त दिखाई देती हैं। उन्होंने करीब साढ़े पांच दर्जन हिन्दी फिल्मों में काम किया और कई पुरस्कार जीते। फिल्मों के साथ ही रवीना ने इसी का नाम जिंदगी टीवी रियलिटी शो की एंकरिंग भी की है। हाल ही में उन्होंने अनुराग कश्यप की फिल्म 'बॉम्बे वेलवेट में एक जैज़ सिंगर की भूमिका अदा की। इतनी छोटी सी भूमिका में भी रवीना ने दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। इससे इस बात का पता चल गया कि आज भी रवीना का जलवा बरकरार है। अपनी चमक को कायम रखने वाली इस अदाकारा के इस खूबसूरत व्यक्तित्व का राज आखिर क्या हैं? आइए जरा एक नजर डालते हैं।

 

 

 

सफर की शुरूआत
रवीना का जन्म 26 अक्टूबर 1974 को मुंबई में हुआ। पिता रवि टंडन और मां वीणा टंडन के नाम को मिलाकर उनका नाम रवीना रखा गया। रवीना को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनके पिता जाने माने फिल्म निर्माता थे। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा मुंबई के जमनाबाई स्कूल से पूरी की। मुंबई
के मशहूर मिट्ठीभाई कॉलेज में उनकी मुलाकात निर्देशन शांतनु शोरी से हुई। उन्होंने रवीना टंडन को फिल्मों में काम करने की सलाह दी। कॉलेज की पढ़ाई छोड़ रवीना टंडन ने फिल्मों का रुख किया। रवीना ने अपने फिल्मीकरियर की शुरूआत वर्ष 1991 में प्रदर्शित फिल्म 'पत्थर के फूल से की। हालांकि यह फिल्म टिकट खिड़की पर सफल नहीं हो सकी, लेकिन रवीना के अभिनय
को दर्शकों ने काफी सराहा। इसके बाद उन्हें 1994 में 'मोहरा और 'दिलवाले जैसी सुपरहिट फिल्में करने का मौका मिला, जहां उन्होंने अपनी अदाकारी का जमकर प्रदर्शन किया। इन दो फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड की टॉप अदाकाराओं में
लाकर खड़ा किया। 1995 में फिल्म 'अंदाज अपना-अपना और 'जमाना दीवाना, साल 1996 और 1997 में रवीना टंडन ने 'खिलाडिय़ों का खिलाड़ी और 'जिद्दी जैसी सफल फिल्में कीं। इसके बाद 'घरवाली बाहरवाली, 'आंटी नंबर वन और 'दुल्हे राजा जैसी फिल्मों की वजह से उनका क्रेज कम होने लगा। लेकिन 'शूल, 'बुलंदी और 'अक्स जैसी आर्ट फिल्मों से रवीना दोबारा सफलता की सीढ़ी चढऩे लगी। 'अक्स के लिए उन्हें फिल्मफेयर स्पेशल
परफॉर्मेंस अवॉर्ड भी मिला। साल 2001 में आई फिल्म 'दमन में शानदार अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। सिर्फ बड़े परदे पर नहीं
बल्कि रवीना छोटे परदे पर भी सक्रिय रही हैं और अपना जलवा कायम रखते हुए टीवी पर सर्वाधिक कमाई करने वाली अभिनेत्री बन गई हैं।

 



मेरा जीवन सर्वश्रेष्ठ
करीब 13 साल तक फिल्मों में काम करने के बाद रवीना ने 22 फरवरी 2004 में अनिल थडानी से शादी की। इस बारे में रवीना कहती हैं कि जब
मैं अनिल थडानी से मिली, वह मेरी जिंदगी का सबसे हसीन पल था। वैसे मेरी जिंदगी हमेशा से उतार-चढ़ाव भरी रही है। अनिल ऊपर वाले की नेमत हैं। उन्होंने मुझे मुश्किल वक्त से लडऩे की हिम्मत दी है। मैं जैसी जिंदगी चाहती थी, उस लिहाज से मेरा जीवन सर्वश्रेष्ठ है। आज मेरे पास बेहद केयरिंग पति हैं और दो प्यारे से बच्चे हैं। जब बनी सिंगल मदर रवीना ने बहुत कम उम्र में दो लड़कियों को गोद लिया था। आखिर इतनी छोटी उम्र में इतनी बड़ी
सोच कहां से आई इस बारे रवीना कहती हैं कि यह सच है कि 21 साल की उम्र में दो बेटियों को अडॉप्ट किया था। इनमें से बड़ी बेटी पूजा की शादी 2011 में की और अभी जनवरी में छोटी बेटी छाया की शादी की है। यह सब आपकी अपब्रिंगिंग और संस्कार से आता है। बचपन से ही मम्मी को अनाथालय जाते देखती थी। आपकी सोच में मां का बहुत बड़ा रोल होता है। हम बचपन में जो देखते सीखते हैं वही बड़े होकर करते हैं। मेरे पास एक जमीन है, जिसमें मैं अनाथालय, हॉस्पिटल या जानवरों का अस्पताल बनाना चाहती हूं। यह मेरी ख्वाहिश है, जो एक न एक दिन जरूर पूरी होगी।

मां बनने का अहसास
अनिल थडानी से शादी के बाद 16 मार्च 2005 को रवीना की बगिया में एक कली खिली, जिसका नाम उन्होंने रशा रखा। इसके बाद 12 जुलाई 2007 को रवीना ने बेटे को जन्म दिया, जिसका नाम उन्होंने रणवीर रखा। मातृत्व सुख के बारे में रवीना कहती हैं कि वैसे तो पहले से ही दो बच्चों की मां थी, फर्क सिर्फ इतना आया कि बाद में मैं 4 बच्चों की मां बन गई। मातृत्व सुख की अनुभूति की बात करें तो इसको सिर्फ एक मां ही समझ सकती है। जब मैं मां बनी तो मैंने वही साहस और व्यावहारिकता अपने रिश्ते में लाने की कोशिश की, जो पहले थी। एक मां का प्यार हर बच्चे के लिए बराबर होता है। गर्भावस्था से लेकर शिशु के आगमन और फिर बच्चे की ग्रोथ के
एक्टिंग अवॉड्र्स
 फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर लक्स न्यू फेस ऑफ दि ईयर-पत्थर के फूल-1992
 नेशनल फिल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्टर- दमन- 2002
 बॉलीवुड फिल्म अवॉर्ड फॉर सपोॄटग एक्टर- अक्स - 2002
 फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर स्पेशल परफॉर्मेंस अवॉर्ड - अक्स - 2002
 फिल्मफेयर स्पेशल ज्यूरी अवॉर्ड- अक्स - 2002
 बॉलीवुड फिल्म अवॉर्ड- क्रिटिक्स अवॉर्ड, फीमेल- अक्स -2002
 स्क्रीन अवॉर्ड बेस्ट एक्टरसत्ता- 2004
रवीना की दिनचर्या
उठने का समय- सुबह 6 बजे
फिटनेस का समय- सुबह 6.30
नाश्ते का समय- सुबह 8 बजे
लंच का समय- दोपहर 1 बजे
चाय का समय- शाम 5 बजे
डिनर का समय- रात 8.30 बजे

साड़ी पहनने से परहेज
मैं अपनी लम्बे बाजुओं की वजह से साड़ी पहनने से परहेज करती हूं। स्वीमिंग करती हूं
अपनी बाजुओं के लिए मुझे स्विमिंग की जरूरत पड़ती है। स्किपिंग और साइकिल भी चलाती हूं।
भिंडी है पसंद घर की बनी भिंडी मुझे बहुत पसंद है।
टीवी वाली मम्मी
एक जज के रूप में मुझे टीवी पर देखकर मेरी बेटी बहुत खुश होती थी और मुझे टीवी वाली मम्मी कहकर बुलाती थी।
संतुष्ट हूं मैं जिस स्थिति में हूं, संतुष्ट हूं। मैं कुछ भी बदलना नहीं चाहती।
भाग्य में विश्वास
मैं भाग्य में विश्वास रखती हूं, मेरे हिस्से में सभी सुख और दुख लिखे हुए थे, जिनसे मैंने बहुत कुछ सीखा है।
भगवान का शुक्रिया
मैं जब भी रिश्तों और परिवारों को टूटता हुआ देखती हूं, तो सोने से पहले जो भगवान ने मुझे दिया है, उसका शुक्रिया जरूर अदा करती हूं।
पसंदीदा जगह
मेरी फेवरेट जगह मेरे घर का मंदिर है, जहां मैं बैठना पसंद करती हूं।
स्ट्रेट बाल पसंद हैं मुझे स्ट्रेट बाल पसंद हैं क्योंकि मैं अपने बालों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहती।
खूबसूरत बालों का राज
स्वस्थ खाना खाएं, मल्टीविटामिंस लें। यह बालों के उपचार के लिए सबसे अच्छा है। अपने बालों को सनब्लॉक से बचाकर रखें और अगर किसी के बाल ड्राई हैं तो उन पर लीव-इन कंडीशनर लगाएं। सोने से पहले हमेशा अपने बालों को बांधकर सोएं, इससे बाल कम टूटते हैं। मैं शैंपू, कंडीशनर, तेल, हेयर ब्रश और हेयर ड्रायर के बिना नहीं रह सकती।

 


४० गृहलक्ष्मी अप्रैल २०१६


साथ शुरू हुआ मां का सफर कई चिंताओं और खुशियों के बीच गुजरता है। पर मां की परेशानियों का कोई अंत नहीं है। एक बच्चे की आहट जिंदगी को बेहद खुशगवार बना देती है, इसलिए बच्चे से संबंधित कोई भी परेशानी बोझिल नहीं होती है। अब देखिए ना मैंने दोनों बेटियों की शादी कर दी है और दोनों अपने जीवन में खुश हैं। पर अब भी मुझे रशा और रणवीर के लालनपालन को लेकर चिंता रहती है, जबकि दोनों समझदार हैं।
मां रखें अपना ध्यान
रवीना उन महिलाओं को कुछ सलाह देना चाहती हैं, जो पहली बार मां बनने जा रही हैं। उनका कहना है कि मेरी राय में हर मां को याद रखना चाहिए कि उन्हें अपने बच्चे की पहले चार माह तक खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। इन चार माह के दौरान किसी भी महिला को डायटिंग नहीं करनी चाहिए। यदि वह ऐसा करती हैं तो इसका असर बच्चे की परवरिश और मां का दूध
पिलाने पर पड़ता है। हर महिला को चाहिए कि वह अपने नवजात शिशु को कम से कम छह माह तक अपना दूध पिलाएं। इसके बाद ही एक्सरसाइज की तरफ रुख करे। मैंने अपने बेटे रणवीर के जन्म के चार माह बाद ट्रेड मिल पर दौडऩा शुरू किया था। उसके बाद स्पा जाकर कुछ एक्सरसाइज करती थी। उसके बाद ही कार्डियो, एरोबिक और बॉलीवुड डांस करना शुरू किया
था।
बच्चों के साथ रिश्ता
रवीना कहती हैं कि बच्चों की परवरिश में मातापिता का बहुत बड़ा हाथ होता है। इसलिए मैंने और अनिल ने एक अच्छे माता-पिता का फर्ज निभाते हुए बच्चों को अच्छी परवरिश और ढेर सारा प्यार दिया है। पर जरूरत पडऩे पर हम दोनों उनके साथ सख्ती भी दिखाते हैं, क्योंकि हमें विश्वास है कि इस संतुलन और स्थिरता से बच्चे सफल बनेंगे। मुझे उम्मीद है कि वह अपनी मां
की तरह निडर बनेंगे। मैं और अनिल शुरू से ही बच्चों से फ्रेंडली रहे हैं जिसका परिणाम यह है कि रशा और रणवीर हमसे हर बात शेयर करते हैं। यह
देखकर दिल बहुत खुश होता है। मैं भी यही चाहूंगी कि हर माता-पिता को बच्चों के साथ फ्रेंडली होना चाहिए, क्योंकि परवरिश का यह महत्वपूर्ण हिस्सा है।


फिल्म इंडस्ट्री से बच्चे हैं दूर
अक्सर बॉलीवुड अभिनेताओं के बच्चे उनके ही नक्शे-कदम पर चलते हैं, पर रवीना का मामला अलग है। उनका कहना है कि उनके बच्चे अभी इन चीजों के बारे में सोचने के लिए बहुत छोटे हैं। उन्हें अभी फिल्मों में नहीं आने देना चाहंूगी, क्योंकि इस समय स्कूल जाना महत्वपूर्ण है और
वे पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं।


परिवार मेरी प्राथमिकता है
एक अभिनेत्री के लिए पत्नी, बहू और मां की भूमिका में प्राथमिकता क्या है, इस पर रवीना कहती हैं, मेरी पहली प्राथमिकता मेरा परिवार है, जबकि अभिनय मेरा पैशन है। मैं अपने पैशन को भी मरने नहीं दे सकती। मैं अब तक अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों- पत्नी व मां के दायित्व को बखूबी निभाते हुए अभिनय से भी जुड़ी हुई हूं। मुझसे किसी को कोई शिकायत नहीं है। बच्चों को अपने माता-पिता से सुरक्षा का अहसास चाहिए, वह हम उन्हें हमेशा देते रहे हैं। मैं अपने बच्चों का स्कूल टिफिन बनाती हूं, उनके स्कूल का होमवर्क भी करवाती हूं। मैं परिवार के हर सदस्य को बिना किसी शर्त का भरपूर प्यार देती हूं और शायद यही वजह है कि मेरा पूरा परिवार हमेशा मेरे साथ खड़ा रहता है।


स्किन के राज
त्वचा की क्लीनजिंग व मॉइश्चराइजिंग जरूर करती हूं। धूप में जाने से पहले एसपीएफयुक्त सनस्क्रीन जरूर लगाती हूं। कम से कम मेकअप करती हूं। खूब पानी पीती हूं और खूब फल खाती हूं।
मेकअप के राज
त्वचा के अनुरूप फाउंडेशन का चुनाव करती हूं। बेस का प्रयोग बहुत कम करती हूं, ताकि त्वचा को शुद्ध हवा मिले। ज्यादा डार्क मेकअप नहीं करती। काजल का इस्तेमाल जरूर करती हूं, ताकि आंखें बड़ी दिखें। मुझसे कहें अपने दिल की बात हैलो दोस्तों, मैं आपसे गृहलक्ष्मी पत्रिका के माध्यम से
रू-ब-रू हो रही हूं। मैं तहेदिल से आप सभी का धन्यवाद देती हूं कि आज मैं बॉलीवुड में 25 साल पूरे कर चुकी हूं। यह आपका प्यार और दुआ ही है, जिसकी वजह से आज मैं इस मुकाम तक पहुंची हूं। यह मेरा पहला अनुभव
होगा कि मैं किसी हिंदी पत्रिका की गेस्ट एडिटर बनी हूं। जब इस पत्रिका ने मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी तो मुझे बेहद खुशी हुई। मैं आपको विश्वास दिलाती हूं कि मैं इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाऊंगी। दोस्तों, यह कहना कि हम औरतों को पूरी आजादी मिली है, गलत होगा, क्योंकि आज भी बहुत सी संस्कृतियों में स्त्रियों को पुरुषों से कमतर समझा जाता है। उनके साथ की जाने वाली हिंसा ऐसी समस्या बन गई है, जो मिटने का नाम नहीं ले रही है। फिर चाहे वो यौन हिंसा, भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा, दहेज का मामला हो। घर और दफ्तर हर जगह स्त्री के साथ भेदभाव होता है। इसे सिरे से खत्म करने के लिए अभी तक कोई स्थाई समाधान नहीं मिला है। महिलाओं के साथ दिन प्रतिदिन होने वाले अपराधों को देखकर मेरा दिल दहल जाता है। जहां एक तरफ लोग देवी को पूजते हैं, वहीं उसको नोंचने से भी नहीं चूकते। एक औरत में पुरुष से अधिक आत्मिक और मानसिक शक्ति होती है। मैं हर एक औरत से कहंूगी कि कोई भी अत्याचार नहीं सहें और न ही अबला नारी बनें। अपनी ताकत को पहचाने और हर मुसीबत का मुकाबला हिम्मत से करें। दोस्तों, गृहलक्ष्मी पत्रिका के माध्यम से आप मुझसे हमेशा जुड़ी रह सकती हैं। अगर आप मुझसे किसी भी तरह की बात पूछना चाहती हैं तो गृहलक्ष्मी के पते पर या मेल द्बठ्ठद्घशञ्चस्रश्चड्ढ.
द्बठ्ठ पर जरूर लिखें। मैं आपकी बात या समस्या का समाधान करने की पूरी कोशिश करूंगी।
धन्यवाद


फिटनेस मंत्रा
रवीना टंडन इस उम्र में भी हमेशा फिट और चुस्त-दुरुस्त नजर आती हैं। इस पर उनका कहना है कि उनकी फिटनेस का राज उनके बच्चे हैं। वह अपने बच्चों की देखभाल खुद करती हैं और उनके पीछे भागने-दौडऩे से ही वह अब तक फिट बनी हुई हैं। वे कहती हैं, मैं हमेशा खुद को स्वस्थ व चुस्त-दुरुस्त रखने का प्रयास करती हूं। मैं ख्याल रखती हूं कि मेरी बाजुओं का वजन बढऩे ना पाए, इसलिए मैं स्विमिंग पर ज्यादा ध्यान देती हूं। मेरा नियम है कि मैं लंबे समय तक एक ही तरह का वर्कवाउट नहीं करती। समय-समय पर उसमें बदलाव करती रहती हूं। इसके पीछे मेरी सोच यह है कि शरीर को किसी भी चीज या वर्कआउट की आदत न पड़े। मैं वर्कआउट को लेकर प्रयोग करने में यकीन करती हूं। कुछ दिन तक स्वीमिंग जाती हूं तो कुछ दिन जिम जाती हूं। बाजुओं को हल्का रखने के लिए जिम में हिट करने वाली कसरत पर जोर देती हूं। कार्डियो करती हंू। एक घंटे तक ट्रेडमिल पर दौड़ती हूं। अपने शरीर को एकदम फिट रखने के लिए जुम्बा डांस भी करती हूं। मुझे लगता है कि अब तक मैं हर तरह के वर्कआउट का प्रयोग कर चुकी हूं। योगा भी करती हूं। सुबह वॉकिंग करना कभी नहीं भूलती। सुबह-सुबह पानी में शहद पीती हूं।
खानपान
रवीना अपने खानपान के बारे में कहती हैं कि सेहत सही रखनी है तो खानपान पर भी ध्यान देना पड़ता है। नॉन वेजीटेरियन होने के बावजूद मैं चिकन और मछली ही खाती हूं। रविवार को जब परिवार के साथ बाहर भोजन करने जाती हूं, सिर्फ तभी मिठाई या आइसक्रीम खाती हूं। घी के बजाय बटर लेती हूं। ज्वार की रोटी खाती हूं। फल व सलाद का खाती हूं। मेरा नियम है कि रात्रि भोजन साढ़े सात बजे कर लेती हूं। मेरे शरीर की बनावट की वजह यह है कि बचपन में मेरी मां ने घी और परांठा बहुत खिलाया है।
मेरा कद मेरी ताकत
रवीना कहती हैं कि उनकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि मुझे अपने वजन बढऩे की चिंता नहीं सताती, मुझे साइज जीरो नहीं बनना है। मैं अपने शरीर की बनावट और वर्कआउट को लेकर संतुष्ट हूं। मेरा पांच फुट छह इंच का कद मेरी सबसे बड़ी ताकत है। जिन लोगों का कद छोटा होता है, अगर उनका वजन थोड़ा सा भी बढ़ जाए तो शरीर बेडौल नजर आने लगता है।
अतीत का कोई गम नहीं
अतीत को लेकर हर किसी के मन में कोई ना कोई गम जरूर होता है पर रवीना के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं है। वो कहती हैं कि अतीत को लेकर कोई गम नहीं है। मुझे किसी भी फिल्म के साथ जुडऩे का कभी भी गम नहीं रहा, वह चाहे एक आम औरत हो या फिल्म तारिका, एक मां के रूप में दोनों की समस्या एक जैसी होती है। आशियाने में झलकता है प्रकृति प्रेम मुंबई के बांद्रा इलाके में स्थित रवीना और अनिल का बंगला, जिसका नाम नीलया है, प्रकृति के बहुत करीब है। इस घर से रवीना की सुरुचि और आर्टिस्टिक सोच की झलक दिखती है। रवीना कहती हैं, मैं अपने बंगले में फ्यूजन चाहती थी। मुझे केरल में बने घर बेहद पसंद हैं और वहीं से प्रेरणा लेते हुए मेरा यह घर डिजाइन हुआ है। अगर मेरे घर में यदि आप शांत बैठें तो कुछ ही पलों में आपको पक्षियों के गाने की आवाज सुनाई देगी। यही अहसास मैं हमेशा से चाहती थी कि जब भी सुबह आंखें खोलूं तो घर की खिड़की खोलते ही हरियाली नजर आए। मैं फूलों को देख सकूं। अपने अहसास को मैंने घर में मूर्त रूप दे दिया है। अपने घर का इंटीरियर करते वक्त मेरे दिमाग में केवल एक ही बात थी कि मैं उसे आज के स्टाइल में ऐसे सजाऊं, की मेरा पूरा व्यक्तित्व मेरे घर में नजर आए। इसके लिए मैंने अपने घर में नई और पुरानी वस्तुओं का पूरा उपयोग किया है। वैसे भी पुरानी चीजों को नया ट्विस्ट देनामेरी खासियत है। पारंपरिक चीजें घर को सुंदर लुकदेती हैं।
जियो और जीने दो
मैं बहुत ही वफादार और विश्वसनीय किस्म की इंसान हूं। मेरे जीवन दर्शन है- जीयो और जीने दो। मुझे अध्यात्म और अलौकिकता में बेहद रुचि है। इन चीजों से संबंधित कोई भी बात मुझे हमेशा आकर्षित करती है।
बेनजीर बंद नहीं हुई
कुछ समय पहले पहले खबर आई थी कि रवीना टंडन बड़े परदे पर एक बायोपिक में लीड रोल से बॉलीवुड में वापसी करने जा रही हैं। यह फिल्म बेनजीर भुट्टो पर केंद्रित होगी। मगर अब यह प्रोजेक्ट बिवादों के कारण टलता नजर आ रहा है। इस पर रवीना कहती हैं कि यह एक एक ऐसी फिल्म है, जिसके कारण बहुत विवाद हो सकते हैं, तो ऐसे में हर कोई सुरक्षा का ध्यान रखेगा, लेकिन यह फिल्म बंद नहीं की गई है। मेरे हिसाब से वे इसका सेट भारत में बनाएंगे। यह फिल्म मेरे लिए बहुत खास है क्योंकि मेरे हाथ में फ्रेक्चर होने के बावजूद मैंने यह फिल्म पट्टी उतार कर पूरी की, जिसके कारण आजतक मेरे हाथ में दर्द है। इस तरह का संघर्ष हम करते हैं, जिसे लोग
देख नहीं पाते। अगर कोई इतना मशहूर और सफल है, तो बेशक उसने बहुत मेहनत की होगी। आप बिना मेहनत किये यह सब नहीं पा सकते।