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कॉम्बिनेशन दवाओं पर लगे प्रतिबंध का स्वागत

ऋचा कुलश्रेष्ठ - दरकार

11th April 2016

कॉम्बिनेशन दवाओं का उत्पादन और बिक्री बंद करने का सरकार का फरमान, देश के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। जनता के स्वास्थ्य के प्रति सरकार की इस चिंता से लोगों में आशा का संचार हुआ है।

कॉम्बिनेशन दवाओं पर लगे प्रतिबंध का स्वागत

सरकारी सुधारों की श्रृंखला में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होने की आशंका के कारण कॉम्बिनेशन दवाओं का उत्पादन और बिक्री बंद करने का कदम तारीफ के काबिल और स्वागतयोग्य है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐसी करीब 350 दवाओं को प्रतिबंधित कर दिया है, जिनमें दो या अधिक दवाओं का निश्चित मात्रा में मिश्रण होता है। मंत्रालय का कहना है कि यह दवाएं लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हैं और इनके सुरक्षित विकल्प मौजूद हैं।

आजकल बाजार में मिलने वाली ज्यादातर दवाएं कॉम्बिनेशन में आने लगी हैं जबकि जरूरत का हर सॉल्ट अलग-अलग भी मिल जाता है। ऐसे में जबकि एक बीमारी के लिए एक ही सॉल्ट काम कर सकता है, कॉम्बिनेशन में मिलने के कारण डॉक्टर किसी एक रोग के लिए ऐसी दवाएं लिख देते हैं, जिनके कुछ तत्वों की मरीज को जरूरत ही नही होती। फिर होता यह है कि बिना जरूरत लिया जाने वाला सॉल्ट मरीज को भारी पड़ जाता है और दवा रिएक्ट कर जाती है। कई बार दवा का असर मरीज को तुरंत समझ नहीं आता लेकिन यह मरीज पर ऐसे दुष्प्रभाव डालती है, जिसका असर कुछ समय बाद दिखता है। कुछ सॉल्ट ऐसे होते हैं जिनके कारण कई बार दवा का प्रभाव भी सही और पूरी तरह से नहीं होता। विदेशों में ऐसी दवाएं पूर्णतया प्रतिबंधित हैं लेकिन भारत में इसका प्रचलन काफी समय से चल रहा है।

दवाओं के बारे में सरकार का यह फरमान, देश के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। जनता के स्वास्थ्य के प्रति सरकार की इस चिंता से लोगों में आशा का संचार हुआ है। इसके अनुसार ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के भाग 26, के तहत 10 मार्च से दवाइयों और मिश्रणों के उत्पादन, बिक्री और वितरण पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। देश में बनने वाली करीब 30 प्रतिशत दवाएं इस प्रतिबंध के दायरे में आ गई हैं।

इन दवाओं में सामान्य तौर पर प्रयोग होने वाले दर्द निवारक निमूसलाइड, पैरासिटामोल, सिट्राजिन सहित खांसी की दवा कोरेक्स सिरप जैसे मिश्रण शामिल हैं। इस संबंध में मंत्रालय ने राजपत्र में एक अधिसूचना भी जारी की है कि श्रेष्ठ वैज्ञानिकों से इनके प्रभावों का बेहतर तरीके से अध्ययन कराकर मसले पर निष्पक्षता बरतने की कोशिश की गई है। विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार इस बात से संतुष्ट है कि जनहित में इन उत्पादों की देश में बिक्री और वितरण का नियमन किया जाए। सरकार की ओर से इन दवाओं को बनाने वाली कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और विशेषज्ञ समिति की ओर से अपनी सिफारिशें सौंप दिए जाने के बाद उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया गया है।

यूं भी आजकल अंग्रेजी दवा यानी एलोपैथी लेते वक्त हमेशा एक डर सा लगा रहता है कि यह दवा कहीं हमें, हमारे नजदीकी परिजनों या हमारे बच्चे को रिएक्ट तो नहीं करेगी। बच्चे की बात खासतौर से इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐलोपैथी दवाएं बच्चों पर ज्यादा जल्दी अपना दुष्प्रभाव दिखाती हैं और हम सभी अपने-अपने बच्चों के लिए सबसे ज्यादा चिंतित भी रहते हैं। इसी चिंता का असर था कि ज्यादातर बच्चों वाले घरों में बुखार के लिए निमूसलाइड, खांसी के लिए विक्स की गोली और कोरेक्स कफ सिरप मिल ही जाया करता था।

समय-समय पर विभिन्न एलोपैथी दवाओं के साइड इफैक्ट्स के बारे में सुनने को मिलता रहता है। जैसे, कभी सुनने में आता है कि बच्चों को निमूसलाइड देना खतरनाक है तो कभी पता लगता है कि दर्दनिवारक दवाओं के नियमित सेवन से किडनी की समस्या, दिल मिचलाना, उल्टी, डायरिया तथा पेट दर्द की आशंका हो सकती है जबकि इसके अत्यधिक इस्तेमाल से उच्च रक्तचाप, गुर्दों में खराबी, आघात का खतरा तथा दिल का दौरा तक पड़ सकता है। यह भी कि कफ सिरप का लम्बे समय तक इस्तेमाल करने से शारीरिक अंगों के संचालन में गड़बड़ी, थाइरॉयड की समस्या, अतिसक्रियता, दौरा, उच्च रक्तचाप, पेट दर्द तथा दिल की धड़कन में समस्या हो सकती है। कुछ एंटीबायोटिक्स से डायरिया, त्वचा पर चकत्ते, एलर्जी हो सकती है, जबकि इन पर निर्भरता से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इनके लम्बे इस्तेमाल से लिवर तथा किडनी की खराबी जैसी जानलेवा समस्याएं भी पैदा हो सकती है।

ऐसे में हम उम्मीद रख सकते हैं कि आगे भी सरकार लोगों के जीवन और स्वास्थ्य से संबंधित सुधारों का यह सिलसिला जारी रखेगी। इसके साथ ही देश के लिए एक खुशखबरी यह भी है कि इसके बाद फार्मा सेक्टर में करीब 500 दवाओं के दाम अप्रैल माह से काफी कम हो जाएंगे। इनमें कुछ जीवनरक्षक दवाएं, दिल की समस्या निवारक दवाएं, कोलेस्टेरॉल स्तर घटाने वाली दवाएं, डायबिटीज की दवाएं और कुछ टीके भी शामिल हैं, जिनके दामों में काफी कमी हमें देखने को मिलेगी।