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बिना घी,तेल के जलती है यहां अखंड ज्वाला

गृहलक्ष्मी टीम

12th April 2016

बिना घी,तेल के जलती है यहां अखंड ज्वाला

 

ज्वाला जी का मंदिर माता के 51 शक्तिपीठों में से सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। यहां देवी ज्वाला के रूप में विद्यमान हैं जो अनादिकाल से बिना बुझे लगातार जल रही हैं। इस ज्वाला का स्रोत जमीन के नीच विद्यमान प्राकृतिक गैसें हैं। इन ज्वालाओं को देवी का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। देवी की नौ ज्वालाओं के नाम हैं- महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलौज, विंध्या, महालक्ष्मी, सरस्वती, अंबिका, अंजनी देवी। यह ज्वालाएं अनवरत जलती हैं और मंदिर की दिवारों में से निकलती हुई प्रतीत होती हैं।

कहा जाता है कि इस स्थान पर देवी सती की जिह्वा गिरी थी। इस मंदिर की गणना 51 शक्तिपीठों में होती है और इसकी बहुत मान्यता है।

 

 

क्या है इस ज्वाला का रहस्य ?

एक कथा के अनुसार प्राचीन काल में गोरखनाथ माँ के अनन्य भक्त थे जो माँ के दिल से सेवा करते थे। एक बार गोरखनाथ को भूख लगी तब उसने माता से कहा कि आप आग जलाकर पानी गर्म करें, मैं भिक्षा मांगकर लाता हूं। माँ ने कहे अनुसार आग जलाकर पानी गर्म किया और गोरखनाथ का इंतज़ार करने लगी पर गोरखनाथ अभी तक लौट कर नहीं आये । माँ आज भी ज्वाला जलाकर अपने भक्त का इन्तजार कर रही है।  ऐसा माना जाता है जब कलियुग ख़त्म होकर फिर से सतयुग आएगा तब गोरखनाथ लौटकर माँ के पास आयेंगे।  तब तक यह अग्नी इसी तरह जलती रहेगी।

 

 

 

अकबर ने भी झुकाया था सर

आदिकाल से बहुत लोगों ने इन लगातार जलती ज्वालाओं का रहस्य जानने की कोशिश की परंतु असफल रहे। माता की शक्ति को आजमाने वाले भक्तों को बार-बार माता ने अपनी शक्ति का परिचय दिया है। मुगल बादशाह अकबर ने अभिमान में भरकर मंदिर में सोने का छत्र चढ़ाया था। माता ने उसके अभिमान को तोडऩे के लिए छत्र को किसी धातु में बदल दिया और उसके टुकड़े कर दिए। यह छत्र आज भी ध्वस्त अवस्था में भक्तों के दर्शन के लिए रखा गया है। अंग्रेजों ने भी अपने काल में इन ज्वालाओं को बुझाने व इनका रहस्य जानने की कोशिश की परंतु सफल न हुए।

 

 

ऐसा है मां का दरबार

माता ज्वाला जी का मंदिर आधुनिक रूप से बना हुआ है। मंदिर का गुंबद सोने का बना है और इसका मुख्य द्वार सुंदर चांदी की नक्काशी से सुसज्जित है। मंदिर के भीतर एक चौकोर कुंड है जो कि लगभग तीन फीट गहरा है। इसके चारों ओर चलने की जगह है। सामने की दीवार पर जगह-जगह ज्वालाएं प्रकट हुई हैं जहां भक्त जन उनकी पूजा करते हैं। मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है और देवी की पूजा ज्वाला रूप में ही की जाती है। मंदिर के पास गोरख डब्बी, माता का शयन कक्ष मंदिर और कुछ पर स्थित तारा देवी और नवग्रह मंदिर भी दर्शनीय हैं। भक्तजन मां ज्वाला देवी के मंदिर में अपनी कामनाएं लेकर आते हैं जो मां पूर्ण करती हैं।

कैसे पहुंचे -

माता ज्वाला जी का मंदिर होशियारपुर के गोपीपुरा डेरा से 10 मील की दूरी पर है। यह कांगड़ा घाटी से दक्षिण में 30 कि.मी. पर स्थित है।

 

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