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इन 6 टिप्स से बच्चों का आलस्य करें दूर

डॉ. समीर पारिख

23rd May 2016

बच्चे की भावनाओं का सम्मान करना और खुलकर व बेहतर ढंग से बात करना आपके और बच्चे के बीच की दूरी मिटाने में काफी मददगार साबित हो सकता है।

इन 6 टिप्स से बच्चों का आलस्य करें दूर


अभिभावकों और शिक्षकों से बच्चों में आलस्य की शिकायत सुनने को मिलती है। काम के लिए बच्चों का टालमटोल करना आजकल सामान्य चलन हो गया है। यह आदत बचपन से लेकर किशोरावस्था और यहां तक कि वयस्क होने पर भी बनी रहती है!

किसी विशेषज्ञ को सबसे ज्यादा मिलने वाली शिकायतों में कई चीजें शामिल है, पढ़िए-


ठीक से पढ़ाई न करना
आजकल अभिभावक और शिक्षक दोनों ही बच्चों का ध्यान पढ़ाई में नहीं होने की शिकायत करते हैं। बच्चे क्लासवर्क या होमवर्क पूरा नहीं करते और लंबे समय तक पढऩा भी उन्हें अच्छा नहीं लगता है।


समय पर न उठना
अभिभावकों को अपने बच्चों को समय पर उठाने में मुश्किल होती है जिसकी वजह खराब जीवनशैली हो सकती है। बच्चे देर रात तक जागते हैं या उनकी नींद ढंग से पूरी नहीं होती।


घरेलू काम में मदद न करना
अक्सर बच्चे घर के किसी भी काम में हाथ नहीं बंटाते हैं। बच्चा खुद एक ग्लास पानी भी नहीं पी सकता। बच्चे, विशेष तौर पर किशोर, दिन भर बिस्तर या सोफे पर बैठे रहते हैं और कुछ काम होने पर बहाना बनाकर उठने से इनकार कर देते हैं। घर में मनोरंजन के सभी साधन उपलब्ध होने की वजह से बच्चों के लिए बाहर खेलना और घूमना-फिरना भी आकर्षण नहीं रह गया है।


मोबाइल या टीवी एडिक्शन
कुछ बच्चे हमेशा मोबाइल/लैपटॉप/टीवी पर चिपके रहते हैं। टेक्नोलॉजी पर अति-निर्भरता न सिर्फ बच्चों के लिए, बल्कि कई वयस्कों के लिए भी यह गंभीर समस्या बन गई है।


अभिभावक क्या करें?
एक अभिभावक के तौर पर हमें हमेशा कुछ बातों का खयाल रखने की जरूरत है -

  • आलस्य के कारण समझें

अक्सर बच्चों में आलस्य की वजह अभिभावकों, शिक्षकों या दोस्तों की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रदर्शन करने की क्षमता का अभाव होता है। अभिभावक उन पर अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव डालते रहते हैं और बच्चे की मुश्किल को पहचानने में असमर्थ रहते हैं। ऐसे में जरूरी है कि इस ओर जागरूकता बढ़ाएं जैसे कुछ विशिष्ट पढऩे में बच्चे को मुश्किल होना या व्यवहार संबंधित अन्य मुश्किलें, जो आगे चलकर ध्यान की कमी, अधीरता, अवज्ञा, आक्रामकता, विरोधी या विकृत व्यवहार इत्यादि में बदल जाती हैं।

 

  • बहानों को पहचानें

अपने बच्चे के आलस्य या उदासीनता के पीछे की वजह समझना बहुत जरूरी है। बच्चे से बात करें और उसकी भावनाओं व नजरिए को समझने की कोशिश करें। बच्चे की भावनाओं का सम्मान करना और खुलकर व बेहतर ढंग से बात करना आपके और बच्चे के बीच की दूरी मिटाने में काफी मददगार साबित हो सकता है।

 

  • स्पष्ट निर्देश दें

बच्चे को छोटे और विशिष्ट लक्ष्य रखने में मदद करें। अपने निर्देश बिल्कुल स्पष्ट रखें। लक्ष्य निर्धारित करने में बच्चे को शामिल करें क्योंकि इससे वह लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध होगा। काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दें, जिससे वह उसे आसानी से पूरा कर सके।

 

  • ज्यादा रोकटोक न करें

बच्चे को जिम्मेदार बनाने की कोशिश के तहत बच्चे पर ज्यादा निगरानी और ज्यादा रोकटोक न करें। इससे आपके बच्चे को फायदा कम बल्कि नुकसान अधिक पहुंचेगा।

 

  • रिश्ता मजबूत करें

जरूरी है कि आप जिम्मेदार वयस्क की भूमिका निभाते हुए अपने बच्चों के साथ रिश्तों को बेहतर बनाने की दिशा में काम करें। इससे न सिर्फ आप अपने बच्चों का भरोसा जीतेंगे बल्कि बच्चे के अनुभव को बेहतर ढंग से भी समझ सकेंगे।

  • साथ मिलकर कोशिश करें

अभिभावक खुद को बच्चे की कोशिशों में शामिल करें। इससे न सिर्फ बच्चे को प्रोत्साहन मिलेगा बल्कि ऐसा कर आप अपने बच्चे के संघर्ष का हिस्सा भी बन जाएंगे। आप बच्चे के लिए एक उपयुक्त सपोर्ट सिस्टम बनेंगे और बच्चे के साथ आपका रिश्ता भी मजबूत हो जाएगा।


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