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गृहलक्ष्मी ने बॉलीवुड अदाकारा रवीना संग मनाई 25वीं वर्षगांठ

ऋचा कुलश्रेष्ठ

30th April 2016

गृहलक्ष्मी के साथ-साथ बॉलीवुड की जानीमानी अभिनेत्री और गृहलक्ष्मी की स्पेशल गेस्ट एडिटर बनीं रवीना टंडन के बॉलीवुड में 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका नाम था संपूर्ण गृहलक्ष्मी।

 

 

महिलाओं की सर्वाधिक पढ़ी जाने वाली हिंदी मासिक पत्रिका गृहलक्ष्मी के साथ-साथ बॉलीवुड की जानीमानी अभिनेत्री और गृहलक्ष्मी की स्पेशल गेस्ट एडिटर बनीं रवीना टंडन के बॉलीवुड में 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में नई दिल्ली के ली मेरीडियन होटल में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका नाम था संपूर्ण गृहलक्ष्मी।

इस अवसर पर रवीना टंडन ने गृहलक्ष्मी के अप्रैल अंक का अनावरण करते हुए महिलाओं, पाठकों और पत्रकारों को अपने और गृहलक्ष्मी के बारे में अनेक राज बताए और उन्हें शैम्बोर कॉस्मेटिक्स और स्पावेक की ओर से गिफ्ट हैम्पर दिए गए। इस अवसर पर डायमंड ग्रुप के अध्यक्ष श्री नरेंद्र कुमार वर्मा, गृहलक्ष्मी के प्रकाशक श्री मनीष वर्मा और कार्यकारी संपादक वंदना वर्मा समेत गृहलक्ष्मी की पूरी संपादकीय टीम मौजूद थी।

 

             रवीना टंडन का स्वागत करते डायमंड ग्रुप के अध्यक्ष श्री नरेंद्र कुमार वर्मा।

 

आधी आबादी की पत्रिका

गृहलक्ष्मी के रजत जयंती समारोह के मौके पर डायमंड ग्रुप के अध्यक्ष श्री नरेंद्र कुमार वर्मा का कहना था कि कि हमारी विशेष अतिथि रवीना टंडन जी ने भी अपने फिल्मी सफर का सिल्वर जुबली वर्ष पूरा किया है, जिसका फिल्म जगत ने भी स्वागत किया है। आज हम गृहलक्ष्मी की स्पेशल गेस्ट एडिटर के रूप में उनका स्वागत कर रहे हैं। उन्होंने बताया, 25 वर्ष पूर्व गृहलक्ष्मी पत्रिका के प्रकाशन की शुरुआत करते वक्त हमने चिंतन किया कि भारत की आधी आबादी महिलाओं की है। नारी पत्नी के रूप में अपने परिवार के जीवन निर्माण का कार्य करती है।

देखिये इस वीडियो में कैसे रवीना के चेहरे से ख़ुशी झलक रही है और सुनिए कि क्या कहा गृहलक्ष्मी की गेस्ट एडिटर बनने पर उन्होंने -

 

 

नवजीवन का आधार

उनका कहना था कि नारी घर की लक्ष्मी ही नहीं, बल्कि सुसंस्कृत समाज का निर्माण करने वाली राष्ट्र की आधारशिला भी होती है। शिशु में अच्छे संस्कार, कैरियर योजना, उसके व्यवहार का आधार, नव जीवन के निर्माण का दायित्व भी मां पर ही होता है। अगर वह कामकाजी भी है तो भी आने वाली पीढ़ी को अधिक कार्य कुशल बनाने का संकल्प उसके मन में होता है। नारी का शिक्षित होना, अन्याय न सहना, कर्मठ होना, अधिकारों के प्रति सजग होना और कर्तव्यनिष्ठा से अपने घर परिवार को सजाने के अलावा खुद सजना-संवरना भी उसके व्यक्तित्व को दर्शाता है। उसे मर्यादा और सामाजिक दायित्व का भी निर्वाह करना होता है। यह कठिन है, लेकिन आवश्यक है। नारी नये युग का निर्माण करने वाली गृहलक्ष्मी है। गृहलक्ष्मी की इसी संकल्प शक्ति का हम अभिनंदन करते हैं।

प्रकाशन का मूलमंत्र

श्री वर्मा ने गृहलक्ष्मी के प्रकाशन का मूलमंत्र बताते हुए कहा कि पहला मंत्र है कि गृहलक्ष्मी प्रत्येक नारी का आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक हो। नारी का समाज में ओहदा बढ़े। वह शिक्षित हो क्योंकि शिक्षित नारी नई पीढ़ी को और सुसंस्कृत बना सकती है। इसीलिए हमने पत्रिका के हर अंक में महिला उत्थान पर लेख, कहानियां, व्यंग्य, कविताएं आदि रोचक, ज्ञानवर्धक और पठनीय सामग्री देना निश्चित किया। उन्होंने बिना रुके 300 अंक लगातार प्रकाशित करने के लिए गृहलक्ष्मी के प्रकाशक मनीष वर्मा का अभिनंदन करते हुए बताया कि 12 से 16 घंटे निरंतर काम करना, सुबह-शाम गृहलक्ष्मी के बारे में ही सोचना और अपनी गृहलक्ष्मी यानी अपनी पत्नी से इसके लिए कभी-कभी डांट भी खाना, जैसे कि तुम ज्यादा समय मेरी सौतन को, यानी गृहलक्ष्मी पत्रिका को देते हो, उनकी जीवन शैली बन गई है।

      गृहलक्ष्मी के अप्रैल अंक का अनावरण।

 

कंप्यूटर युग

उनका कहना था कि सच है कि आज कंप्यूटर युग के कारण लोगों की पठन रुचि में थोड़ी कमी आई है। इंटरनेट, व्हाट्सएप और सोशल साइट्स की बढ़ती लोकप्रियता के बाद भी हमने हिम्मत नहीं हारी। हम फेसबुक पर भी छा गये और गृहलक्ष्मी की वेबसाइट भी बना दी गई है ताकि आप 12 महीने और 24 घंटे गृहलक्ष्मी के संपर्क में रह सकें। उन्होंने कहा कि गृहलक्ष्मी एक ऐसी पत्रिका है जो पारिवारिक रुचि की सामग्री के साथ-साथ महिला समस्याओं पर विचार मंथन भी करती रहती है। गृहलक्ष्मी मेला, गृहलक्ष्मी किट्टी पार्टी और 'विचार मंथन' जैसे अनूठे कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होते हैं, ताकि हम नारी के सामाजिक महत्व को समझें और विचार करें। उन्होंने गृहलक्ष्मी की संपादकीय टीम को बधाई देते हुए कहा कि 25 वर्ष की अवधि काफी लम्बी होती है। धूप-छांव, गर्मीसर्दी जैसे मौसमी व्यवधान के बावजूद हर अंक समय पर लाने के लिए मैं अपनी संपादकीय टीम को बधाई देता हूं, जिसमें सम्पादन में सबसे पहले जुड़ी तबस्सुमजी, वंदना वर्मा, ऋचा कुलश्रेष्ठ, अर्पणारितेश यादव, निहारिका जायसवाल, विजया मिश्रा, ग्राफिक डिजाइनर अशोक कुमार गुप्ता, अभिषेक सैनी, खेमानन्द ढौंडियाल, प्रोडक्शन में सुनील चौधरी, विशेष सलाहकार किरण बेदी, अशोक चक्रधर, संजीव कपूर, शशिकांत सदैव और संस्कृति सिंह शामिल हैं। इसके अलावा मोनिका भारद्वाज, गरिमा चंद्रा एवं प्रवीण चंद्रा समेत समस्त मीडिया टीम का भी अभिनंदन है।

अंत में उन्होंने कहा कि गृहलक्ष्मी को शौक से पढ़ें, ताकि प्रत्येक नारी गृहलक्ष्मी के सभी आयामों को जान सके और अपने व्यक्तित्व में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सके। उन्होंने कहा, मुझे पूरा विश्वास है कि इस तरह हर नारी राष्ट्र के विकास में भी योगदान दे सकेगी।

रवीना की अभिव्यक्ति

इस अवसर पर अभिनेत्री अौर गहलक्ष्मी की स्पेशल एडिटर रवीना टंडन ने कहा, 'मैं गृहलक्ष्मी की आभारी हूं कि उन्होंने मुझे स्पेशल गेस्ट एडिटर पद के योग्य समझा। इस कार्यक्रम में मेरी जितनी तारीफ हुई है, उससे मैं अभिभूत महसूस कर रही हूं। अपने फिल्मी सफर का बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, मेरे पिछले 25  साल बहुत खूबसूरत रहे हैं। मेरा कैरियर एक ऐसा सफर है जिसमें मैंने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं, सफलता असफलता, दुख-सुख सब देखा। जिंदगी के इन्हीं अनुभवों के साथ मैं आगे बढ़ती गई। आज मैं जिस मुकाम पर हूं, उसमें मेरे प्रशंसक, परिवार और आप सबका योगदान है।' रवीना टंडन ने कहा कि जिंदगी है तो चुनौतियां भी आएंगी। चुनौतियां आपको बेहतर इंसान बनाने में मदद करती हैं। चुनौती को स्वीकार करो, लेकिन सकारात्मक तरीके से, तभी आप सफल हो सकते हैं। लाइफ को आपको जो भी देना है, वह आपको मिलता है। महत्वपूर्ण यह ह कि आप उसे कैसे स्वीकार करते हैं।

जीवन का फलसफा

रवीना का कहना था कि उनके जीवन का फलसफा है कि खुद को स्मोकिंग और ड्रिंकिंग से दूर रखो। हमेशा खुश और मुस्कुराते रहो, सकारात्मक सोच रखोै। यही उनका फिटनेस मंत्रा भी है।

रवीना टंडन का संदेश

गृहलक्ष्मी के पाठकों के लिए रवीना टंडन ने संदेश दिया कि लड़का और लड़की में भेदभाव न करें। बच्चों की शिक्षा में मां का बहुत बड़ा हाथ होता है। वही बच्चों को हमेशा अच्छी बातें सिखाती है। अपने बच्चों को अपने से कमजोर की सहायता करना सिखाएं। वही बच्चे बड़े होकर क्रिमिनल बनते हैं, जिन्हें बचपन में अच्छे संस्कार नहीं मिलते। आज आप जैसा अपने से बड़ों के साथ व्यवहार करेंगे, वैसा ही बच्चे बड़े होकर आपके साथ व्यवहार करेंगे, इसलिए घर के बुजुर्गों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए।

 

 

अशोक चक्रधर ने की तारीफ

इस अवसर पर प्रसिद्ध कवि अशोक चक्रधर ने रवीना टंडन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इतनी सुन्दर अतिथि अगर मिल जाए तो समारोह की महत्ता बढ़ जाये... सुन्दर के साथ-साथ उसका मस्तिष्क भी सुन्दर, चेतना भी प्रखर हो और उसमेें ज़माने को बदलने की शिद्दत से कामना हो, वो जो महिलाओं से ज्यादा भविष्य की महिलाओं यानी गर्ल चाइल्ड को प्राथमिकता देती हो, ...वो जो एक सम्पूर्ण नारी बनाने के लिए अपने नारीत्व के सभी आयामों को सामने लाती हो, ऐसी रवीनाजिनके कार्मिक वर्ष 25 हुए। ये सिर्फ फिल्म निर्मात्री ही नहीं हैं, ये बहुत अच्छी डायरेक्टर भी हैं।

फिल्म दमन में तो इनका काम वाकई बेहद अद्भुत था। यूं तोकई फिल्में हैं जिनमेें रवीना ने काम किया, बड़े मियां छोटे मिया में भी इन्हें कमाल किया था। हम कह सकते हैं कि रवीना को देश के सभी बड़े कलाकारों के साथ काम करने का सौभाग्य मिला है।

चुहलबाजी

उन्होंने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि गृहलक्ष्मी के पहले अंक में मेरा भी पहला लेख छपा था... फिर बीच में अंतराल आया... और पिछले 15 साल से मैं एक कॉलम इस पत्रिका में लिखता हूं... गृहलक्ष्मी के आखिरी पेज पर 'नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब' अनाड़ी बनकर लिखता हूं क्योंकि नारी के सामने यदि कोई व्यक्ति बुद्धिमान बन जाए तो उसका भविष्य अच्छा नहीं है। नारी के सामने आप कतई महान या बड़े हो ही नहीं सकते, वो जो कहे, स्वीकार करो। इन पंद्रह वर्षों में मैंने महिलाओं के साथ एक विश्वसनीय सम्बन्ध बनाया है। वो कैसे भी सवाल मुझ से पूछ लेती हैं और मैं किसी भी तरह उनको उनके प्रश्नों का उत्तर देने की कोशिश करता हूं। मैं उसमें तरीके की, कायदे की बात भी बताता हूं और कभी-कभी चुहलबाजी भी कर लेता हूं। इसमें एक-आध सवाल ऐसा भी आ जाता है जिसका उत्तर आप दे ही नहीं सकते। जैसे एक सवाल आया था कि अगर आपकी बॉडी सलमान खान जैसी होती तो क्या आप भी कमीज उतार कर घूमा करते... मैंने सोचा कि इस सवाल को डस्टबिन के हवाले कर दूं... पर नहीं, जब चुनौती थी कि जवाब देना है तो देना है। ...तो हमने जवाब दिया बॉडी तो हमारी है सलमान से भी ह्रश्वयारी, पर क्या करें लोक मर्यादा में कभी कमीज नहीं उतारी। एक बार अकेले में जंगल में उतारी, तो पड़ गई भारी क्योंकि जंगल के काले हिरन हमको सलमान का बड़ा भाई समझकर दना दन सींग मार गए और कमीज तो क्या हमारी पैंट भी उतार गए।

उन्होंने कहा कि देखिये हास्य में एक बड़ी बारीक सी रेखा होती है। इसके ऊपर चले जाओ तो खराब हो जाता है... नीचे रहो तो सामाजिक हो जाता है। कलाकार के लिए, कवि के लिए, पत्रकारों के लिए और समय के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है कि हम किस तरह अपने पाठकों के लिए, अपने चाहने वालों के लिए एक अदद रुचिकर सामग्री तैयार करते हैं। समारोह में अंत में रवीना टंडन ने पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए और पत्रिका का शुक्रिया अदा किया। 

 

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