योग बनाए सक्सेसफुल सेक्स

गृहलक्ष्मी टीम

7th May 2016

योग और सेक्स में बहुत गहरा संबंध होता है। योग केवल हमारी बॉडी को ही फिट नहीं रखता है, बल्कि सेक्स के दौरान होने वाली बोरियत को भी दूर करता है। बोन केयर की डॉ रेखा श्रीवास्तव का कहना है कि कामोत्तेजना को बढ़ाने के लिए और सेक्स के दौरान होने वाली समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए योग एक अच्छा साधन है।

 

मोटापे के कारण सेक्स प्राब्लम्स

सेक्स केवल हमें संतुष्टि ही नहीं देती है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होता है। परफेक्ट सेक्स के लिए जरूरी है कि उसे पूरी उत्तेजना और मन से किया जाए, पर आज की व्यस्त दिनचर्या के चलते शरीर में इतनी थकान हो जाती है। कि सेक्स में उत्तेजना की कमी हो जाती है। जिसके चलते कई बार रिश्तों में दूरियां आ जाती है। सेक्सेसफुल सेक्स के लिए जानें कुछ योगा टिप्स जो आपके दिन और रात दोनों को खूबसूरत बनाते हैं।

 

उष्ट्रासन

प्रणाली: ब्रजासन की मुद्रा अपनायें। घुटनों के बल खड़े हो जायंे। दोनों घुटनों के बीच इतना फासला रखें कि कंधे की चैड़ाई में समानांतर हो। दोनों हाथों को कमर पर रखें। हाथ की मुद्रा कुछ ऐसी हो कि आपकी उंगलियों पेट की तरफ हों और अंगूठे रीढ़ की हड्डी पर मिलकर जाये। लंबी सी सांस खींचें। अब कमर को पीछे की ओर मोड़ें। कमर को पीछे की ओर मोड़ने का अभ्यास धीरे-धीरे करें। जब कमर के उपर का हिस्सा घुटनों के समानांतर मुड़ने लगे, तो दोनों हथेलियों को तलवों पर ले जाएं। सांस छोड़ें और इसे फिर करें। प्रारंभ में यह आसन एक ही बार करना चाहिए।

 


अर्धकर्मासन
ओं कवज्रासन में बैठिए। इसके बाद दोनों हाथों को जोड़कर दोनों कानों के पास लगाकर सिर के उपर उठाइए। इसके बाद नमस्कार भंगिमा में कोहनी जितनी दूर संभव हो सके सीधा रखते हुए सामने की तरफ धीरे-धीरे झुकते हुए सिर व हाथ को जमीन पर रखिये। इस अवस्था में पेट व सीना घुटनों से अच्छी तरह दबाव बनाते हुए लगे रहें। नितंब भी एड़ियों के साथ लगे रहें। श्वास-प्रश्वास स्वाभाविक रखते हुए यह आसन 30 सेकेण्ड समय देते हुए दिनभर में 3 अथवा 4 बार किजिए। प्रत्येक बार करते समय एक बार श्वसन कीजिए।

 

कामोत्तेजना बढ़ाने के लिए पदमासन
प्रणालीः भूमि पर कंबल या दरी को चार परतों में मोड़कर बिछा लें। इस पर दोनों टांगों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाइये। अब दायीं टांग को पिंडली और पैरों से पकड़कर धीरे-धीरे घुटने पर से मोड़े। अब दाहिने पैर के गट्टे और पंजे को पकड़ें और दाहिनी टांग को थोड़ा उपर उठाते हुए अंदर की ओर खींचिए। फिर दाहिने पैर की एड़ी बायीं जांघ की जड़ से लगाकर कस लें। अब बायीं टांग को घुटने से मोड़कर गट्टे को बायें हाथ से तथा पंजे को दाहिने हाथ से पकड़कर थोड़ा उपर उठाइये। इसके बाद बायें पैर की एड़ी को दायीं जांघ की जड़ से सटा दीजिए। फिर ज्ञान मुद्रा में उगंलियों को घुटनों पर रखिये।

 

स्वादिष्टान चक्र
प्रणालीः यह आसन नाभी के नीचे की तरफ होती है। इसमें आप ज्ञानमुद्रा या सुखासन की स्थिति में बैठ जायें और ध्यान केन्द्रित करते हुए 51 बार ओम् का उच्चारण करें। इससे श्वेत प्रकाश स्वादिष्टान में प्रवेश करेगी और जिज्ञासा बढ़ेगी।

 

हलासन
प्रणालीः हलासन के लिए आप श्वासन मुद्रा में जमीन पर लेट जायें और दोनों हाथों को शरीर के पास रखकर हाथ के तालु को उपर करें। फिर दोनों पैरों को जोड़े हुए धीरे-धीरे उठाइये एवं कमर, पीठ जमीन से उठाकर पैर के तलवे को सिर के पीछे से जमीन पर सटाइये। इस अवस्था में आपके होंठ वक्षस्थल से स्पर्श करें। सामान्य सांस लेते हुए इस आसन को 20 से 25 सेकेण्ड तक ही करें। प्रत्येक हलासन के बाद एक बार श्वासन जरूर करें।

 

आकर्ण धनुरासन
प्रणालीः यह आसन करने के लिए दोनों हाथों को फैलाकर बैठ जायें और इसके बाद दाहिने हाथ से बायें पैर के अंगूठे को पकड़िये और फिर इसके बाद दाहिने हाथ के नीचे से बायें हाथ की सहायता से दाहिनें पैर के अंगूठे को पकड़ते हुए दाहिने पैर को घुटने से मोड़कर बायें घुटने पर रखिये। इसके बाद बायें हाथ से दाहिने पैर को तानकर बायें कान के पास लें जाएं। बायीं कोहनी उपर की तरफ उठी रहेगी। बायें पैर को सीधा ही रखें। इसे 20 से 30 सेकेण्ड तक कीजिए।

 

स्ट्रेस के कारण सेक्स में प्राब्लम्स
शवासन के लिए आप पेंट के बल दोनों हाथों और पैरों को फैलाकर जमीन प आंखें बंद करके लेट जाएं और सभी अंगों को ढीला छोड़ दीजिए। फिर इसके बाद श्वासन करें यानी 15 से 20 सांस पर ध्यान केन्द्रित करके गहरी सांस लें और फिर उसके बाद मन शांत करके 10 मिनट तक लेटे रहें, फिर उठें। याद रहे कि शवासन शुरू करने से पहले और खत्म करने के बाद कुछ मिनट के लिए विश्राम करना न भूलें।

 

 

 

पर्वतासन
प्रणालीः पर्वतासन करने के लिए आप सबसे पहले जमीन पर बैठ जाएं। घुटनों के बल और इसके बाद सांसें भरकर अपने दोनों हाथों को उपर की तरफ ले जाएं और इसी अवस्था में बने हुए जितनी देर सांस रोक सकते हैं। जबरदस्ती नहीं, उतनी देर रोकें, फिर उसे धीरे-धीरे सांस निकालते हुए दोनों घुटनों की तरफ वापिस ले आयें।

 

अनुलोम विलोम
प्रणालीः दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिनी नासिका को और बायीं नासिका को अनामिका या मध्यमा से बंद करें। हथेली को नाक के सामने थोड़ा उपर उठाकर रखिये। अनुलोम विलोम प्राणायाम को बायीं नासिका द्वारा शुरू करना चाहिए। अंगूठे से दाहिनी नासिका को बंद कीजिए एवं बायीं नासिका से धीरे-धीरे श्वास भीतर खींचे। श्वास भीतर लेने के बाद अनामिका या मध्यमा के द्वारा बायीं नासिका को बंद कर दाहिनी नासिका के द्वारा श्वास को बाहर छोड़िये और ठीक इसके विपरीत अर्थात् दाहिनी नासिका से श्वास लेकर बायीं नाक से छोड़ें।

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