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नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब

अशोक चक्रधर

25th May 2017

अनाड़ी जी, जो लोग जीवन में प्रेम का महत्व नहीं समझते, उनसे आप क्या कहेंगे?
संगीता शर्मा, गाजियाबाद

जो प्रेम नहीं करता,
जीवन से पलायन है,
ये प्रेम और क्या,
जीवन का ही गायन है।
सांसें नहीं ज़रूरी
जो हमको रखें जि़ंदा,
जीवन की धमनियों में
वह प्रेम-रसायन है।

अनाड़ी जी, आपकी नज़र में कौन ज़्यादा महान है, एक घरेलू महिला या सफलता के शिखर पर पहुंची महिला?
भावना जायसवाल, नैनीताल

आपके सवाल में
एक घरेलू महिला के
मन का मलाल है,
लेकिन सवाल के अंदर भी
एक सवाल है,
कि पुरुष हो या महिला
जो भी अपनी सफलता को
शिखर तक ढोता है,
क्या उसका घर नहीं होता है?
घरेलू महिला भी शिखर पर हो सकती है,
हौसला और हिम्मत हो
तो सबको धो सकती है।
तराशें अपनी प्रतिभा मेहनत और लगन,
फिर अपनी है धरती अपना है गगन।
जिसकी मुट्ठी में
घर का आसमान है,
ऐसी हर महिला महान है।

अनाड़ी जी, कहते हैं कि जिस घर में साली न हो, उस घर में शादी नहीं करनी चाहिए। क्या आप भी इससे सहमत हैं?
संजना, देहली सुजानपुर, कानपुर

भविष्य का पति
साली को नहीं
भविष्य की घरवाली को देखता है,
ये बात दूसरी है कि
बाद में जीजू बनकर
स्नेह से आंखें सेकता है।
हम साली की अनिवार्यता से
सहमत नहीं हैं,
क्योंकि सहेलियां भी तो
वहीं कहीं हैं।

अनाड़ी जी, प्रेम में धोखा खाने के बाद आत्महत्या करने वालों के लिए क्या कहेंगे?
शालिनी यादव, लखनऊ

आत्महत्या करने वाले होते हैं कायर,
जीवन गाड़ी के फटे हुए टायर।
जि़ंदगी के अर्थ भूल जाते हैं,
कूद जाते हैं, कट मरते हैं
बेचारे बिना विचारे झूल जाते हैं।
दोस्त! अगर धोखा देने वाले के
जीवन में कोई और है,
तो तेरे लिए भी तो
कहीं न कहीं ठौर है।
धोखा देने वाले की यही सज़ा है,
कि तेरे स्वागत में
जीवन का उससे बेहतर मज़ा है।
पछताए तो माफ करना
वरना अपना रास्ता साफ करना।
स्वयं को सोच की ढाल देना,
और आत्महत्या को टाल देना।

आपका फेसबुक पेज इतना सूना सा क्यों है, क्या आपके पास अपने पेज को देखने का वक्त नहीं है?
दीपा सहाय, ग्रीन पार्क, दिल्ली

कभी यहां जाता हूं
कभी वहां जाता हूं,
याद ही नहीं रहता
कहां कहां जाता हूं।
प्राय: रहता हूं स्टेज पर,
लेकिन जब बैठता हूं कुर्सी-मेज पर
तो ज़रूर आता हूं अपने पेज पर।
ऐसा नहीं है कि मेरे पास
हर वक्त कोई थीम नहीं है,
पर मेरे पास कोई टीम नहीं है।
सक्रिय रहूंगा, जब तक हूं भू पर,
पेज को सूना तो मत कहो
चाहने वाले हैं दो लाख से ऊपर।

अनाड़ी जी, पति इन दिनों गुमसुम रहते हैं, क्या करूं?
शिखा दीक्षित, पंचकुला, हरियाणा

तड़के गए थे गुमसुम
लौटे हैं रात करके,
जैसे कोई दुखी हो
कोई वारदात करके,
रूठे हुए हों शायद
तुमको पता नहीं हो,
देखो तो सही उनसे
थोड़ी सी बात करके।

आपकी कविताओं में सिर्फ हास्य नहीं है, बल्कि आक्रोश भी नज़र आता है, ऐसा क्यों?
रमा शुक्ला, कटवारिया सराय, नई दिल्ली

हम आक्रोश से अकड़े हैं,
ये तो आप सही पकड़े हैं!
पर आक्रोश की जो बात
होश और हंसी में कही जाती है,
वही जल्दी असर दिखाती है।
मेरा ये नुस्खा पतिदेव पर आज़माना,
फिर मुझे अपना रिपोर्ट कार्ड दिखाना।

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