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क्या है एंडोमीट्रियोसिस और क्या है इसका इलाज

ऋचा कुलश्रेष्ठ

3rd June 2016

एंडोमीट्रियोसिस महिलाओं में होने वाली ऐसी स्थिति है जिसमें युटेरिन कैविटी एंडोमीट्रियम को ढंकने वाली परत पेट, ओवरीज, फैलोपियन ट्यूब्स के बाहर फैल जाती है, जिससे हॉर्मोनों में चक्रीय बदलाव प्रभावित होते हैं। एंडोमीट्रियोसिस लगातार बिगड़ने वाली बीमारी है। इसलिए, जैसे ही इसका पता चले, जल्द से जल्द बच्चा पैदा करने की सोच लें।

 

एंडोमीट्रियोसिस यानी गर्भकाल अस्थानता एक ऐसी स्थिति है जिसमें युटेरिन कैविटी एंडोमीट्रियम को ढंकने वाली परत पेट, ओवरीज, फैलोपियन ट्यूब्स के बाहर रेक्टम, वजाइना, यूरिनरी ब्लैडर, सर्विक्स, वल्वा के पास और कभी-कभार ऐब्डोमिनल स्कार्स आदि में पाई जाती है। यह टिश्यू माहवारी के दौरान बनता है और बह जाता है जिससे हॉर्मोनों में चक्रीय बदलाव प्रभावित होते हैं। गर्भाशय के अंदर का एंडोमीट्रियम वजाइना के जरिए सूख जाता है लेकिन इन प्रभावित क्षेत्र में पेट के अंदर स्राव होता है और एंडोमीट्रियोटिक सीस्ट्स, अधेशंस, इन्फ्लेमेशन, स्कैरिंग और आंत संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं।

एंडोमीट्रियोसिस के लक्षण क्या-क्या हैं?

माहवारी से पहले या माहवारी के दौरान दर्द होना
संभोग के दौरान दर्द होना
बांझपन
माहवारी के दौरान पेशाब करने में दर्द होना
माहवारी के दौरान मल त्याग में दर्द होना
दस्त, कब्ज, मतली जैसी अन्य जठरांत्र गड़बड़ियां

उपचार के तरीके

  • एंड्रोमीट्रियोसिस का कोई इलाज नहीं है, लेकिन लक्षण के अनुसार इसके उपचार के तौर-तरीके उम्र और संबंधित समस्याओं पर निर्भर करते हैं।
  • उपचार के विकल्प सिर्फ चिकित्सीय प्रबंधन हैं, जिसके तहत तीन महीने तक नियमित रूप से खाने की गोलियां दी जाती हैं ताकि मासिक स्राव और दर्द कम हो। इससे कुछ आराम हो सकता है। हालांकि, मरीज का तय समय पर परीक्षण किया जाता है।
  • प्रोजेस्टीन ही एकमात्र चिकित्सा है जिसमें डिवाइस युक्त अंतर्गर्भाशयी प्रोजेस्टीन या सिर्फ प्रोजेस्टीन की सुइयां ही एस्ट्रोजेन के असर को कम कर सकती हैं।
  • डिपो प्रेपरेशन के तौर पर जीएनआरएच अगोनिस्ट शॉट्स हर महीने या तीन महीने पर दिया जाता है जिससे माहवारी नहीं होती। इससे दर्द तथा एंडोमीट्रियोटिक सिस्ट्स से राहत मिलती है।

सर्जरी से राहत मिलती है? क्या सर्जरी की सलाह दी जाती है?

सर्जरी आखिरी विकल्प है और सभी चिकित्सकीय उपाय नाकामयाब हो जाएं तो सर्जरी कराने को कहा जाता है। लैप्रोस्कॉपी की जाती है और एंडोमीट्रियोटिक स्पॉट्स हटा दिए जाते हैं। सर्जरी में किसी भी तरह के एडहीयरेशंस या स्कैरिंग ठीक किए जा सकते हैं जिससे सब सामान्य हो जाता है। कुछ मामलों में बड़ी एंडोमीट्रियोटिक सिस्ट्स होती हैं जिनसे दर्द, बेचैनी और गर्भधारण में परेशानी होती है। लैप्रोस्कॉपी से इन सब को ठीक किया जा सकता है।

एंडोमीट्रियोसिस और गर्भधारण

अगर आपकी उम्र बच्चा पैदा करने की है तो सलाह है कि आप देर नहीं करें क्योंकि एंडोमीट्रियोटिस में आंतरिक रक्त स्राव की वजह से समय के साथ-साथ शारीरिक संरचना बिगड़ती जाती है और ट्यूब और ओवेरियन के बीच बाधा पैदा हो जाती है। कई बार स्कैरिंग से ट्यूब बंद हो जाता है और अंडाणुओं और शुक्राणुओं का मिलन और निषेचन नहीं हो पाता है जो बांझपन की वजह बनती है। ट्यूब के अंदर रक्त स्राव से हाइड्रोसैल्पिंग्स बनते हैं और बांझपन की शिकायत होती है। गर्भाशय के अंदर बार-बार रक्त स्राव होने से एंडोमीट्रियोटिक सिस्ट्स बनते हैं और इससे भी अंडाणुओं की गुणवत्ता खराब होती है।

एंडोमीट्रियोसिस लगातार बिगड़ने वाली बीमारी है। इसलिए, जैसे ही इसका पता चले, जल्द से जल्द बच्चा पैदा करने की सोच लें।

(डॉ. इंदिरा गणेश, निदेशक, आइरेन आईवीएफ सेंटर, सफदरजंग एन्वक्लेव, दिल्ली से बातचीत के आधार पर)