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ब्रेड्स के बदलते अंदाज़

विजया मिश्रा...कुछ खट्टी कुछ मीठी

24th June 2016

इंडियन ब्रेड में कुछ नाम वही हैं जो आप अक्सर अपने खाने में इस्तेमाल करते हैं जैसे- चपाती, भटूरा, फुलका, कुलचे, पूरी, पराठा, तो वहीं बे्रड्स की और भी वैराइटी बाजार में पकड़ बना चुकी है।

ब्रेड्स के बदलते अंदाज़

इस बार मैं आपको ले जाने वाली हूं ब्रेड्स वर्ल्ड में यानी ब्रेड की दुनिया में। ब्रेड ऐसी चीज़ जो बरसों से आप और हम खाते आए हैं। ब्रेड बटर तो आज भी चाय की शान है। एक वो वक्त था जब ब्रेड के नाम पर एक ही ऑप्शन था और वो था व्हाइट ब्रेड। उस समय इस बात की फिक्र शायद ही किसी को थी कि व्हाइट ब्रेड हैल्दी है या अनहैल्दी। ब्रेड के साथ पहली बार परिचय मेरा डबलरोटी के नाम से हुआ। मुझे अच्छी तरह याद है, पहले डबलरोटी का जायका चाय में डिप किए बगैर नहीं आता था। फिर बटर के साथ टोस्ट हुई ब्रेड पसंद आने लगी। समय के साथ-साथ टेस्टी ब्रेड की स्टोरी में भी काफी ट्विस्ट आए।अब देखिए व्हाइट ब्रेड की जगह ब्राउन ब्रेड-बटर ताबड़तोड़ चलने लगा। बन का नाम भी आप लोगों ने सुना होगा। यूपी में इसे बंद मक्खन कहते हैं और चाय-बंद मक्खन किसी सुपरहिट जोड़ी से कम नहीं है। मैं और पापा अक्सर बन मक्खन खाते थे। बनारस, इलाहाबाद और लखनऊ के बन मक्खन का जायका भी ले चुकी हूं लेकिन जो बन मक्खन जायका एक बार मैंने बरेली जंक्शन पर कटिंग चाय के साथ लिया, वो मेरे ज़ुबान से हटा नहीं। ये जानते हुए भी कि मक्खन की मोटी परत बन के बीचों-बीच रखी है, मैंने उसे खाने में ज़रा भी हिचकिचाहट नहीं दिखाई। बन मक्खन से पहले ब्रेड का एक रूप पाव आया करती थी। इसे चाय में डिप करके लोग खाना पसंद करते थे हालांकि उसकी जगह धीरे-धीरे रस्क ने ले ली है। रस्क के टेस्ट की बात करें तो पहले रस्क में हल्की मिठास होती थी आज बड़ी नामी कंपनियों के रस्क बाजार में हैं, लेकिन अनलिमिटेड मिठास की वजह से मुझे यह पसंद नहीं आते। बन मक्खन जोड़ी के अलावा अब ब्रेड की जोड़ी दूसरी चीजों के साथ भी हिट हो रही है। जैसे- ब्रेड पकोड़ा, आलू टिक्की, खीरा, तरह-तरह के सॉसेज, चिकन ने जोड़ी बना ली है। ठेलों पर तले बर्गर से लेकर मॉल्स या रैस्ट्रो में मिलने वाले बड़े-बड़े ब्रांड्स के बर्गर, सैंडविचेज इसके ऐसे उदाहरण हैं जिससे पता चलता है कि वाकई ब्रेड्स को पसंद करने वालों की फेहरिस्त लंबी है।

ब्रेड की फेहरिस्त में एक और नाम है पाव ब्रेड, जिससे आप पावभाजी या वडा पाव का स्वाद चखते हैं। इसका जायका भी मजेदार है। यही नहीं, अक्सर हम पिज्जा खाते हैं और कहते हैं कि इस जगह की ब्रेड अच्छी है, सॉफ्ट है या यहां की बहुत हार्ड है। यानी कि अगर ब्रेड मस्त तो पिज्जा मस्त। ब्रेड के एक्सपेरिमेंट्स में सिर्फ ब्राउन ब्रेड का नाम ही नहीं, बल्कि अनगिनत नाम हैं। कभी आपने हॉट डॉग्स के बारे में सोचा है, इसमें इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर ब्रेड लंबी होती है। इसके अलावा अब ब्रेड की वैरायटी में लोग मल्टीग्रेन व्हीट, गार्लिक ब्रेड, मल्टीग्रेन हनी ओट्स, वगैरह ब्रेड्स को तवज्जो देने लगे हैं। ब्रेड की कैटेगरी की बात करेंगे तो ये कैटेगरी कम नहीं है। भारत में जहां मल्टीग्रेन ब्रेड, स्वीट बन ब्रेड, मिल्क टोस्ट वगैरह हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा हैं, वहीं फ्रांस में भी कई तरह की ब्रेड्स की कैटेगरी हैं। हकीकत ये है कि ब्रेड बगैर खाना अधूरा। क्योंकि ब्रेड को हिंदी में सिंपल रोटी ही बोला जाता है। अगर इंडियन ब्रेड की बात करें तो इसे आप अक्सर अपने खाने में इस्तेमाल करते होंगे लेकिन पुकारते अलग-अलग नामों से हैं जैसे चपाती, भटूरा, फुलका, कुलचे, पूरी, पराठा वगैरह वगैरह। शायद ही आप इन्हें ब्रेड की कैटेगरी में शुमार करते होंगे। अगर देखा जाए तो ये भी ब्रेड ही हैं। ब्रेड और रोटी में फर्क यह है कि रोटी रेशेदार होती है इसलिए यह स्वास्थ्यवर्धक होती है तो वहीं ब्रेड मैदे में खमीर उठा कर बनाई जाती है इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए उतनी अच्छी नहीं होती। हाल ही में एक मॉल में गई तो देखा कि ब्रेड बेकरी के सेक्शन में ही रेडीमेड रोटियां, कुल्चे, मिस्सी रोटी, तंदूरी रोटियों के सील्ड पैकेट भी उपलब्ध थे। ज़रा सोचिए पहले ये ब्रेड स्थानीय बेकरी में बनते थे। लेकिन यह आज बड़ी इंडस्ट्री में बदल गई है। कई बड़ी कंपनियां ब्रेड वल्र्ड में अपने जायके को नंबर वन बता रही हैं। हाल ही में एक रिपोर्ट आई कि ब्रेड में कुछ ऐसे तत्व हैं जो सेहत के लिहाज से ठीक नहीं हैं। हालांकि ब्रेड कंपनियों का दावा है कि उनकी ब्रेड स्वास्थ्य संबंधी सभी मानकों पर पूरी तरह से खरी उतरती है। उम्मीद करती हूं ब्रेड में स्वास्थ्य संबंधी ऐसे कोई भी हानिकारक तत्व नहीं होंगे और ब्रेड प्रेमियों की ये दीवानगी यूं ही जारी रहेगी।