बच्चों को सिखाएं अपनी भावनाएं व्यक्त करना

डॉ. समीर पारिख

28th June 2016

बच्चे काफी बड़े होने तक अक्सर अपनी भावनाएं ठीक प्रकार से व्यक्त नहीं कर पाते हैं और अगर कोई उनकी बात समझ नहीं पाता है तो उन्हें बहुत बुरा लगता है। ऐसे में उन्हें अपनी बात को अभिव्यक्त करना सिखाना अभिभावकों का ही दायित्व होता है।



हमारी जिंदगी में भावनाओं की अहम भूमिका किसी से छिपी नहीं है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण है इन भावनाओं की पहचान करने, जाहिर करने और प्रभावी ढंग से उन्हें विनियमित करने की जरूरत। हालांकि कुछ परिस्थितियों में यह हम वयस्कों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन सकती है। बात जब बच्चों की हो तो यह और भी मुश्किल और गंभीर हो जाती है इसलिए अभिभावकों के लिए निम्न बिंदुओं को ध्यान में रखना लाभदायक हो सकता है -


भावनात्मक जागरूकता प्रोत्साहित करें
अगर आप अपने बच्चे को उनकी भावनाएं व्यक्त करना सिखाना चाहते हैं तो उनके साथ इसके बारे में एक चर्चा शुरू करना चाहिए। हमें बच्चों से भावनात्मक जागरूकता के बारे में बात कर भावनाएं जाहिर करने के वैकल्पिक तरीकों के बारे में बताना चाहिए।


अपेक्षाएं करना उचित नहीं
विकास के उनके चरण को ध्यान में रखते हुए अभिभावक होने के नाते इस बात को समझना हमारे लिए आवश्यक है कि बच्चे वयस्कों की तरह अपनी भावनाएं और अहसास व्यक्त करने के अभ्यस्त नहीं भी हो सकते हैं। इसलिए उनसे ऐसी अपेक्षाएं करना हमारे लिए उचित नहीं होगा।


संकेतों के प्रति सजग रहें
ऐसे बच्चे जो अपनी भावनाओं को व्यक्त करने से कतराते हैं, संभवत: उनकी ये भावनाएं हावभाव या शारीरिक शिकायतों, रोने की आदत, गुस्से की बात, बढ़ते चिड़चिड़ेपन में बढ़ोतरी के तौर पर जाहिर होती हैं। इसलिए अभिभावक होने के नाते हमें चेतावनी के इन संकेतों के प्रति सजग रहने की जरूरत है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

भावनाएं जाहिर करने के मौके दें

अक्सर शब्द हमारे समाज में संचार का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। मानवीय अनुभवों को हमेशा पूरी तरह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता क्योंकि कुछ अनुभव और भावनात्मक अवस्थाएं शब्दों से परे होती हैं। अपनी भावनाएं मौखिक रूप से जाहिर करने में अक्षम बच्चों के लिए कला, नाटक, नृत्य, गतिविधियों, संदर्भ या किसी अन्य प्रकार के कलात्मक और वैकल्पिक माध्यमों से भावनाएं व्यक्त करना अधिक आसान है।


बच्चों की मदद करें
हमारी रोजाना की जिंदगी में ऐसे कई अवसर होते हैं जिनका प्रयोग बच्चों को भावनाएं नियमित रूप से व्यक्त करने की कुशलता में सुधार करने के लिहाज से किया जा सकता है। संदर्भों, कहानियों और वास्तविक जीवन के अनुभवों का प्रयोग कर हम बच्चों को 'भावनाएं व्यक्त करने वाले शब्दों के बारे में जानने और उनकी पहचान करने में मदद कर सकते हैं और भावनाएं व्यक्त करने के विभिन्न तरीकों को भी तलाश सकते हैं।


भावनाओं का उपहास न करें
जब हम बच्चों को भावनाएं जाहिर करने के लिए प्रेरित करते हैं तो यह जरूरी है कि बच्चों को बात करने का सुरक्षित माहौल मुहैया कराएं। बच्चे को किसी भी तरह का डर महसूस नहीं होना चाहिए। इसके लिए हमें उनकी भावनाओं का मजाक उड़ाने या नकल करने से बचने की जरूरत है। इसके बजाय हमें उनकी भावनाओं को महत्व देने के साथ ही उन्हें समझने और उन्हें सम्मान देने की जरूरत है ताकि उन्हें व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया जा सके।


उन्हें सुनने वाले कान मुहैया कराएं
सुनिश्चित करना होगा कि हम बच्चों द्वारा किसी भी भावना को जाहिर करने की कोशिश को नकारें नहीं। इसके लिए हमें एक अच्छा श्रोता बनना होगा ताकि हम उनकी मदद के लिए उपलब्ध एक स्रोत बन सकें जिनसे बच्चे आसानी से जुड़ सकें।


भावना व्यक्त करने के वैकल्पिक तरीके
बच्चों का दिमाग अत्यंत संवेदनशील होता है और वे अपने आसपास की चीजों को देखकर काफी तेजी से सीखते हैं। इसलिए अभिभावक होने के नाते आपके लिए बच्चों के सामने अपनी भावनाएं जाहिर करने के वैकल्पिक तरीके प्रदर्शित करना महत्वपूर्ण है ताकि बच्चे उनसे सीख सकें। 

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