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चूने से लगाएं रोगों को चूना

गृहलक्ष्मी टीम

29th June 2016

चूने से लगाएं रोगों को चूना

 

क्या आपको पता है ? चूना एक खनिज पदार्थ है जो खानों से निकले हुए एक प्रकार के पत्थर से बनाया जाता है। चूना सीप, घोंघे आदि के ऊपरी खोल को भी जलाकर बनाया जाता है। औषधि के रूप मे दोनों प्रकार का चूना प्रयुक्त होता है। चूने के पानी में पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन सी होता है। यह अनेक रोगों को दूर करने में उपयोगी है, जिनमें प्रदर रोग, यक्ष्मा, कील-मुंहासे, कान का दर्द, तिल्ली की वृद्धि, चुन्ने कीड़े, घाव, चेचक, आदि शामिल हैं। इसके औषधीय प्रयोग निम्नलिखित हैं-

 

  • चूने के निथरे हुए पानी में दूध मिलाकर कान में पिचकारी देने से कान का बहना तत्काल रुक जाता है।
  • चूने के निथरे हुए पानी का दो-दो चम्मच की मात्रा में सेवन करें। अम्लपित्त रोग में काफी लाभ होगा।
  • चूने के 20 ग्राम पानी में 100 ग्राम साफ पानी मिलाकर योनि को पिचकारी से धोने पर श्वेत प्रदर दूर हो जाता है।
  • थोड़े से दूध में चूने का पानी मिलाकर सुबह-शाम कुछ दिनों तक पिएं। क्षय रोग और यक्ष्मा रोग में काफी लाभ होगा।
  • जरा से चूने में अलसी का तेल मिलाकर आग से जले हुए स्थान पर लगाएं। जलन और पीड़ा दूर हो जाएगी।
  • रुई के फाहे को चूने के पानी में भिगोकर चेचक के व्रण पर रखने से चेचक के गहरे घाव नहीं पड़ते।
  • जरा से चूने में थोड़ा सा शहद मिलाकर कील-मुंहासों पर लगाने से वे शीघ्र ही दूर हो जाते हैं।
  • यदि बच्चे की गुदा में चुन्ने कीड़े पड़ गए हों, तो उसके गुदा में चूने के पानी की पिचकारी देने से लाभ होता है।
  • चूना, सज्जी, तूतिया और सुहागे को पानी में पीसकर शरीर के मस्से पर लगाएं। मस्से कुछ ही दिनों में दूर हो जाएंगे।
  • चूने के निथरे हुए पानी में तिल का तेल और शक्कर मिलाकर पिलाने से मूत्र के समय होने वाला कष्ट दूर हो जाता है।
  • ढाई तोला चूने को 6 तोला मिश्री के साथ खरल करके आधा किलो पानी में मिलाकर कागदार शीशी में भरकर काग बंद कर दें। जब पानी निथर निथर जाए तो 15-20 बूंद उस पानी में थोड़ा दूध मिलाकर बच्चे को पिलाने से उदर रोग नष्ट हो जाते हैं।
  • यदि अजीर्ण के कारण पेशाब रुक गया हो या पीला पड़ गया हो, खट्टी डकारें आती हों और वमन हो, तो दूध में चूने का पानी मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।
  • चूने और शहद को कपड़े पर लगाकर पसली के दर्द वाले स्थान पर रखकर पट्टी बांधने से पसली का दर्द मिट जाता है।
  • चूने को नींबू के रस में मिलाकर लगाएं। कुछ ही देर में मकड़ी का जहर उतर जाएगा।
  • चूने और नौसादर को मिलाकर सुंघाने से कफ एवं वात का सिर दर्द और हर तरह की बेहोशी दूर हो जाती है।
  • चूने को शहद के साथ पीसकर तिल्ली पर लेप करके ऊपर से अंजीर के पत्ते बांधने से तिल्ली की वृद्धि नष्ट हो जाती है।
  • कली के 2 रत्ती चूने का सेवन तुलसी के पत्तों के रस, प्याज अथवा लहसुन के रस के साथ करने से अमाशय के विजातीय द्रव्य मल द्वारा बाहर निकल जाते हैं।
  • नीम के पत्तों के रस में 1 रत्ती चूना मिलाकर उसकी 1-2 बूंदें कान में डालने और डंक पर बार-बार लगाने से बिच्छू का विष उतर जाता है।
  • अगर चाकू आदि से गहरा घाव पड़ गया हो तो चूने को मक्खन और सोंठ के साथ मिलाकर घाव में भरने से खून का बहना बंद हो जाता है और घाव ठीक हो जाता है।
  • कली के 2 रत्ती चूने में तुलसी का रस या शहद मिलाकर चाटने से संग्रहणी रोग में लाभ होता है।
  • कली के 1 तोला चूने में ढाई तोला गोमूत्र मिला दें, फिर उसमें पिघला मोम डालकर मलहम बनाएं। इसे खाज, खुजली और घावों पर लगाने से बहुत लाभ होता है।
  • चूने के पानी में गुनगुना दूध और गोंद मिलाकर गुदा में पिचकारी देने से अतिसार का तत्काल निवारण होता है।
  • यदि किसी भी औषधि से वमन नहीं रुकता हो तो दूध में चूने का निथरा हुआ पानी मिलाकर पिलाने से रुक जाता है।

 

(साभार - साधना पथ)

 

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