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गुप्त नवरात्रि में ऐसे करें देवी मां की आराधना, रखें इन बातों का ध्यान

अर्चना चतुर्वेदी

5th July 2016

 

नौ शक्तियों के मिलन को ही नवरात्रि कहते हैं। ज्यादातर लोग केवल दो नवरात्रि (चैत्र व शारदीय नवरात्रि) को मानते हैं और पूजते भी हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि हिंदू धर्म के अनुसार एक वर्ष में चार नवरात्रि होती है। जिसमें से दो को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इन नवरात्रों में प्रलय एवं संहार के देव महादेव एवं मां काली की पूजा का विधान है। है। गुप्त नवरात्रि विशेष तौर पर गुप्त सिद्धियां पाने का समय है। साधक इन दोनों गुप्त नवरात्रि (माघ तथा आषाढ़) में विशेष साधना करते हैं तथा चमत्कारिक शक्तियां प्राप्त करते हैं। माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि में पूजा अर्चना करने से अपार सफलता मिलती है।

क्या है गुप्त नवरात्रि ?

हिन्दू धर्म के अनुसार हर साल चार नवरात्रि आती है। लेकिन आमजन केवल दो नवरात्रि (चैत्र व शारदीय नवरात्रि) के बारे में ही जानते हैं। माघ तथा आषाढ़ मास की नवरात्रि को ही गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। क्योंकि इसमें गुप्त रूप से शिव व शक्ति की उपासना की जाती है। आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा (5 जुलाई, मंगलवार) से होगा, जो आषाढ़ शुक्ल नवमी (13 जुलाई, बुधवार) को समाप्त होगी।

गुप्त नवरात्रि की प्रमुख देवियां

गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।

इन मंत्रों का करें जाप -

'ऊं ऐं हीं क्लीं चामुण्डाये विच्चे नम:'

'ऊं ऐं महाकालाये नम:'

'ऊं हीं महालक्ष्मये नम:'

'ऊं क्लीं महासरस्वतये नम:'

 

गुप्त नवरात्रि के दौरान न करें ये काम -

  • भूलकर भी इन दिनों में नाखून न काटें।
  • कन्याओं को अपना झूठा भोजन न दें।
  • मांस, व्यसन आदि का पान न करें।
  • बाल न कटवाएं और न हीं दाढ़ी बनवाएं।
  • झूठ बोलने से बचें।
  • किसी का अपमान न करें।

 

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