GREHLAKSHMI

FREE - On Google Play
OPEN

इंस्टेंट ब्यूटी के जाल में फंसती महिलाएं

अर्पणारितेश यादव (अलबेली)

8th July 2016

आज विज्ञापनी सुंदरता की बयार कुछ ऐसी चली, जिसने खूबसूरती के मायने ही बदल दिए ? बाजारी ताकतें बदलाव के इस दौर में खूबसूरती के इस हथियार का महिलाओं के खिलाफ जमकर प्रयोग कर रहीं हैं।


दोस्तों, कई दिनों से मैं देख रही हूं टीवी पर आजकल इंस्टेंट ग्लो व ब्यूटी पाने के कई विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं, जिसमें आप इंस्टेंट ब्यूटी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करके चंद सेकेंड में ही हुस्न की मल्लिका बन सकती हैं। फिर चाहे ओकेजन कोई भी हो और तो और, इनमें से कुछ तो ऐसे विज्ञापन हैं जो उन महिलाओं के दिल को छू जाएंगे जो बाहरी रूप सुंदर नहीं हैं। वो इसलिए क्योंकि इन विज्ञापनों में दिखाया जाता है कि किसी महिला को अपनी बदसूरती के कारण हमेशा असफलता हाथ लगी है, फिर चाहे वो अतिरिक्त गुणों से भरीपूरी क्यूं ना हो। अगर वो भी इंस्टेंट सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल करेगी तो सुंदर नजर आएगी। 

ऐसा नहीं है कि ये विज्ञापन पहले नहीं दिखाए जाते थे। पहले भी ऐसे विज्ञापन आते थे पर उनके आगे इंस्टेंट शब्द नहीं जुड़ा था। ऐसे विज्ञापनों को देखकर मैंने सोचा, चलो मैं भी कुछ ट्राई करती हूं। इसलिए मैंने भी बहुत नामी ब्रांड का इंस्टेंट ब्यूटी प्रोडेक्ट खरीदा और इस्तेमाल किया, पर ये क्या मेरे चेहरे पर तो कोई ऐसा ग्लो यानी चमक नजर नहीं आई, जिसको देखकर मैं बोलूं कि वाकई इस इंस्टेंट ब्यूटी में कोई दम है। ऐसे विज्ञापनों को देखकर और इस्तेमाल करने के बाद मैं समझ गई कि आज सौंदर्य प्रसाधन ब्रांडों ने अपने चकाचौंध भरे विज्ञापन दिखाकर देश की महिलाओं की सोच और समझ को ही बदल कर रख दिया। आप सोच रहे होंगे कि इसमें सोच-समझ वाली बात कहां से आ गई।

अरे, भई ऐसे विज्ञापनों के माया जाल में फंस कर आज हर महिला सोच और समझ चुकी है कि अगर वो इंस्टेंट ग्लो व ब्यूटी वाली चीजों का प्रयोग नहीं करेगी तो सुंदरता से वंचित रहेगी। जैसे मैं समझी थी। विज्ञापनी सुंदरता की बयार कुछ ऐसी चली है जिसने खूबसूरती के मायने ही बदल दिए? बाजारी ताकतें बदलाव के इस दौर में खूबसूरती के इस हथियार का महिलाओं के खिलाफ जमकर प्रयोग कर रही हैं। सौंदर्य की दुनिया का बाजार कुछ ऐसा सज गया है कि सौंदर्य प्रसाधन कंपनियां विज्ञापन में महिलाओं को यह संदेश देने लगी हैं कि अगर आप इंस्टेंट यानी तुरंत वाली सुंदरता पाना चाहती हैं तो जिन प्रसाधनों के आगे इंस्टेंट हो वो ही इस्तेमाल करें, नहीं तो सौंदर्य के मापदंडों पर खरी नहीं उतरेंगी और पीछे छूट जाएंगी। मतलब उनको खुले रूप में बताया जा रहा है कि उनका व्यक्तित्व जो भी है...जैसा भी है... काफी नहीं है! यानि कि सीधा सा सन्देश दिया गया कि कुछ खास ब्यूटी प्रोडक्ट्स इस्तेमाल कर महिलाएं खुद को सबसे अलग और खूबसूरत दिखा सकती हैं। 

पहले जहां यह कहा जाता है कि सुन्दरता देखने वालों की नजर में होती है और तन की सुन्दरता की जगह मन, विचार और वाणी की सुन्दरता ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। किंतु आज ये चीजें कहीं भी मायने नहीं रखती। अब तो बाजारवाद के युग में मन की सुंदरता पर तन की सुंदरता की परत कुछ इस तरह चढ़ गई है कि किसी को मन की सुंदरता से कोई लेना-देना नहीं है। उनको तो बस इंस्टेंट ब्यूटी से मतलब है। इसी बढ़ते बाजारवाद के कारण ही आज हर महिला इंस्टेंट ब्यूटी के जाल में फंसती जा रही है। मैं मानती हूं कि हर इंसान की अपनी एक शख्सियत होती है पर ऐसे में उसकी शख्सियत को किनारे रख कर उसकी खूबसूरती को कायम रखने की बात मेरे ख्याल से ऐसी बातें उसे शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर बना देती हैं।

वैसे भी हमारे समाज में भी महिलाएं सौंदर्य के इस जाल में फंसकर अनेक तरह की हीन भावना और असंतोष का शिकार हो रही हैं। ऐसे में इस तरह के विज्ञापन उनकी भावना को कितना ठेस पहुंचाएंगे, ये शायद हमारे जाने-माने ब्यूटी ब्रांडों को नहीं पता है। आज सुंदरता के बाजार का नजारा कुछ ऐसा हो चला है कि बाजार और उसकी पैदा हुई सोच के चलते महिलाएं सुंदरता की दुनिया में गोते खाने की तलाश में किसी भी सौंदर्य प्रसाधन का प्रयोग कर रही हैं और अपनी सुंदरता को बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। मेरा सवाल सिर्फ यह है कि आज बाजार में अपनी पकड़ बनाने के लिए ब्यूटी ब्रांड कंपनियां अपनी रणनीति में महिलाओं की वास्तविक सुंदरता के साथ खेल रहे हैं, क्या ये सही है? इस बारे में आप सब क्या कहते हैं? जरूर बताएं।