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झुमके की डंडी नुकीली है

मनोरमा मोहन

7th June 2017

झुमके की डंडी नुकीली है


हमारी शादी की 37वीं सालगिरह में मेरे पति ने मुझे झुमके उपहार में दिए थे। सभी ने दिल खोलकर मेरे झुमकों की तारीफ की। आज भी सोते समय मेरे पति मुझे अपनी बांह का सिरहाना देते हैं। उनके सीने से लगकर चैन की नींद सोती हूं और दिनभर की सारी थकान भूल जाती हूं।

एक दिन की बात है मैं रसोई में काम कर रही थी, उसी समय अचानक मेरी देवरानी ने मुझे चौंका दिया, 'दीदी! आपके एक कान का झुमका कहां है? उस वक्त मेरा ध्यान हलवा बनाने में था। मैंने बेफिक्री से कह दिया, 'झुमके की डंडी नुकीली है, बार-बार तुम्हारे भैया को चुभ जाती थी। इसलिए मैंने उसे उतारकर बेड के बगल वाले स्टूल पर रख दिया।

देवरानी मुंह घुमाकर हंसने लगी, लेकिन मेरी चुलबुली बहू तपाक से बोली, 'सच मम्मी, आप आज भी पापा से लिपटकर सोती हैं, तभी तो आप हरदम तरोताजा और खुश दिखती हैं। मैंने चौंक कर बहू को देखा। वह दोनों जोर-जोर से हंस रही थीं। झेंपने व शर्माने की बारी अब मेरी थी। बहू के सामने मैं शर्म से लाल हो गई और वहां से खिसकने में ही अपनी भलाई समझी।


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