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समय नहीं सेहत बचाएं

गीता सिंह

25th July 2016

फ्रोज़न या रेडी टू ईट फूड हमारे समय की बचत कर, भूख मिटाने का विकल्प तो देता है लेकिन कम समय में स्वादिष्ट भोजन खाने की हमारी यह चाहत सेहत के लिए तमाम खतरों को भी दावत दे देती है।



जब करने के लिए सामने बहुत सारे काम हो, तो एक चीज सबसे पीछे छूट जाती है, वह है खाना। व्यस्तताओं के बीच हमें खाने का वक्त भी नहीं मिलता। ऐसे में खाना पकाने के लिए वक्त निकाल पाना तो दूर की बात है। ऐसे में अक्सर लोग बाजार में बिकने वाले फ्रोज़न व रेडी-टू-ईट यानी खाने की तैयार चीजों पर निर्भर हो जाते हैं और अपनी भूख को तुरंत शांत करने के लिए इन उत्पादों के बेहद शुक्रगुजार भी होते हैं।

आजकल ऐसे लोगों की आबादी बेहद तेजी से बढ़ रही है, खासतौर से महानगरों और बड़े शहरों में, जहां काम का दबाव ज्यादा होने के साथ-साथ रोज लंबी दूरी भी तय करनी पड़ती है। ऐसे में वे थक कर खाना पकाने के काम से पीछा छुड़ाना चाहते हैं। महानगरों में ऐसे परिवारों की संख्या भी कम नहीं है जो पूरी तरह से पैकेज्ड रेडी-टु-ईट जंफूड पर निर्भर हो चुके हैं। लेकिन उन्हें इस बात का एहसास नहीं है कि ऐसा करके वे अपनी सेहत के साथ किस कदर समझौता कर रहे हैं।


नुकसान पहुंचाने वाले तत्व
कृत्रिम शुगर : ग्राहक अक्सर खाने की चीजों के पैकेट पर शुगर फ्री का लेबल देखकर खुश हो जाते हैं, लेकिन वे यह नहीं सोचते हैं कि इसमें कृत्रिम शुगर मिलाया गया है। डायबिटीज पीडि़त लोग तो इसे अपने लिए वरदान मान लेते हैं। मगर वे इस बात को लेकर जागरूक नहीं होते हैं कि सैक्रीन, ऐस्पारटेम और फ्रुक्टोस जैसी कृत्रिम शुगर उत्पादकों को आसानी से और कम कीमत पर उपलब्ध होते हैं। यही वजह है कि वे तकरीबन सभी रेडी-टू-ईट पैकेज्ड चीजों में इनका इस्तेमाल करते हैं, जो काफी हानिकारक होता है।


मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) : कृत्रिम अथवा प्राकृतिक दोनों रूपों में उपलब्ध है। मोनोसोडियम ग्लूटामेट खाने की प्राकृतिक चीजों का फ्लेवर बढ़ाता है। लेकिन इसके साथ समस्या यह है कि यह उत्पाद ब्लड-ब्रेन बैरियर को पार कर सकता है, जिससे लोगों को माइग्रेन की समस्या हो सकती है।


सोडियम नाइट्रेट : पैकेज्ड व रेडी-टू-ईट खाने की चीजों, खासतौर से मीट वाले उत्पाद की लाइफ बढ़ाने के लिए इसमें सोडियम नाइट्रेट मिलाया जाता है। सोडियम नाइट्रेट वाली चीजें खाने से बालों के झडऩे, त्वचा में एलर्जी, सिरदर्द और पेट की समस्याएं हो सकती हैं।


स्वस्थ पोषक तत्वों की कमी : पैकेज्ड खाने की चीजों की प्रॉसेसिंग इस तरीके से की जाती है ताकि इन्हें लंबे समय तक स्टोर किया जा सके जो खाने के लिए सुरक्षित और स्वादिष्ट रहें। इस प्रक्रिया के दौरान इसका ध्यान रख पाना संभव नहीं होता है कि इनमें पोषण भी बरकरार रहे। बड़े ब्रांड तो अपने उत्पादों में चीनी, नमक, फैट अथवा अच्छी क्वॉलिटी का सामान इस्तेमाल करते हैं, लेकिन सस्ते ब्रांड के मामले में इन चीजों की गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं होती है। ये उत्पाद बनाने वाली कंपनियां उत्पादों को लंबे समय तक ताजा जैसा बनाए रखने, उनका फ्लेवर बढ़ाने और टेक्सचर व रंग अच्छा दिखाने के लिए कृत्रिम शुगर, अधिक नमक, रंग व फैट इस्तेमाल करते हैं। इनके अधिक इस्तेमाल से बचें जब भी डिब्बाबंद या पैकेट वाली खाने की चीजें खरीदें तब अपने दिमाग में यह बात जरूर रखें कि यह आपकी सेहत के लिए खतरनाक है। अगर आप लगातार इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इसके लाजवाब स्वाद की आपको आदत लग सकती है। ऐसे में अपनी सेहत की खातिर ऐसी चीजों के लगातार इस्तेमाल और इसकी आदत में पडऩे से बचने की कोशिश करें।


खाने की आदतों में सुधार लाएं

  •  प्रॉसेस्ड मीट की जगह ताजे रोस्टेड लीन मीट का इस्तेमाल करें।
  •  डिब्बाबंद फलों की जगह ताजे फल खरीदें। 
  •  नाश्ते में अंकुरित अनाज, दूध और फल आदि का इस्तेमाल अधिक करें।
  •  होल ग्रेन आटा या ब्रेड खरीदें और व्हाइट ब्रेड के इस्तेमाल से बचें।
  •  खाना पकाने के लिए वक्त निकालें, कुकिंग के आसान तरीके अपनाएं अथवा कोई कुक रखें। 
  • खाना पकाने की शुरूआत छुट्टी वाले दिनों से करें और फिर धीरे-धीरे इसे रोज की आदत में बदलें।
  •  ऐसे स्नैक्स खरीदें जिनमें पोषक तत्वों की मात्रा अधिक हो। 

स्वास्थ्य की दृष्टि से घर में पके खाने का कोई जवाब नहीं होता। वहीं कृत्रिम चीजें तो हमेशा कृत्रिम ही रहेंगी। अगर आप अक्सर पैकेज्ड अथवा रेडी-टू-ईट फूड को इमरजेंसी के लिए खरीदकर इस्तेमाल के लिए रखना चाहती है तो कुछ बातों पर ध्यान अवश्य दें।

 1. रेडी-टू-ईट या फ्रोज़न फूड खरीदते समय पैकेट पर उसमें मौजूद आवश्यक तत्वों की मात्रा जांच लें। इन चीजों में सैचुरेटेड फैट, कैलोरी और सोडियम सीमित मात्रा में हो लेकिन फाइबर्स, विटामिंस और मिनरल की मात्रा ज्यादा होनी चाहिए क्योंकि ये सब स्वास्थ्य के लिए बेहतर होते हैं।

2. पैकेट पर मैन्यूफैक्चरिंग डेट, इस्तेमाल करने की अंतिम तारीख, पैकजिंग सील इत्यादि को अच्छी तरह जांच लें। साथ ही पैकेट कहीं से खुला तो नहीं है इस चीज को भी भली-भांति परख लें।


3. ऐसी चीजों को हमेशा डीप फ्रीजर में रखें और ध्यान रखें कि जब ये सब चीजें फ्रीजर में हो तो फ्रीज हमेशा ऑन रहना चाहिए।


4. यदि एक बार पैकेट खोल दिया है तो उसे पूरा सामाप्त कर दें, क्योंकि पैकेट खुलने के बाद एक निश्चित समय तक ही उसका इस्तेमाल किया जा सकता है। हकीकत यह भी है कि खुले पैकेट में खाना जल्दी खराब हो जाता है, साथ ही उसके स्वाद में भी कमी आ जाती है।

डॉ. कनिका मल्होत्रा के अनुसार जीवन को सिर्फ आसान बनाने वाली चीजों की तुलना करना काफी नहीं है बल्कि जीवन को स्वस्थ बनाने वाली चीजों को प्राथमिकता देना जरूरी है। कभी-कभी पैकेज्ड फूड का इस्तेमाल कर लेना कोई अपराध नहीं है, लेकिन अक्सर इस पर निर्भर रहना गलत है। आप शायद इनके लेबल पढ़कर खुद को संतुष्ट कर लेते होंगे जहां लिखा होता है कि इसमें ट्रांसफैट, प्रिजर्वेटिव या मोनोसोडियम ग्लूटामेट यानी एमएसजी नहीं मिलाया गया है, लेकिन इनमें ऐसे कई छिपे तत्व भी होते हैं जो अगर लंबे समय तक इस्तेमाल किए जाएं तो सेहत के लिए हानिकारक साबित होते हैं। तमाम अध्ययन यह बताते हैं कि प्रॉसेस्ड और रेडी-टू-ईट फूड का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से डायबिटीज, मोटापा और यहां तक कि कैंसर भी हो सकता है।

(डॉ. कनिका मल्होत्रा, सीनियर क्लीनिकल न्यूट्रीशनिस्ट) हेल्थ केयर एट होम, से बातचीत के आधार पर)

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