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कैसा हो आपका एंटी एजिंग रिजीम

संस्कृति सिंह

29th July 2016

बाजार में कई तरह की एंटी रिंकल क्रीम, एंटी एजिंग सीरम और एंटी एजिंग रिजीम उपलब्ध हैं, जो आपको युवा होने का एहसास दिलाएंगी और आपकी सुंदरता को चार-चांद लगाएंगी। लेकिन उनका सही चयन करना भी उतना ही जरूरी है।

कैसा हो आपका एंटी एजिंग रिजीम

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे त्वचा में झुर्रियां नज़र आने लगती हैं। ऐसे में आप चिंतित हो जाती हैं। पर अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। बाजार में कई तरह की एंटी रिंकल क्रीम, एंटी एजिंग सीरम, और एंटी एजिंग रिजीम उपलब्ध हैं, जो आपको युवा होने का एहसास दिलाएंगी और आपकी सुंदरता को चार-चांद लगाएंगी, लेकिन उनका सही चयन भी उतना ही जरूरी है। तो आइये बताते हैं कि एंटी रिंकल क्रीम, एंटी एजिंग सीरम, एंटी एजिंग रिजीम का चयन और इस्तेमाल कैसे करें। 

एजिंग के विभिन्न रूप :- स्किन स्पेशलिस्ट के आधार पर चेहरे की स्किन की उम्र को हम तीन पार्ट में बांट सकते हैं। पहले पार्ट को हम कहते हैं मियो एजिंग। दरअसल इसकी शिकायत उन युवतियों या महिलाओं को ज्यादा होती है, जिनका कार्य मार्केटिंग, एयर हॉस्टेस या रेसेप्सनिस्ट का है, क्योंकि इन्हें अपने कस्टमर्स से डार्केस्ट डील करनी होती है और इसके लिए अक्सर बनावटी हंसी का भी सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में उनकी एक्सप्रेशन लाइन्स यानी आंख और मुंह के आसपास की कोशिकाओं पर प्रभाव पड़ता है। दूसरे पार्ट को हम प्रोमो एजिंग कह सकते हैं। इसका अर्थ यह है कि जब महिला 35 से 40 की उम्र के पड़ाव पर पहुंचती है, तब उनकी स्किन के टिश्यू यानी ऊतक कमजोर हो जाते हैं, जिसके कारण इस उम्र में स्किन ढीली पड़ जाती है। तीसरे पार्ट को हम हार्मोनल एजिंग कहते हैं। यह शरीर में हॉर्मोनल बदलाव के कारण होता है। इसे पोस्ट मेनोपोजल एजिंग भी कहते हैं। इसमें स्किन की पहली परत काफी पतली हो जाती है। चेहरे पर झांइयां होने लगती हैं। फिर स्किन का रूखापन बढऩे लगता है। चेहरे की रूपरेखा बदलने लगती है। नाक व गालों की हड्डी आदि में थोड़ा बदलाव हो जाता है।

सामान्य उपाय :- त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार 30 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते चेहरे की त्वचा में शुष्कता बढ़ती जाती है। इसके लिए क्लीजिंग, टोनिंग, मॉइश्चराइजिंग के अलावा हाइड्रेटिंग जरूरी है। हाइड्रेटिंग यानी चेहरे की शुष्कता को खास तौर पर बनाई गई हाइड्रेटिंग क्रीम लगा कर दूर की जाती है। तनावपूर्ण जीवन के कारण आंखों के नीचे काले घेरे, हल्की सूजन और झुर्रियां हो जाती हैं। इससे बचने के लिए अंडरआई क्रीम का इस्तेमाल करें। यवन एस्थेटिक की फाउंडर और मेडिकल हेड डॉ. माधुरी अग्रवाल ने एंटी रिंकल क्रीम, सीरम, रिजीम को चुनने के कुछ तरीके बताएं हैं जैसे -

  • दिन की शुरुआत हमेशा सनस्क्रीन और मॉइश्चराइजर से करनी चाहिए। आपकी त्वचा पर सबसे ज्यादा नुकसान बाहरी वातावरण और सूरज की तेज रोशनी से होता है। इसलिए सबसे पहला एंटी एजिंग प्रोडक्ट सनस्क्रीन और मॉइश्चराइजर होना चाहिए।
  • सनस्क्रीन खरीदते वक्त उसमें यूवीए और यूवीबी किरणों से सुरक्षा देने की क्षमता हो और मॉइश्चराइजर भी हो क्योंकि मॉइश्चराइजर आपके चेहरे की फाइन लाइन्स को कवर करता है। त्वचा के खुरदरेपन और झुर्रियों से बचने के लिए हर 2 से 3 घंटे में सनस्क्रीन एप्लाई करें।
  • अब एक-एक करके अपनी त्वचा की समस्या को समझें और फिर इसके उपाय करें। अगर आपको झाइयों की समस्या है तो आप पहले एंटी पिगमेंटेशन प्रोडक्ट का यूज करें या रिंकल की समस्या होने पर पहले एंटी रिंकल क्रीम का प्रयोग करें।
  • अपनी त्वचा के अनुरूप ही प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना चाहिये। यदि किसी प्रोडक्ट से आपको रैशेस या खुजली होने लगे तो उसका इस्तेमाल बंद कर दें।
  • डॉ. अग्रवाल के अनुसार कोई भी प्रोडक्ट हमें दस साल कम उम्र का नहीं दिखा सकता, इसलिए ऐसे भुलावे में न आए। किसी भी एंटी एजिंग प्रोडक्ट का सही परिणाम आपको 6 से 8 हफ़्तों में दिखेगा। इसलिए कम से कम 3 महीने तक इसका डॉक्टर की सलाह के अनुसार इस्तेमाल करें।