सावधान, पार्लर से फैल सकता है हेपेटाइटिस संक्रमण

ऋचा कुलश्रेष्ठ

30th July 2016

जिन पार्लर का रखरखाव अच्छी तरह से नहीं किया जाता है, वहां से हेपेटाईटिस का संक्रमण आसानी से फैल सकता है...


हेपेटाइटिस लिवर की बीमारी है, जो पानी, भोजन, खून चढ़ाए जाने आदि के द्वारा विभिन्न संक्रमणों से हो सकती है। लम्बे समय तक चलने वाले संक्रमण फाईब्रोसिस (स्कैरिंग), सिरोसिस या कुछ स्थितियों में लिवर का कैंसर बन सकते हैं। हेपेटाइटिस वायरस दुनिया में हेपेटाईटिस का सबसे आम कारण है, लेकिन अन्य संक्रमण, टॉक्सिक पदार्थ (एल्कोहल, ड्रग्स) और ऑटो इम्यून बीमारियां भी हेपेटाइटिस का कारण बन सकती हैं।

हेपेटाइटिस के प्रकार

हेपेटाइटिस वायरस 5 तरह के होते हैं- टाइप ए, टाइप बी, टाइप सी, डी एवं ई और हेपेटाइटिस के ये पांचों प्रकार काफी खतरनाक, यहां तक कि जानलेवा तक हो सकते हैं। ये महामारी की तरह भी फैल सकते हैं। खासतौर पर टाइप बी एवं सी पूरी दुनिया में लाखों लोगों को क्रोनिक रूप से पीड़ित कर सकते हैं। ये दोनों संयुक्त रूप से लिवर सिरोसिस एवं कैंसर का सबसे प्रमुख कारण हैं।

पार्लर से संक्रमण

हाईज़ीन एवं एस्थेटिक्स बनाए रखने के लिए आमतौर पर महिलाएं एवं पुरुष दोनों पार्लर एवं सलोन जाते हैं। हेपेटाइटिस बी एवं हेपेटाइटिस सी खून के गंभीर वायरल संक्रमण हैं, जो लिवर को प्रभावित करते हैं। यह संक्रमण प्रमुख रूप से उन नेल सलोन एवं नाई की दुकानों से फैलते हैं, जहां साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं होती है। यहां संक्रमित उपकरणों जैसे कैंची, क्लिपर, रेज़र आदि से कटने या छिलने से हेपेटाइटिस वायरस फैलता है।

चौंकाने वाली बात यह है कि विभिन्न सार्वजनिक स्थानों, खासकर रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड एवं सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले नाइयों के लिए भी सरकार ने कोई नियम कानून नहीं बनाए हैं। इन स्थानों पर जाने वाले सैकड़ों लोग अनजाने में खुद को खतरे में डाल लेते हैं। इस संक्रमण के अधिकतर मामले ओपन स्टील ब्लेड के साथ स्ट्रेट रेज़र, जिन्हें कट थ्रॉट भी कहते हैं, से सबसे ज्यादा होते हैं। यह इसलिए भी बहुत खतरनाक होता है क्योंकि हेपेटाईटिस बी एवं सी के लक्षण प्रारंभिक संक्रमण के 10 से 20 सालों तक दिखाई नहीं देते हैं। सलोन एवं नाई की दुकानों में स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां या तो बहुत कम होती हैं या बिल्कुल नहीं होती हैं।

टैटू से रहें सावधान 

 टैटू गुदवाना भी हेपेटाईटिस बी एवं सी वायरस फैलने के प्रमुख कारणों में हैं। टैटू आपकी त्वचा पर बनाया गया स्थायी चिन्ह या डिज़ाइन होता है, जिसमें पिगमेंट्स को सुई की मदद से त्वचा की ऊपरी परत में डाला जाता है। आम तौर पर टैटू कलाकार हाथ की मशीन का प्रयोग करते हैं, जो कपड़े सिलने की स्विंग मशीन की तरह होती है। इसमें एक या उससे अधिक सुइयां त्वचा को बार बार छेदती हैं। हर छेद के साथ सुई इंक की छोटी छोटी बूंदें त्वचा में डालती है। यदि आपकी त्वचा पर प्रयोग किया जाने वाला उपकरण किसी पहले संक्रमित खून से संक्रमित हो चुका है, तो आपको टिटनेस, हेपेटाइटिस बी एवं हेपेटाइटिस सी सहित खून की कई बीमारियां हो सकती हैं। यह संक्रमण इंक की बोतल में ही पहुंच जाता है, जिसमें कलाकार अपनी सुई को बार बार डुबोता है। यदि वो डिस्पोज़ेबल सिरिंज या नए ग्लव भी प्रयोग करें, तो भी असली खतरा तो इंक की बोतल है, जिसे हम अनदेखा कर देते हैं।वायरस फैलने का मुख्य कारण यही है।

संक्रमण के लक्षण

संक्रमित शरीर में अक्सर वायरस छिपे रहते हैं और धीरे धीरे लिवर को खराब करते जाते हैं, जो सालों तक पता नहीं चलता है। फिर अचानक गंभीर बीमारी जैसे लिवर के फेल हो जाने जैसे लक्षण सामने आते हैं। हेपेटाइटिस बी के प्रमुख लक्षण पेट दर्द, बुखार, थकान, जोड़ों में दर्द एवं पीलिया हैं। हेपेटाइटिस सी के लक्षण थकान, पेशियों में ऐंठन, खराब पेट, पेट दर्द, बुखार, भूख में कमी, डायरिया, गहरा पीला पेशाब एवं हल्के रंग की टट्टी हैं।

रोकथाम एवं थकान

हेपेटाईटिस बी को अक्सर साइलेंट किलर भी कहते हैं, क्योंकि इस बीमारी से पीड़ित 95 फीसदी लोगों में तब तक कोई लक्षण नहीं दिखते हैं, जब तक बहुत देर न हो जाए। यह वायरस आमतौर पर 40 से 60 वर्ष की आयु में ज्यादा पाया जाता है। हेपेटाइटिस वायरस का सबसे अच्छा इलाज सावधानी और आराम करना है। इसके अलावा रोगी को प्रतिरोधी शक्ति को कमजोर करने वाला आहार, जैसे शक्कर/फ्रक्टोज़, अनाज एवं प्रोसेस्ड फूड नहीं लेना चाहिए। प्रतिरोधी शक्ति को बढ़ाने वाले सेहतमंद आहार में फर्मेंटेड फूड एवं ऑर्गेनिक सब्जियां खानी चाहिए। आपके विटामिन डी के स्तरों को ऑप्टिमाइज़ करना, पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पानी पीना एवं एल्कोहल और ड्रग से बचना भी रोग से बचने में मदद कर सकता है।

क्रोनिक हेपेटाइटिस सी

हेपेटाइटिस सी का आम तौर पर तब तक इलाज नहीं किया जाता है, जब तक यह क्रोनिक न बने। क्रोनिक हेपेटाइटिस का इलाज उन दवाइयों  ्द्वारा किया जाता है, जो वायरस को लिवर खराब करने से रोकती हैं और हेपेटाइटिस सी वायरस पर हमला करती हैं। इसका इलाज 24 से 48 हफ्तों तक चल सकता है।

सावधानियां

हेपेटाइटिस वायरस के बचने के लिए विशेष सावधानी रखने की जरूरत है। खास तौर पर जरूरत है कि अपने शरीर पर इस्तेमाल की जाने वाली कोई भी सुई या ड्रग सामग्री आपस में न बांटें। इन बीमारियों को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है कि यदि आपको किसी अन्य व्यक्ति का खून या खुले घाव छूने हैं, तो ग्लव्स पहनें, टूथब्रश, रेज़र, नेल क्लिपर्स आदि किसी से न लें और न ही दें। यदि आप टैटू छिदवाएं या शरीर में सुई लगवाएं, तो डिस्पोजेबल या स्टेराइल टूल्स का प्रयोग करें।

(डॉ. योगेश बत्रा, सीनियर कंसल्टेंट एवं डायरेक्टर, गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजी एवं हीपेटोलॉजी, बीएलके सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल से बातचीत के आधार पर)

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