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मेरे सपने

वैषु कु

3rd November 2016

बाल कहानी


नन्ही सी आंखों में मेरे, नन्हे नन्हे से
हैं सपने
कुछ औरों के लिए हैं लेकिन कुछ
नितांत ही मेरे अपने।
सपने देखे हैं, मैं बनकर मदर टेरेसा
कुछ कर जाऊं
मिटा गरीबी भुखमरी, मैं इस समाज
के काम तो आऊं
नन्हा सा एक सपना मेरा, कल्पना
चावला बन जाऊं।
अंतरिक्ष में घूम-घूम कर, नित नया
इतिहास बनाऊं
सपना है मेरी आंखों में, नारी का मैं
मान बढ़ाऊं।
लक्ष्मीबाई बनकर अपने देशहित में
कुछ कर जाऊं।
अगर जीत हो अच्छी मेरी, राजनीति
में उतर जाऊं।
इंदिरा गांधी की तरह मैं अपने देश
को आगे ले जाऊं,
मगर सोच बड़े पहले हैं मैंने
बंद आंख से तो नहीं, लेकिन कुछ
नितांत ही मेरे अपने।

 

पोल

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