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जानिए राष्ट्रध्वज 'तिरंगे' से जुड़ी रोचक बातें

गृहलक्ष्मी टीम

13th August 2016

किसी भी देश के लिए उसका राष्ट्रध्वज सम्मान एवं गौरव का प्रतीक होता है। राष्ट्रभक्त लोग अपने ध्वज की गरिमा बनाए रखने के लिए अपने प्राण तक न्यौछावर कर देते हैं। इसका अपमान पूरे देश का अपमान माना जाता है। प्रत्येक देश में राष्ट्रध्वज के प्रयोग के लिए संहिता बनी होती है। भारत में भी राष्ट्रध्वज के सम्मान के लिए 'राष्ट्रध्वज संहिता' बनी हुई है जिसमें राष्ट्रध्यक्ष बनाने तथा उसके प्रयोग के नियम बताए गए हैं।

 

तिरंगे से जुड़ी रोचक जानकारी

 

  • हमारे देश के नियम के अनुसार राष्ट्रध्वज सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही फहराया जा सकता है।
  • रात्रि के समय राष्ट्रध्वज स्तम्भ से उतार लिया जाता है। इसे ध्वजावतरण कहते हैं।
  • राष्ट्रीय दिवसों (स्वाधीनता दिवस, गणतंत्र दिवस, गांधी जयन्ती आदि) पर सभी नागरिक निर्बाध रूप से नियमानुसार राष्ट्रध्वज फहरा सकते हैं किन्तु ऐसे अवसरों पर भी नागरिकों को कार या वाहनों पर राष्ट्रध्वज लगाने की अनुमति नहीं है।
  • यदि शासन कभी किसी राष्ट्रीय पर्व को शोक दिवस घोषित कर राष्ट्रध्वज के अर्द्ध-अवतरण का आदेश जारी करता है तो केवल उसी भवन का ध्वज अर्द्धअवतरित किया जा सकता है, जहां शव रखा होता है, अन्य स्थानों पर ध्वज पूर्ण आरोहित रहता है।
  • राष्ट्रीय शोक दिवसों पर सरकार के विशेष आदेशानुसार सभी सार्वजनिक स्थानों से राष्ट्रध्वज स्तंभ पर आधा उतार लिया जाता है।
  • अन्य देशों के राष्ट्रीय ध्वजों अथवा संयुक्त राष्ट्रीय ध्वजों अथवा संयुक्त राष्ट्रसंघ के ध्वज के साथ सीधी पंक्ति में यदि भारतीय राष्ट्रध्वज प्रदर्शित करना हो तो, भारतीय राष्ट्रध्वज दाएं सिरे पर होना चाहिए, अन्य देशों के ध्वज भारतीय ध्वज के क्रमश: बायीं और अंग्रेजी वर्णक्रम के अनुसार प्रदर्शित होने चाहिए।

भारत का राष्ट्रध्वज कहीं भी फहराया जाए, उसे सम्मान तथा आदर का स्थान मिले। इसलिए उपरोक्त बातों के अलावा हमारे देश में 'राष्ट्रध्वज' के लिए और भी कई नियम बने हुए हैं।

  • हमारे देश में राष्ट्रध्वज के ध्वजारोहरण तथा अवतरण और परेड-निरीक्षण के समय उपस्थित व्यक्तियों को ध्वज की ओर मुख करके खड़े रहने तथा जब सामने से राष्ट्रध्वज ले जाया जा रहा हो तब भी उपस्थित व्यक्तियों को खड़े होकर अभिवादन करने का नियम है।
  • भारत के राष्ट्रध्वज का ध्वजारोहण द्रुत गति से तथा अवतरण शिष्टता के साथ मंद गति से होना चाहिए।
  • जब बिगुल के साथ ध्वजारोहण या अवतरण करना हो तो बिगुल के आह्वान तथा ध्वज के आरोहण-अवतरण में भी सामंजस्य होना जरूरी है।
  • शोभा यात्रा, जुलूस प्रभात-फेरों या परेड में हमारा राष्ट्रध्वज सबसे आगे की पंक्ति में दायीं ओर रहना चाहिए, यदि जुलूस में और भी दूसरे झंडे हों तो राष्ट्रध्वज बाकी सब ध्वजों के मध्य किन्तु अन्य सभी ध्वजों से आगे लेकर चलना चाहिए।
  • चौराहे या सड़क पर ध्वज फैलाकर प्रदर्शित करना हो तो पूर्व-पश्चिम दिशा वाले मार्ग पर केसरी छोर दक्षिण की ओर तथा उत्तर-दक्षिण दिशा वाले मार्ग पर पूर्व की ओर रहें।

यदि ध्वज किसी खिड़की या बालकनी से अनुप्रस्थ अर्थात् तिरछा लहराया जाए तो उसका केसरी भाग ध्वजदंड के शीर्ष या शिखर की ओर ही रहना चाहिए।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ऐसा है भारत का राष्ट्रध्वज

भारत का राष्ट्रध्वज तीन रंगों का है। ध्वज की ऊपरी या पहली पट्टी भारतीय केसरिया रंग की है, बीच की या दूसरी सफेद और सबसे नीचे की या तीसरी भारतीय हरित रंग की है। बीच का चक्र नेवी-नीला रंग का है। ध्वज के चक्र में निर्धारित अरों या तीलियों की संख्या 24 है। 'राष्ट्रध्वज संहिता' के अनुसार हमारे राष्ट्रध्वज के पांच मानक माप निर्धारित किए गए हैं, सेंटीमीटर में ये माप इस प्रकार हैं- (1) 53.34 गुणा 35.56, (2) 30.48 गुणा 20.32, (3) 22.86 गुणा 15.24, (4) 14.24 गुणा 10.16 और (5) 7.62 गुणा 5.08। इसके अलावा हमारे राष्ट्रध्वज के लिए खादी, ऊन या रेशम का कपड़ा निर्धारित किया गया है। विशेष अवसरों पर कुर्ते, कमीज या कोट के कॉलर पर लगाने के लिए भारत में धातु के बने ध्वज भी प्रयोग किए जा सकते हैं।

अपमान करने पर दंड देने का है प्रावधान

  • भारत में राष्ट्रध्वज को बहुत आदर और सम्मान दिया गया है, यहां लोगों के मूल कर्तव्यों में राष्ट्रध्वज के सम्मान की बात कही गई है।
  • भारत में राष्ट्रध्वज का अपमान करने पर लोगों को दंड देने का प्रावधान है।
  • हमारे यहां मानक राष्ट्रध्वज का नमूना नई दिल्ली स्थित भारतीय मानक संस्थान में सुरक्षित है।
  • तिरंगे रंग के भारत के राष्ट्रध्वज के निर्माण का इतिहास बहुत पुराना है, कई गौरव गाथाएं इस ध्वज के साथ जुड़ी हुई हैं।
  • अपने रंग एवं बनावट के कारण हमारा ध्वज विश्व भर में लोकप्रिय है।
  • विदेशी समारोह में भारत की पहचान भी हमारे ध्वज से ही की जाती है।
  • भारत में राष्ट्रध्वज पर अनेक गीत एवं कविताओं की रचना हो चुकी है।

हमारा राष्ट्रध्वज देश के गौरव और सम्मान का प्रतीक है। इसलिए प्रत्येक देशवासियों का कर्तव्य है कि वे इसका सम्मान करें तथा नियमानुसार ही इसका प्रयोग करें। ध्वजारोहण तथा ध्वजावतरण समारोह या परेड के समय सभी उपस्थित जनों को ध्वज की ओर मुख कर सावधान मुद्रा में खड़े रहना चाहिए तथा हमेशा ध्वज का सम्मान करना चाहिए।

(साभार - साधनापथ)

 

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