सभी रोगों के लिए रामबाण है 'घी', ये हैं इसके फायदे

गृहलक्ष्मी टीम

26th August 2016

घी पौष्टिक, रसायन, गरिष्ठ, स्निग्ध, शीतवीर्य और रूचिकारक होता है। इसमें वसा और विटामिन काफी मात्रा में पाए जाते हैं। यह पुष्टिदायक, बलकारक, आयुवर्द्धक तथा नेत्र-ज्योति बढ़ाने वाला होता है।

 

घी दो प्रकार का होता है- वनस्पति घी और देशी घी। वनस्पति घी विभिन्न वनस्पतियों द्वारा तैयार किया जाता है जबकि देशी घी मक्खन से बनाया जाता है जो दही से प्राप्त होता है। भैंस के घी की अपेक्षा गाय का घी श्रेष्ठ तथा शीघ्र प्रभावी होता है। यह उदर, श्वास, चर्म तथा हृदय रोगों में बहुत कारगर माना गया है। इसके अलावा घी मानसिक दुर्बलता आधासीसी दर्द, शारीरिक कमजोरी, क्षय रोग, गर्मी के छाले तथा पित्त रोगों में भी लाभदायक है। इसके प्रमुख औषधीय उपयोग इस प्रकार हैं- 

 

  • त्वचा छिल जाने, घाव होने या चोटों आदि लगने पर पुराना घी लगाने से तत्काल लाभ होता है। घी जख्मों को भर देता है।
  • यदि मुंह में छाले निकल आए हों तो रात्रिकाल उन पर घी मलकर सो जाएं। मुंह के छाले नष्ट हो जाएंगे।
  • रात्रिकाल सोते समय घी को चेहरे पर अच्छी तरह मलें। सुबह गुनगुने पानी से चेहरा धो डालें। कुछ ही दिनों में दाग-धब्बे और झुर्रियां मिट जाएंगी। 
  • गाय के घी में सेंधा नमक मिलाकर सूंघने से हिचकी आने से छुटकारा मिलता है।
  • 10 ग्राम घी में 10 ग्राम तिल का चूर्ण डालकर नित्य खाने से बवासीर में लाभ होता है।
  • घी में बूरा तथा काली मिर्च मिलाकर खाने से शरीर की कमजोरी दूर होती है। और नेत्र ज्योति बढ़ जाती है।
  • नकसीर फूटने पर नाक में घी टपकाने से रक्त का गिरना बंद हो जाता है।
  • गरम दूध में घी मिलाकर पीने से आंतें मुलायम होती हैं और पुराना कब्ज भी दूर हो जाता है।
  • घी में देसी गुड़ डालकर आग पर रख दें। पिघलने पर सेवन करें। इससे श्वास तथा खांसी में आराम मिलता है।
  • घी में जरा सा नमक मिलाकर होंठों और नाभि पर लगाने से होंठों का फटना बंद हो जाता है।
  • घी का सेवन करने और सिर पर घी की मालिश करने से स्मरण शक्ति तीव्र हो जाती है।
  • घी और शक्कर मिलाकर खाने से शरीर हृष्ट-पुष्ट और शक्तिशाली होता है।
  • सिर पर हल्के गरम घी की मालिश करें। गर्मी, ठंड या बादी के कारण होने वाला सिर दर्द दूर हो जाएगा।
  • अगर पित्ती उछलती हो और खुजली मचती हो तो घी की मालिश करने से काफी लाभ होता है।
  • धतूरे का विष शरीर में चढ़ जाने पर जितना संभव हो, गाय का घी पीना चाहिए। इससे विष का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
  • पंच साल पुराने घी में हींग को अच्छी तरह घोटकर सूंघाने से चैथिया ज्वर नष्ट हो जाता है।
  • यदि शरीर में दर्द, थकान जलन तथा ज्वरादि हो तो गाय का घी मलने से लाभ होता है।
  • प्रतिदिन दो बार सुबह शाम देशी घी सूंघने से आधासीसी दर्द का निवारण होता है।
  • यदि शराब का नशा उतारना हो तो 2-2 चम्मच घी और चीनी मिलाकर चाटें। काफी लाभ होगा।
  • गर्मी के कारण होने वाले छालों पर घी लगाने से वे कुछ ही दिनों में ठीक हो जाते हैं।
  • कुत्ते के काटने वाले स्थान पर गाय के गर्म घी से भीगी पट्टी रखें। विष का नाश हो जाएगा।
  • देशी घी में थोड़ा-सा शहद मिलाकर रोजाना चाटने से शीघ्रपतन से छुटकारा मिल जाता है।

 

(नोट-कोई भी उपाय खुद न करें, अपने डाक्टर की सलाह से ही कोई उपाय अपनाएं।)

(साभार - साधनापथ)

 

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