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नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब

अशोक चक्रधर

2nd November 2016

यदि आपके सवाल को अनाड़ीजी देते हैं पत्रिका में पहला, दूसरा व तीसरा स्थान तो आप पा सकते हैं प्रोफेसर अशोक चक्रधर की हस्ताक्षरित पुस्तकें। आप अपने सवाल यहां पोस्ट कर सकते हैं या anadi@dpb.in पर भेज सकते हैं। कृपया अपने सवाल के साथ अपना पता अवश्य लिखें।

नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब

 

अनाड़ी जी, अगर मैं भाभीजी (आपकी पत्नी) से सवाल पूछूं तो क्या जवाब मिलेगा, किसी एक अंक में क्या वह जवाब नहीं दे सकतीं?
अनीता, जम्मू


रिाज़ की बात ये है कि
अनाड़ी को कुछ नहीं आता है,
प्रश्नों के उत्तर
उन्हीं से लिखवाता है,
इसीलिए, पत्रिका से अनाड़ी जो भी
लिफाफा पाता है,
वह उन्हीं के बटुए में जाता है।


अनाड़ीजी, मेरे पति भी खुद को अनाड़ी कहलाना पसंद करते हैं, क्या करूं, कोई उपाय बताएंगे?
रामिला, नई दिल्ली


अगर वे चाहते हैं तो
इसमें क्या परेशानी है?
देखिए इसी में बुद्धिमानी है
कि आप उन्हें
पुचकारिए या मत पुचकारिए,
उन्हें अनाड़ी नंबर वन पुकारिए।
वे आपके ऊपर सब कुछ वारेंगे,
और बारम्बार पुचकारेंगे।
पर मेरे लिए
मुसीबत हो जाएगी भारी,
मैं कैसे झेलूंगा दूसरा अनाड़ी!


अनाड़ीजी, आज इंसान धर्म, प्रवचन, पूजापाठ, तीर्थयात्रा में ज्यादा समय दे रहा है, फिर भी उसके व्यवहार और आचरण में पवित्रता न रहकर कपट, स्वार्थ और धोखा देने की प्रवृत्ति भरी है। ऐसे में आचरण और सिद्धांत में संतुलन कैसे लाया जाए?
मायारानी श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश


धर्म जिनके लिए महज़ नाटक है
उनकी नीयत होती है बुरी,
ऐसे लोगों के लिए कहा गया है
'मुंह में राम, बगल में छुरी।
जिनकी नीयत ही बुरी है,
उनके पास कहां
किसी संतुलन की धुरी है?


अनाड़ीजी, आज नारी अपनी प्रतिभा को निखार कर उच्च पदों पर आसीन है, लेकिन क्या कारण है कि उतना ही अधिक उसका शोषण हो रहा है? अक्सर कामकाजी बीवियों की शिकायत होती है कि शादी के बाद पुरुष बदल जाते हैं, क्या आप इससे सहमत हैं?
महारानी बेरी, फरीदाबाद


कितनी अच्छी बात है कि
आज नारी हो रही हैं
उच्च से उच्च पदों पर आसीन,
कितनी बुरी बात है कि
भुच्च से भुच्च पति
होने लगते हैं उदासीन।
लेकिन नारी जिसे
शोषण समझ रही हैं
शायद वह शोषण न हो,
ऐसा इसलिए भी हो सकता है कि
परस्पर प्रेम का पर्याप्त पोषण न हो।
दोनों अपने-अपने अंतर्मन को खंगालें,
एक दूजे के लिए समय निकालें।


अनाड़ीजीए मेरा पोता बार-बार पूछता है कि यदि दादा की पत्नी दादी, मामा की पत्नी मामी, नाना की पत्नी नानी, चाचा की पत्नी चाची होती है तो पापा की पत्नी पानी क्यों नहीं कहलाती? क्या आप इसका जवाब बताएंगे?
शशि ठुकराल, नई दिल्ली


शशि जी, आपका पौत्र
दिमाग़ चलाने में काफ़ी समर्थ है,
लेकिन उसे बताइए कि
दादी, नानी, मामी और चाची में
प्रत्येक शब्द का
अपना एक ही अर्थ है।
पानी शब्द के हैं बहुत सारे मीनिंग,
दूसरी बात ये कि
पानी स्त्रीलिंग नहीं
पानी है पुल्लिंग।


अनाड़ीजी, जब लड़के की शादी होती है वह बहुत खुश होता है और शादी के बाद पत्नी के नखरे देखकर हमेशा रात में बैठकर खूब रोता है, आपकी क्या राय है
संजना निगम, कानपुर


नखरे दिखाना नारी के पास
कहां से आया है?
अनाड़ी मानता है कि
उसे प्रकृति ने सिखाया है।
पर निरीह पति को रुलाना
या सताना बेबात,
ये तो है गंदी बात गंदी बात।
ऐसे में क्या होता है?
या तो पति असंयम में
अमर्यादित हो जाता है
या फिर रोता है।
जब उसके प्रेम की
भरी होती है टंकी,
तो कैसी भी कर सकता है
नाटक-नौटंकी!
संबंध निखरें नहीं बिखरें
और नखरे यदि अखरें
दिन हो या रात,
ये तो है गंदी बात गंदी बात।